हरियाणा : प्रदेश सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए एक बड़ा और राहत भरा फैसला लिया है। अब राज्य में EWS आरक्षण का लाभ लेने के लिए परिवार की सालाना आय सीमा ₹6 लाख से बढ़ाकर ₹8 लाख कर दी गई है। इस फैसले के बाद लाखों ऐसे परिवार EWS श्रेणी में आ जाएंगे, जो अब तक आय सीमा के कारण इससे बाहर रह जाते थे। सरकार ने इस संबंध में आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, जिससे यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
किस आधार पर लिया गया फैसला?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हरियाणा सरकार ने यह निर्णय केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लिया है। केंद्र सरकार पहले ही EWS की आय सीमा ₹8 लाख तय कर चुकी है। अब राज्य सरकार ने भी उसी मानक को अपनाते हुए नियमों में संशोधन किया है। मुख्य सचिव कार्यालय (CSO) द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि नई आय सीमा, सरकारी नौकरियों की सीधी भर्ती और सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में दाखिले पर लागू होगी। हालांकि, आय सीमा के अलावा EWS से जुड़े बाकी सभी नियम और शर्तें पहले की तरह ही लागू रहेंगी।
जानें पहले क्या था नियम?
गौरतलब है कि वर्ष 2019 में हरियाणा में EWS के लिए ₹6 लाख सालाना आय सीमा तय की गई थी तब से अब तक यही सीमा लागू थी, महंगाई और जीवन-ययापन की लागत बढ़ने के बावजूद इसमें बदलाव नहीं हुआ था। अब करीब 6 साल बाद सरकार ने इस सीमा में बढ़ोतरी की है।
EWS पॉलिसी से जुड़ी बड़ी तस्वीर :
गौरतलब है कि हरियाणा सरकार ने अक्टूबर 2025 में EWS को लेकर एक व्यापक पॉलिसी लागू की थी, जिसका मकसद सिर्फ आरक्षण नहीं बल्कि आवास और सामाजिक समावेशन भी है। इस पॉलिसी के तहत हर लाइसेंस प्राप्त कॉलोनी में 20% प्लॉट EWS के लिए अनिवार्य होंगे। हर ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट में 15% फ्लैट EWS के लिए आरक्षित रहेंगे। इससे शहरी इलाकों में EWS परिवारों को मुख्यधारा की कॉलोनियों में रहने का मौका मिलेगा।
EWS श्रेणी में मिलने वाले प्रमुख फायदे :
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि EWS परिवारों को हरियाणा में कई स्तरों पर लाभ मिलते हैं जैसे कि :
●सरकारी नौकरियों में 10% आरक्षण
●शिक्षण संस्थानों में आरक्षण
●RTE के तहत मुफ्त शिक्षा (कक्षा 1–3)
●चिराग योजना (कक्षा 4–12) में आर्थिक सहायता
●आवास योजनाओं, सब्सिडी और सस्ते घरों तक पहुंच
अब आय सीमा बढ़ने से इन योजनाओं का दायरा और व्यापक हो जाएगा।
हर साल रिन्यू होता है EWS प्रमाणपत्र :
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार ने यह भी साफ किया है कि EWS प्रमाणपत्र आमतौर पर 1 साल के लिए वैध होता है और हर साल इसका रिन्यू कराना जरूरी होता है। यह प्रमाणपत्र सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए होता है। अब पात्रता सीमा ₹8 लाख तक बढ़ चुकी है
सरकार ने क्या कहा?
विदित है कि परिवार पहचान प्राधिकरण के स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. सतीश खोला ने इस फैसले को “ऐतिहासिक और जनकल्याणकारी निर्णय” करार किया है। उन्होनें बताते हुए कहा कि इससे शिक्षा, आवास और सरकारी योजनाओं में पात्रता बढ़ेगी। और परिवार पहचान पत्र (PPP) के जरिए लाभ सही लोगों तक पहुंचेगा। यह फैसला सबका साथ, सबका विकास की भावना को मजबूत करता है
क्यों अहम है यह फैसला?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि महंगाई के दौर में मध्यम वर्ग की बड़ी आबादी EWS सीमा से बाहर थी। अब वही वर्ग दोबारा आरक्षण और योजनाओं के दायरे में आएगा। इससे शिक्षा, नौकरी और घर तीनों मोर्चों पर राहत मिलेगी।
हरियाणा सरकार का यह फैसला सिर्फ एक संख्या बदलने का नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के लिए मौकों के दरवाजे खोलने जैसा है। ₹8 लाख की नई सीमा EWS को ज़मीन पर मजबूत करेगी और सामाजिक-आर्थिक संतुलन की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।