गुरुग्राम में 750 एकड़ अरावली को जंगल बनाने का बड़ा फ़ैसला!: ‘मातृवन योजना’ से NCR की हवा होगी साफ, वहीं 5 साल तक...पहले चरण में इन 3 गाँवों से होगी शुरुआत
गुरुग्राम में 750 एकड़ अरावली को जंगल बनाने का बड़ा फ़ैसला!

गुरुग्राम/NCR : NCR में रहने वालों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अरावली की उजड़ती पहाड़ियों को फिर से हरा-भरा बनाने के लिए हरियाणा वन विभाग ने ‘मातृवन योजना’ की शुरुआत कर दी है। इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत गुरुग्राम जिले की 750 एकड़ अरावली पहाड़ी भूमि को सघन वन में तब्दील किया जाएगा। खास बात यह है कि इस पूरे अभियान पर सरकारी खजाने से एक भी रुपया खर्च नहीं होगा और पूरा खर्च निजी कंपनियां अपने CSR फंड से उठाएंगी।

पहले चरण में कितने गांव?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मातृवन योजना के पहले चरण में 3 गांवों की पहाड़ी भूमि को चुना गया है। इनमें प्रमुख रूप से:

हैदरपुर विरान

वजीराबाद

गुरुग्राम से सटे अरावली क्षेत्र का एक अन्य हिस्सा

इन इलाकों में खनन और अतिक्रमण से हरियाली को भारी नुकसान पहुंचा था। अब यहां घना और स्थायी जंगल विकसित किया जाएगा।

750 एकड़ में बनेगी हरित पट्टी :

गौरतलब है कि इस योजना के तहत अरावली पर्वत शृंखला की 750 एकड़ पहाड़ी जमीन को हरित पट्टी (Green Belt) के रूप में विकसित किया जाएगा। वन विभाग के मुताबिक, इसका सीधा फायदा होगा भू-जल स्तर में सुधार, NCR में वायु प्रदूषण में कमी और तापमान संतुलन और जैव-विविधता की वापसी के रूप में होगा।

निजी कंपनियां आगे आईं, सरकार को नहीं लगेगा बोझ :

विदित है कि इस परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए 6 बड़ी निजी एजेंसियों और कंपनियों ने सहमति दी है। ये कंपनियां न केवल पौधारोपण करेंगी, बल्कि लंबे समय तक उनकी देखभाल भी करेंगी।

प्रमुख भागीदारी:

DLF – वजीराबाद क्षेत्र में फंडिंग और तकनीकी सहयोग

CREDAI – पर्यावरण संतुलन और निगरानी में भूमिका

5 साल तक पौधों की सुरक्षा की गारंटी :

गौरतलब है कि अक्सर पौधारोपण अभियानों में सबसे बड़ी समस्या रखरखाव की कमी होती है। इस बार वन विभाग ने सख्त शर्तें रखी हैं:

●सभी एजेंसियां कम से कम 5 साल तक पौधों की देखरेख करेंगी

●सिंचाई, खाद, फेंसिंग और सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी निजी कंपनियों की

●जब तक पौधे आत्मनिर्भर न हो जाएं, तब तक निगरानी जारी रहेगी

NCR के लिए क्यों अहम है ये योजना?

आपको बता दें कि अरावली पहाड़ियां NCR की प्राकृतिक ढाल मानी जाती हैं। इनका हरा रहना मतलब :

●दिल्ली–NCR को रेगिस्तान बनने से रोकना

●प्रदूषण, धूल और हीट वेव पर नियंत्रण

और

●आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक विरासत की सुरक्षा करना है।

मातृवन योजना सिर्फ पौधारोपण नहीं, बल्कि अरावली को जिंदा रखने की जंग है। अगर यह योजना सफल रही, तो गुरुग्राम ही नहीं, पूरा NCR एक बार फिर सांस लेने लायक बन सकता है। 750 एकड़ में उगने वाला यह जंगल आने वाले वर्षों में प्रदूषण के खिलाफ सबसे बड़ा प्राकृतिक कवच साबित हो सकता है।

अन्य खबरे