स्वास्थ्य: भारतीय महिलाओं के लिए एक साइलेंट हेल्थ अलार्म है। WHO, ICMR और CDC की रिपोर्टें बताती हैं कि देश में महिलाओं में डायबिटीज पुरुषों से ज्यादा तेजी से बढ़ रही है, और इसके पीछे तीन बड़े हार्मोनल पड़ाव- PCOS, प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज़ सबसे बड़ा रोल निभाते हैं।
भारत में महिलाओं में डायबिटीज का बढ़ता खतरा (ICMR Study)
ICMR–INDIAB Study (2023) के अनुसार:
• भारत में महिलाओं में डायबिटीज प्रिवेलेंस 14%
• पुरुषों में 13%
यानी, महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोनल उतार-चढ़ाव डायबिटीज को और तेजी से ट्रिगर कर रहे हैं।
महिलाएँ डायबिटीज की ज्यादा शिकार क्यों? (Silent Diabetes Factor)
• महिलाओं में डायबिटीज अक्सर ‘छुपी हुई’ रहती है
• थकान/कमजोरी को सामान्य मान लिया जाता है
• हार्मोनल बदलाव शुगर को बार-बार अस्थिर करते हैं
• तनाव का असर महिलाओं में दोगुना
लक्षण पुरुषों से अलग
40% महिलाएँ डायबिटीज पकड़ने से पहले ही हार्ट रिस्क ज़ोन तक पहुँच जाती हैं
• हार्मोन और बल्ड शुगर का छुपा युद्ध
• महिलाओं में चार हार्मोन सीधे शुगर को प्रभावित करते हैं:
PCOS: युवा महिलाओं में डायबिटीज का सबसे बड़ा कारण
ICMR + CDC के अनुसार:
• PCOS वाली 70% महिलाएँ इंसुलिन रेजिस्टेंस की शिकार
• धीरे-धीरे यही टाइप-2 डायबिटीज में बदल जाता है
PCOS से डायबिटीज का पूरा रास्ता:
पीरियड अनियमित
एंड्रोजन बढ़ना
वजन बढ़ना
इंसुलिन रेजिस्टेंस
प्रीडायबिटीज
डायबिटीज
यानी PCOS सिर्फ प्रजनन समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर मेटाबॉलिक चेतावनी है।
प्रेग्नेंसी: Gestational डायबिटीज़-- महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक चरण
भारत में गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज यानी GDM तेजी से बढ़ रहा है।
WHO के अनुसार “हर 6 में से 1 गर्भवती महिला को Gestational Diabetes होता है।”
ICMR रिपोर्ट:
• शहरी भारत में GDM 20–25%
• ग्रामीण में 10–14%
यह आज महिलाओें में डायबिटीज का सबसे बड़ा कारण बन चुका है।
प्रेग्नेंसी में शुगर क्यों बढ़ जाती है?
गर्भावस्था के दौरान प्लेसेंटा कई हार्मोन बनाता है:
• HPL (Human Placental Lactogen)
• एस्ट्रोजन
• प्रोजेस्टेरॉन
• कोर्टिसोल
• प्रोलैक्टिन
ये हार्मोन बच्चे को पोषण देने के लिए जरूरी हैं, लेकिन इन्हीं के कारण शरीर में Pregnancy-Induced Insulin Resistance बनती है। यानि इंसुलिन कमजोर हो जाता है… और शुगर बढ़ने लगती है।
कौनसा समय GDM के लिए सबसे खतरे वाला?
24–28 हफ्ते: GDM सबसे ज्यादा इसी समय में होता है
हाई-रिस्क महिलाओं में 12वें हफ्ते पर भी शुरुआती टेस्ट जरूरी:
हाई-रिस्क महिलाएँ:
• PCOS
• 30+ उम्र
• फैमिली हिस्ट्री
• पहले GDM हुआ हो
• मोटापा
GDM के लक्षण (जो अक्सर प्रेग्नेंसी के सामान्य लक्षण समझ लिए जाते हैं)
• लगातार थकान
• बार-बार प्यास लगना
• बार-बार पेशाब
• धुंधला दिखना
• बार-बार Yeast Infection
इसीलिए GDM अक्सर देर से पकड़ा जाता है।
मां पर GDM के गंभीर खतरे
• हाई BP
• प्री-क्लेम्पसिया
• समय से पहले डिलीवरी
• सी-सेक्शन का जोखिम
• बार-बार यूरिन/स्किन इंफेक्शन
• प्रेग्नेंसी कठिन होना
डिलीवरी के बाद टाइप-2 डायबिटीज का 10 गुना खतरा
WHO कहता है “GDM वाली 50% महिलाएँ 10 वर्षों में टाइप-2 डायबिटीज की शिकार हो जाती हैं।”
बच्चे पर असर (Mother + Baby दोनों के लिए जरूरी जानकारी)
Macrosomia
बच्चा 4 किलो से ज्यादा वजन का पैदा होता है- डिलीवरी जोखिम बढ़ता है।
Low Sugar at Birth
जन्म के बाद Hypoglycemia
Breathing Problems
फेफड़े पूरी तरह विकसित न होने की वजह से।
Lifetime Risk of Obesity + Diabetes
CDC के अनुसार “GDM वाली मां के बच्चे में भविष्य में मोटापा और डायबिटीज का खतरा दोगुना।”
जन्म के बाद Jaundice (Hyperbilirubinemia)
प्रेग्नेंसी में डायबिटीज की जांच (सबसे विश्वसनीय टेस्ट)
OGTT (Oral Glucose Tolerance Test)
भारत में GDM का स्टैंडर्ड टेस्ट:
प्रक्रिया:
75g ग्लूकोज
1 घंटे बाद ब्लड शुगर टेस्ट
≥ 140 mg/dl = GDM
गर्भावस्था के 24–28 सप्ताह में यह टेस्ट जरूरी है।
प्रेग्नेंसी में शुगर कंट्रोल करने के 5 सबसे असरदार उपाय:
Plate Method Diet
आधी प्लेट सब्जियाँ
1/4 प्रोटीन
1/4 रोटी/ब्राउन राइस
मैदा, मिठाई, सफेद चावल कम
रोजाना 30 मिनट प्रेग्नेंसी वॉक
Meal Spacing (बार-बार थोड़ा खाना)
नींद पूरी
डिलीवरी के बाद क्या होता है? (बहुत कम लोग जानते हैं)
• 80% मामलों में शुगर सामान्य
• लेकिन रिस्क खत्म नहीं होता
• 40% महिलाओं को अगले प्रेग्नेंसी में फिर GDM
• 10-12 साल में टाइप-2 डायबिटीज का 10 गुना खतरा
• इसलिए Delivery के 6 सप्ताह बाद OGTT टेस्ट जरूरी
मेनोपॉज़: 50 के बाद डायबिटीज का सबसे बड़ा खतरा
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के अनुसार “मेनोपॉज़ में एस्ट्रोजन कम होने से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ जाता है।”
इस उम्र में:
• पेट की चर्बी बढ़ती है (Visceral Fat)
• वजन तेजी से बढ़ता है
• नींद, मूड और मेटाबॉलिज्म बिगड़ता है- शुगर हाई
किन महिलाओं में डायबिटीज का खतरा सबसे ज्यादा?
• PCOS
• 30+ प्रेग्नेंट महिलाएँ
• पहले GDM हो चुका हो
• मोटापा
• थायरॉयड
• मेनोपॉज़
• फैमिली हिस्ट्री
महिलाओं के लिए WHO-ICMR की 7 जरूरी सलाह:
• वजन कंट्रोल
• हफ्ते में 5 दिन 30 मिनट एक्टिव
• प्रेग्नेंसी में 24-28 हफ्ते पर GDM टेस्ट
• PCOS में हर 6 महीने इंसुलिन टेस्ट
• मेनोपॉज़ में HbA1c + Lipid Profile
• मिठाई/मेडा कम
• नींद 7 घंटे
निष्कर्ष:
• PCOS, प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज़, ये तीन हार्मोनल पड़ाव महिलाओं के शरीर को बार-बार “मेटाबॉलिक झटका” देते हैं।
• अगर समय पर टेस्ट और लाइफस्टाइल नियंत्रण न किया जाए तो डायबिटीज चुपचाप घर कर सकती है।
• WHO की चेतावनी साफ है, Prevention ही सबसे बड़ी दवा है।