जयपुर/नई दिल्ली : देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर ऐसा खुलासा हुआ है जिसने शिक्षा व्यवस्था की जड़ों तक हिला दी है। राजस्थान SOG की जांच में सामने आया है कि NEET परीक्षा का पेपर परीक्षा से कई सप्ताह पहले ही लीक हो चुका था और उसे देश के कम से कम 10 राज्यों में बेचा गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक यह सिर्फ पेपर लीक नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये का संगठित नेटवर्क है, जिसमें दलाल, कोचिंग कनेक्शन, ई-मित्र संचालक, मेडिकल छात्र और कथित राजनीतिक पहुंच रखने वाले लोग शामिल बताए जा रहे हैं। अब पूरा मामला Central Bureau of Investigation यानी CBI के हाथों में पहुंच चुका है।
परीक्षा से 2-3 हफ्ते पहले ही बाहर आ गया था पेपर
आपको बता दें कि राजस्थान SOG के अतिरिक्त महानिदेशक Vishal Bansal ने माना कि NEET का प्रश्नपत्र माफिया नेटवर्क तक परीक्षा से करीब दो से तीन सप्ताह पहले पहुंच चुका था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सीकर जैसे कोचिंग हब में कुछ छात्रों को पहले से ही “गेस पेपर” के नाम पर वही सवाल दिए गए, जो बाद में असली परीक्षा में आए। जांच में सामने आया कि छात्रों से कहा गया था कि “99.99 प्रतिशत सवाल हूबहू आएंगे” और आखिरकार ऐसा ही हुआ।
नासिक की प्रिंटिंग प्रेस से शुरू हुआ खेल?
SOG की शुरुआती जांच के अनुसार, पेपर कथित तौर पर नासिक की एक प्रिंटिंग प्रेस से बाहर निकला और फिर हरियाणा के गुरुग्राम तक पहुंचा। वहां से MBBS छात्र यश यादव नाम के युवक तक पेपर पहुंचने की बात सामने आई है। आरोप है कि यश ने राजस्थान सहित कई राज्यों में यह पेपर मोटी रकम लेकर बेचा।
30 लाख में खरीदा गया पेपर!
आपको बता दें कि जांच एजेंसियों के मुताबिक जयपुर जिले के जमवारामगढ़ निवासी दो भाइयों दिनेश बिंवाल और मांगीलाल ने कथित तौर पर 30 लाख रुपये में पेपर खरीदा। इसके बाद यह पेपर कई छात्रों तक लाखों रुपये लेकर पहुंचाया गया। आरोप है कि सीकर में पढ़ रहे छात्रों को 2 से 5 लाख रुपये तक लेकर यह “गेस पेपर” बेचा गया।
राजनीतिक कनेक्शन से बढ़ी हलचल
विदित है कि जांच में हिरासत में लिए गए दिनेश बिंवाल के बारे में बताया जा रहा है कि वह भाजपा संगठन से जुड़ा रहा है और जिला स्तर पर पद भी संभाल चुका है। हालांकि परिवार ने आरोपों से इनकार किया है और पूरे मामले को झूठा बताया है।
केरल तक पहुंचा लीक पेपर
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी के बेटे ने कथित तौर पर पेपर अपने एक दोस्त को इंटरनेट मीडिया के जरिए भेजा, जो केरल में MBBS की पढ़ाई कर रहा था। वहां से यह पेपर आगे और लोगों तक पहुंचा। यानी लीक सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था।
कोचिंग और करियर काउंसलर भी जांच के घेरे में
आपको बता दें कि सीकर के कुछ कोचिंग संचालकों और एक करियर काउंसलर की भूमिका भी जांच एजेंसियों के रडार पर है। SOG को शक है कि छात्रों को “गेस पेपर” बेचकर मोटी रकम वसूली गई और पूरे नेटवर्क ने परीक्षा को कारोबार बना दिया।
एक ही परिवार के 4 बच्चों का मेडिकल में चयन, अब जांच
मामले में एक और बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। जांच एजेंसियां अब इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि एक ही परिवार के चार बच्चों का एक ही साल मेडिकल कॉलेजों में चयन कैसे हुआ। परिवार के कुछ सदस्य राजस्थान, मुंबई और जयपुर के मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे हैं। अब उनकी चयन प्रक्रिया भी जांच के दायरे में लाई जा सकती है।
करीब 1000 से ज्यादा छात्रों तक पहुंचा पेपर
SOG और राजस्थान पुलिस के अनुसार अब तक की जांच में यह संकेत मिले हैं कि लगभग 1000 से ज्यादा छात्रों तक लीक पेपर पहुंचाया गया था। पूरे मामले में कई लोगों को हिरासत में लिया गया है और दस्तावेजों समेत जांच CBI को सौंप दी गई है।
NEET जैसे प्रतिष्ठित एग्जाम में इतने बड़े स्तर पर लीक के आरोप सामने आने के बाद लाखों छात्रों और अभिभावकों में गुस्सा है। सोशल मीडिया पर छात्र पूछ रहे हैं कि “क्या मेहनत करने वालों का भविष्य अब माफिया तय करेंगे?” अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस महाघोटाले की जड़ें सिर्फ कुछ राज्यों तक सीमित हैं या फिर देशभर में फैला कोई बड़ा एग्जाम माफिया सिस्टम इसके पीछे काम कर रहा है।