बिना डॉक्टर की पर्ची के, अब नहीं मिलेगा कफ सिरप!: सरकार ने बढ़ाई सख्ती, काउंटर-बिक्री पर लगेगी लगाम; बच्चों की जान...जानें फैसले की वजह और होने वाले बदलाव?
बिना डॉक्टर की पर्ची के, अब नहीं मिलेगा कफ सिरप!

नई दिल्ली/स्वास्थ्य : कफ सिरप को लेकर अब लापरवाही नहीं चलेगी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाते हुए ड्रग्स नियम-1945 में संशोधन का मसौदा जारी कर दिया है। प्रस्ताव साफ है कि डॉक्टर की पर्ची के बिना कफ सिरप नहीं मिलेगा। यानी अब मेडिकल स्टोर पर “सीधे काउंटर से सिरप” का चलन खत्म होने वाला है।

30 दिन के भीतर जनता से सुझाव और आपत्तियाँ :
आपको बता दें कि सरकार का यह कदम तरल दवाओं के दुरुपयोग, खासकर बच्चों और युवाओं में गलत इस्तेमाल पर रोक लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है। मसौदे पर 30 दिन के भीतर जनता से सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं। तय समय में आए सभी सुझावों पर विचार के बाद अंतिम फैसला होगा।

क्या बदलेगा नियमों में? सरल भाषा में समझिए :
गौरतलब है कि कफ सिरप को अब OTC (ओवर-द-काउंटर) श्रेणी में ढील नहीं मिलेगी। ड्रग्स नियम, 1945 की अनुसूची K में मौजूद “syrup” शब्द हटाने का प्रस्ताव है। आपको बता दें कि अनुसूची K उन दवाओं से जुड़ी है जिन्हें कुछ लाइसेंस नियमों से छूट मिलती है। “syrup” शब्द हटते ही कफ सिरप की बिना पर्ची बिक्री मुश्किल हो जाएगी। सरकार का तर्क है कि नियमों को और स्पष्ट, सख्त व प्रभावी बनाने के लिए यह बदलाव जरूरी है।

डॉक्टरों ने क्यों किया समर्थन?
विदित है कि देश के बड़े अस्पतालों के विशेषज्ञ इस फैसले को समय की जरूरत बता रहे हैं। सर गंगाराम अस्पताल के चिकित्सा विभाग अध्यक्ष डॉ. अतुल काकर का कहना है कि “कई जहरीले तत्वों वाले कफ सिरप पहले ही बैन हो चुके हैं। राजस्थान और मध्य प्रदेश में बच्चों की मौतें ऐसे सिरप से जुड़ी रहीं। केमिस्ट को दवा लिखने का अधिकार नहीं होना चाहिए।” फोर्टिस अस्पताल शालीमार बाग के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक जैन ने कहा कि “OTC छूट सूची से सिरप हटाना बच्चों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी कदम है।”

सरकार क्यों हुई सख्त?
आपको बता दें कि कफ सिरप में मौजूद कुछ तत्व नशे की आदत बढ़ाते हैं। बिना सलाह सेवन से ब्रेन, लिवर और सांस तंत्र पर खतरा बना रहता है। बच्चों में ओवरडोज और गलत दवा से जान का जोखिम बढ़ा है। मेडिकल स्टोर पर डॉक्टर बनकर दवा देना बड़ी समस्या का कारण बन सकता है। सरकार का साफ मानना है कि इलाज का फैसला डॉक्टर करें, दुकानदार नहीं।

आगे क्या होगा?
विदित है कि अब मसौदे पर 30 दिन तक सुझाव लिए जाएंगे। इसके बाद संशोधन को राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा। नोटिफिकेशन के साथ ही नियम लागू हो जाएंगे

सरकार का यह कदम दवाओं की दुनिया में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। कफ सिरप जैसी आम दिखने वाली दवा अब बिना पर्ची नहीं, क्योंकि एक छोटी लापरवाही किसी की जान पर भारी पड़ सकती है। सरकार की यह सख्ती मेडिकल स्टोर्स की मनमानी रोकेगी और बच्चों को सुरक्षित बनाएगी।

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