आखिर ठंड में क्यों आती है ज्यादा नींद, कई लोग नहीं जानते इसकी असली वजह!: 'मेलाटोनिन' से लेकर बॉडी क्लॉक तक...डाक्टर्स से जानें सर्दियों में परफेक्ट स्लीप के 10 गोल्डेन रूल?
आखिर ठंड में क्यों आती है ज्यादा नींद, कई लोग नहीं जानते इसकी असली वजह!

स्वास्थ्य : सर्दियां आते ही अलार्म बंद करके फिर से रजाई में घुस जाने का मन करता है। ऑफिस हो या पढ़ाई, नींद जैसे पीछा ही नहीं छोड़ती। अक्सर लोग इसे आलस मान लेते हैं, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। सर्दियों में ज्यादा नींद आना शरीर की कमजोरी नहीं, बल्कि बायोलॉजिकल साइंस का असर है। आज हम आसान भाषा में समझेंगे कि

ठंड में नींद क्यों बढ़ जाती है? औऱ

कैसे पाएं सर्दियों में परफेक्ट स्लीप?

ठंड में नींद क्यों बढ़ जाती है?

वजह 1: दिन छोटे, रातें लंबी

गौरतलब है कि सर्दियों में सूरज देर से निकलता है और जल्दी ढल जाता है। जैसे-जैसे अंधेरा बढ़ता है, दिमाग को सिग्नल मिलता है “अब आराम का समय है।” इससे शरीर में मेलाटोनिन नाम का नींद वाला हॉर्मोन ज्यादा बनने लगता है।

मेलाटोनिन क्या है और क्यों बढ़ता है?

मेलाटोनिन हमारे दिमाग की पीनियल ग्रंथि से निकलने वाला हॉर्मोन है, जो तय करता है कि हमें कब सोना है।

अंधेरा - मेलाटोनिन बढ़ जाती

रोशनी → मेलाटोनिन घटने लगती।

सर्दियों में धूप कम होती, अंधेरा ज्यादा होता है, जिससे मेलाटोनिन ज्यादा हो जाता है जिसका नतीजा यह होता कि नींद जल्दी और ज्यादा आती है।

सीजनल बायोलॉजिकल रिदम क्या होती है?

आपको बता दें कि हमारे शरीर में एक आंतरिक घड़ी (Body Clock) होती है, जो मौसम के हिसाब से खुद को ढाल लेती है। यह गर्मी में एक्टिव मोड और सर्दी में स्लो मोड में होती है। ठंड में यह घड़ी धीमी हो जाती है, जिससे एनर्जी कम लगती है, नींद लंबी होती है और सुबह उठना मुश्किल लगता है

ज्यादा नींद है ज्यादा आलस?

बिल्कुल नहीं। ठंड में शरीर गर्मी बचाने के लिए कम ऊर्जा खर्च करता है। इससे मेटाबॉलिज्म स्लो होता है, ब्लड सर्कुलेशन थोड़ा धीमा पड़ता है इसलिए शरीर खुद ज्यादा आराम मांगता है। यह नेचुरल सर्वाइवल मैकेनिज्म है, न कि सुस्ती।

धूप की कमी और लो मूड का कनेक्शन

आपको बता दें कि कम धूप मिलने से सेरोटोनिन (हैप्पी हॉर्मोन) घटता है जिससे मूड डाउन होता है औऱ दिन में भी उनींदापन लगता है। कुछ लोगों में यह स्थिति सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (SAD) तक पहुंच जाती है, जिसमें बहुत ज्यादा नींद, मन उदास और काम में मन न लगना जैसे लक्षण आते हैं।

सर्दियों में कितनी नींद सही है?

उम्र सामान्य नींद सर्दियों में

वयस्क 7–8 घंटे 8–9 घंटे
बुजुर्ग 6–7 घंटे 7–8 घंटे

10 घंटे से ज्यादा नींद रोजाना लेने लगे तो यह थकान और सुस्ती बढ़ा सकती है।

कैफीन, मोबाइल और कमरे का तापमान :

गौरतलब है कि यह तीनों नींद के सबसे बड़े दुश्मन है।

चाय-कॉफी: मेलाटोनिन को दबाती है

मोबाइल की ब्लू लाइट: दिमाग को दिन का भ्रम देती है

बहुत गर्म कमरा: नींद की गहराई कम करता है

आदर्श रूम टेम्परेचर: 18–20°C होता है।

सर्दियों में परफेक्ट स्लीप हाइजीन कैसे बनाएं?

सर्दियों में परफेक्ट स्लीप हाइजीन के 10 गोल्डन रूल है।

  1. रोज एक तय समय पर सोएं

  2. तय समय पर ही उठें

  3. सोने से 1 घंटा पहले स्क्रीन बंद

  4. दिन में 20–30 मिनट धूप लें

  5. शाम 4 बजे के बाद चाय-कॉफी नहीं

  6. रात का खाना हल्का रखें

  7. खाने के बाद 10–15 मिनट टहलें

  8. बिस्तर साफ और आरामदायक रखें

  9. कमरे में अंधेरा रखें

  10. हवा का हल्का वेंटिलेशन रखें

सर्दियों में बेहतर नींद के घरेलू तरीके :

सोने से पहले गर्म सूप या हल्दी वाला दूध

हल्का स्ट्रेच या मेडिटेशन

किताब पढ़ना (मोबाइल नहीं)

गहरी सांसें (Deep Breathing) लेना।

सर्दियों में ज्यादा नींद आना कमजोरी नहीं, बल्कि शरीर की समझदारी है। लेकिन अगर नींद जरूरत से ज्यादा बढ़ जाए, दिनभर थकान रहे या कामकाज प्रभावित हो तो इसे नजरअंदाज न करें। सही रूटीन, धूप और स्लीप हाइजीन से सर्दियों की नींद को वरदान बनाया जा सकता है, बीमारी नहीं।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट चिकित्सा शोध, जनरल जानकारी और विशेषज्ञों की सलाह पर आधारित है। किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श ज़रूर करें। NCR पत्रिका इसकी सटीकता या व्यक्तिगत असर की जिम्मेदारी नहीं लेता।

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