1 अप्रैल से दर्द-बुखार की दवाएं होंगी महंगी!: 1000+ जरूरी मेडिसिन के बढ़े दाम, पैरासिटामोल-एंटीबायोटिक्स के नए रेट जारी, जानें किन दवाओं के कितने बढ़े दाम और इसके पीछे की वजह_एक नजर
1 अप्रैल से दर्द-बुखार की दवाएं होंगी महंगी!

नई दिल्ली : आम आदमी की जेब पर महंगाई का एक और झटका लगने जा रहा है। 1 अप्रैल 2026 से देशभर में इस्तेमाल होने वाली जरूरी दवाओं, जैसे बुखार, दर्द और संक्रमण की दवाएं महंगी होने वाली हैं। सरकार ने आवश्यक दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी की अनुमति दे दी है, जिसका असर सीधे आम मरीजों पर पड़ेगा।

सरकार ने दी कीमत बढ़ाने की मंजूरी

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि National Pharmaceutical Pricing Authority (NPPA) ने आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची (NLEM) में शामिल दवाओं के दाम बढ़ाने की अनुमति दी है। करीब 0.6% तक कीमत बढ़ाई जा सकती है। यह बढ़ोतरी 1000 से ज्यादा जरूरी दवाओं पर लागू होगी। नई कीमतें 1 अप्रैल से लागू होंगी।

किन दवाओं पर पड़ेगा असर?

गौरतलब है कि इस फैसले का असर उन दवाओं पर पड़ेगा जो हर घर में इस्तेमाल होती हैं—

•बुखार की दवा (जैसे पैरासिटामोल)
•एंटीबायोटिक्स (संक्रमण की दवाएं)
•दर्द निवारक (पेन किलर)
•एंटी-इन्फेक्टिव और सिरप

यानी छोटी बीमारी भी अब पहले से महंगी पड़ सकती है

क्यों बढ़ रही हैं दवाओं की कीमतें?

विदित है कि फार्मा उद्योग के अनुसार, इसके पीछे सबसे बड़ा कारण कच्चे माल (API) की कीमतों में तेज उछाल है। API की कीमतों में 30–35% तक वृद्धि हुई है। ग्लिसरीन करीब 64% महंगा होगा। पैरासिटामोल 25% महंगा, सिप्रोफ्लोक्सासिन 30% महंगी, पैकेजिंग (एल्यूमीनियम, PVC) भी 40% तक महंगी होगी।

अंतरराष्ट्रीय हालात और सप्लाई चेन पर दबाव इसकी बड़ी वजह माने जा रहे हैं

क्या है नया नियम?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि दवा निर्माता अब WPI (थोक मूल्य सूचकांक) के आधार पर कीमत बढ़ा सकते हैं। इसके लिए अलग से सरकारी अनुमति की जरूरत नहीं होगी। लेकिन तय सीमा से ज्यादा कीमत लेना गैरकानूनी होगा

कुछ दवाओं की अनुमानित कीमतें

•एमोक्सिसिलिन 500 mg: ₹7.54
•एजिथ्रोमाइसिन 500 mg: ₹24.14
•सिप्रोफ्लोक्सासिन 500 mg: ₹4.35
•डाइक्लोफेनाक 50 mg: ₹2.10
•एस्पिरिन (150 mg): ₹0.72

सबसे सस्ती: एस्पिरिन
सबसे महंगी: एजिथ्रोमाइसिन

आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

•रोजमर्रा की दवाएं महंगी होंगी
•लंबे इलाज का खर्च बढ़ेगा
•गरीब और मध्यम वर्ग पर ज्यादा असर
•खासकर बुजुर्ग और नियमित दवा लेने वाले मरीजों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा

फार्मा इंडस्ट्री का क्या कहना है?

गौरतलब है कि उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे माल और सॉल्वेंट्स की लागत तेजी से बढ़ी है। मौजूदा बढ़ोतरी “पर्याप्त नहीं” है। भविष्य में और कीमत बढ़ाने की मांग भी उठ सकती है

1 अप्रैल से दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी भले ही छोटी दिखे, लेकिन इसका असर व्यापक होगा। हर घर की जरूरत की दवाएं महंगी होगी जिसका सीधा असर आम आदमी पर होगा। महंगाई के इस दौर में अब बीमारी का इलाज भी जेब पर और भारी पड़ने वाला है।

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