धर्म और संस्कृति: 2025 में शरद पूर्णिमा का पर्व 6 अक्टूबर, सोमवार को मनाया जाएगा। हालांकि पूर्णिमा तिथि 7 अक्टूबर तक जारी रहेगी लेकिन इस दिन स्नान, दान और पूजा की विधि 7 अक्टूबर को की जाएगी। इस दिन विशेष रूप से चंद्र देव की पूजा, खीर का सेवन और दान का महत्व है।
शरद पूर्णिमा 2025; तिथि और समय:
पूर्णिमा तिथि आरंभ: 6 अक्टूबर 2025, दोपहर 12:23 बजे
पूर्णिमा तिथि समापन: 7 अक्टूबर 2025, सुबह 9:16 बजे
चन्द्रोदय समय (दिल्ली के अनुसार): लगभग 5:27 बजे शाम
पूजा विधि और महत्व:
चंद्र देव की पूजा: इस दिन चंद्र देव को दूध, चावल और शक्कर से बनी खीर अर्पित की जाती है।
खीर का महत्व: रात्रि में खीर को चाँदनी में रखकर अगले दिन सेवन करने से स्वास्थ्य और समृद्धि में वृद्धि होती है।
दान: इस दिन अन्न, वस्त्र, फल और अन्य सामग्री का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
स्नान: पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है और मानसिक शांति शुकून मिलती है।
शरद पूर्णिमा का आयुर्वेदिक महत्व:
आयुर्वेद के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा की किरणों में विशेष औषधीय गुण होते हैं। इस रात को खीर चाँदनी में रखने से उसमें अमृत जैसे गुण समाहित हो जाते हैं, जो शरीर और मन को सशक्त बनाते हैं।
ज्योतिषीय महत्व:
•शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा कृष्ण पक्ष के पूर्णिमा में होता है।
•इस दिन किए गए धार्मिक कर्म व्यक्ति के भाग्य और मानसिक शांति में वृद्धि करते हैं।
•विशेष मुहूर्त में दान और पूजा करने से फल कई गुना बढ़ जाता है।
शरद पूर्णिमा के अन्य नाम और महत्व:
कोजागरी पूर्णिमा: यह नाम विशेष रूप से महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में प्रचलित है।
रास पूर्णिमा: ब्रज क्षेत्र में इसे रास पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है, जो भगवान श्री कृष्ण के रास लीला से जुड़ा हुआ है।
माहात्म्य: यह दिन विशेष रूप से देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा के लिए उपयुक्त माना जाता है।
शरद पूर्णिमा की प्रमुख कथाएँ:
1.देवी लक्ष्मी से जुड़ी कथा
मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं और अपने भक्तों पर सुख-समृद्धि की वर्षा करती हैं।
इस दिन दीपक जलाने और दान करने से देवी लक्ष्मी विशेष प्रसन्न होती हैं। इसलिए इस दिन लोग खीर बनाते हैं दान करते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं।
2.चंद्र देव और खीर की कथा
कथा है कि चंद्र देव की पूर्णिमा की रात की किरणों में विशेष शक्ति होती है।
किसी राजकुमार या राजा के समय में रात्रि में खीर चाँद की रोशनी में रखी गई थी।
अगले दिन उसे खाने से न केवल स्वास्थ्य ठीक रहता था बल्कि धन-धान्य और सुख-समृद्धि भी बढ़ती थी।
इसी कारण शरद पूर्णिमा की खीर को “अमृत खीर” कहा जाता है।
3.कृष्ण रास लीला और रास पूर्णिमा
ब्रज क्षेत्र और उत्तर भारत में इसे रास पूर्णिमा कहा जाता है।
कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने इस दिन रास लीला का आयोजन किया था।
गोकुल और वृंदावन की गोकुलिनियों और गोपों के साथ भगवान ने रात्रि को रास लीला की जो प्रेम भक्ति और मिलन का प्रतीक है।
इसलिए इस रात को जागरण और भजन-कीर्तन करना शुभ माना जाता है।
4.कोजागरी पूर्णिमा कथा (महाराष्ट्र और बंगाल में)
कहा जाता है कि इस दिन देवी लक्ष्मी जागती हैं और जिनके घर में दीपक जलते हैं उनके घर लक्ष्मी माता का वास होता है।
लोग कहते हैं इस रात को जागरण करने वाले कभी गरीब नहीं होते।
कोजागरी शब्द का अर्थ है, को जाग्रति? यानी कौन जाग रहा है? जो जागर करने वालों को लक्ष्मी प्रसन्न करने का संकेत है।
5.दान और पुण्य की कथा
पुराणों में उल्लेख है कि इस दिन किए गए दान का फल सौ गुना अधिक मिलता है।
गरीबों और ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र और धन देने से पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
निष्कर्ष:
शरद पूर्णिमा 2025 का पर्व 6 अक्टूबर को मनाया जाएगा, जबकि स्नान और दान की विधि 7 अक्टूबर को की जाएगी। यह दिन चंद्र देव की पूजा, खीर के सेवन और दान के लिए अत्यंत शुभ है। इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।