नई दिल्ली : देश में तेजी से बढ़ रहे “डिजिटल अरेस्ट” जैसे साइबर फ्रॉड ने अब सरकार को बड़े एक्शन के लिए मजबूर कर दिया है। बुजुर्गों, रिटायर्ड अफसरों और कारोबारियों को फर्जी कॉल, वीडियो कॉल और धमकियों के जरिए करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोहों पर अब शिकंजा कसने की तैयारी है। इसी बीच सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना विस्तृत एक्शन प्लान पेश किया है, जिसमें सिम कार्ड से लेकर बैंक खातों तक सख्त कदमों की रूपरेखा तैयार की गई है।
डिजिटल अरेस्ट क्या है और कैसे हो रही है ठगी?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साइबर ठग खुद को पुलिस, CBI या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। वे “आपके खिलाफ केस है”, “आपको डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है” ऐसे बहानों से पीड़ित को घंटों कॉल पर रखा जाता है और फिर बैंक खाते से पैसा ट्रांसफर करवा लिया जाता है। सबसे खतरनाक बात यह है कि पैसा कुछ ही घंटों में कई खातों में घुमा दिया जाता है, जिससे ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।
सरकार लेगी ये बड़े एक्शन; अब क्या बदलेगा?
गौरतलब है कि सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि अब टेक्नोलॉजी के जरिए साइबर अपराध पर सीधा वार होगा।
1. सिम कार्ड पर सबसे बड़ा वार
आपको बता दें कि अब सिम कार्ड के लिये बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा। फर्जी और संदिग्ध सिम तुरंत ब्लॉक किए जाएंगे। सिम जारी करने की प्रक्रिया पर राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी की जाएगी।
2. बैंक खातों पर तुरंत रोक
विदित है कि अब संदिग्ध खातों में पैसा आते ही निकासी पर अस्थायी रोक लगेगी। फ्रॉड ट्रांजैक्शन को शुरुआती स्तर पर ही फ्रीज करने की तैयारी है। इसके लिए रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया की SOP लागू करने की मांग की जा रही है।
3. टेलीकॉम कंपनियों की जवाबदेही तय
आपको बता दें कि अब रियल-टाइम डेटा पुलिस और जांच एजेंसियों से शेयर करना होगा। सिम एक्टिवेशन में गड़बड़ी पर सख्त कार्रवाई होगी। पॉइंट ऑफ सेल (POS) वेंडर्स की जवाबदेही तय करेगा।
4. टेक कंपनियों पर भी दबाव
गौरतलब है कि व्हाट्सप्प जैसे प्लेटफॉर्म्स पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू करने की सिफारिश की गयी है। स्कैम कॉल्स की पहचान और ब्लॉकिंग सिस्टम मजबूत होगा। डिलीट अकाउंट्स का डेटा कम से कम 180 दिन तक सुरक्षित रखा जाएगा।
5. हाईटेक निगरानी सिस्टम
बार-बार फ्रॉड में इस्तेमाल होने वाले डिवाइस IDs को ब्लॉक किया जायेगा। लंबी चलने वाली स्कैम कॉल्स को ट्रैक करने की तकनीक लगायी जाएगी। I4C और कानून एजेंसियों के साथ सीधा समन्वय किया जायेगा।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
आपको बता दें कि इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है और सरकार से ठोस कदम उठाने को कहा है। सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल ने अदालत में रिपोर्ट पेश कर इन सभी उपायों को लागू कराने की मांग की है।
क्यों जरूरी है ये सख्ती?
गौरतलब है कि डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड तेजी से बढ़ रहा है। आम लोगों में डर और भ्रम फैलाकर ठगी हो रही है। जांच एजेंसियों को समय पर सुराग नहीं मिल पाता। अब सरकार का फोकस “फ्रॉड होने से पहले ही सिस्टम को रोक देना” है।
आम लोगों के लिए क्या संकेत?
विदित है कि अब सिर्फ सरकार नहीं, आपको भी सतर्क रहना होगा। कोई भी एजेंसी फोन पर “गिरफ्तारी” नहीं करती। OTP, बैंक डिटेल, पैसे ट्रांसफर; कभी न करें। संदिग्ध कॉल तुरंत काटें और शिकायत करें।
सरकार का यह एक्शन प्लान साफ संकेत देता है कि अब साइबर ठगी के खिलाफ लड़ाई टेक्नोलॉजी बनाम ठग की होने वाली है। लेकिन असली सवाल अभी भी वही है कि क्या सिस्टम तेज होगा, या ठग फिर कोई नया तरीका ढूंढ लेंगे?