तकनीकी: देश में बढ़ती गैस किल्लत के बीच आम आदमी के मन में एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर LPG, PNG, CNG और LNG में फर्क क्या है? गाड़ी से लेकर रसोई और फैक्ट्री तक हर जगह गैस का प्रयोग हो रहा है, लेकिन इसके नाम अलग-अलग होने से लोग कन्फ्यूज हो जाते हैं। अब इस पूरे गैस सिस्टम को आसान भाषा में समझिए कौन सी गैस कहां काम आती है और आपके लिए कौन बेहतर है।
1. LPG - घर की रसोई की जान
LPG का पूरा नाम Liquified Petroleum Gas वही गैस है, जो आपके घर में सिलेंडर में आती है। इसमें प्रोपेन और ब्यूटेन गैस का मिश्रण होता है। दबाव डालकर तरल रूप में भरी जाती है
कहां इस्तेमाल?
•घरों में खाना बनाने
•होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट
•छोटे उद्योग
आसान लेकिन सिलेंडर पर निर्भर
2. PNG - सिलेंडर खत्म, पाइपलाइन शुरू
गौरतलब है कि PNG सीधे पाइपलाइन से घर तक पहुंचती है। इसका फुल फॉर्म Piped Natural Gas है। इसमें मुख्य रूप से मीथेन गैस होती है। इसमें सिलेंडर की जरूरत नहीं होती।
कहां इस्तेमाल?
•घरों के किचन
•होटल और इंडस्ट्री
सुरक्षित, सुविधाजनक, लगातार सप्लाई
3. CNG - गाड़ियों का सस्ता ईंधन
CNG का फुल फॉर्म Comprihensed Natural Gas है। CNG वही गैस है, जिससे आपकी कार, ऑटो या बस चलती है। मीथेन गैस को कंप्रेस करके सिलेंडर में भरा जाता है
कहां इस्तेमाल?
•कार, ऑटो, बस, टैक्सी
यह पेट्रोल-डीजल से सस्ती होती है और कम प्रदूषणकारी होता है।
4. LNG - बड़े काम की बड़ी गैस
LNG का फुल फॉर्म Liquified Natural Gas होता है। LNG भी नेचुरल गैस है, लेकिन इसे बहुत ठंडा करके तरल बनाया जाता है।
कहां इस्तेमाल?
•बड़े उद्योग
•बिजली उत्पादन
•भारी वाहन और जहाज
यह लंबी दूरी तक ट्रांसपोर्ट के लिए उपयोगी होता है।
चारों गैसों का आसान अंतर (एक नजर में)
LPG - सिलेंडर वाली रसोई गैस
PNG - पाइपलाइन से घर तक गैस
CNG - गाड़ियों का ईंधन
LNG - इंडस्ट्री और बड़े ट्रांसपोर्ट के लिए गैस
क्यों बढ़ रहा है PNG का चलन?
विदित है कि LPG की किल्लत और बढ़ती कीमतों के बीच सरकार अब PNG को बढ़ावा दे रही है। इसके पिछे की वजह लगातार सप्लाई, कम झंझट और ज्यादा सुरक्षित सप्लाई व्यवस्था है।
चारों गैस अलग नहीं, बल्कि एक ही परिवार के अलग-अलग रूप हैं। बस इस्तेमाल के हिसाब से उनका नाम और तरीका बदल जाता है। फर्क साफ है।
अगर रसोई की बात है तो LPG/PNG
गाड़ी चलानी है तो CNG
बड़े उद्योग चलाने हैं तो LNG