ऑटोमोबाइल/लाइफस्टाइल : अगर आप अपनी बाइक या कार को स्टाइलिश बनाने के लिए मॉडिफिकेशन करवा रहे हैं, तो अब सावधान हो जाइए। सरकार ने साफ कर दिया है कि बिना अनुमति गाड़ी में बदलाव करना अब सीधा कानून तोड़ना है, और इसकी कीमत आपको भारी जुर्माने के रूप में चुकानी पड़ सकती है।
क्या कहता है नियम?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मोटर वाहन अधिनियम 2019 के तहत गाड़ी के मूल डिजाइन या पार्ट्स में बिना अनुमति बदलाव गैरकानूनी है।
पहली बार पकड़े गए - ₹5,000 तक जुर्माना
दोबारा पकड़े गए - ₹10,000 तक चालान
वहीं गंभीर मामलों में वाहन जब्त और रजिस्ट्रेशन सस्पेंड भी हो सकता है।
कौन-कौन से मॉडिफिकेशन बन सकते हैं मुसीबत?
अगर आपकी गाड़ी में ये बदलाव हैं, तो खतरे की घंटी समझिए—
•तेज आवाज वाला मॉडिफाइड साइलेंसर
•ज्यादा चमकदार या रंगीन LED/HID हेडलाइट्स
•गाड़ी का कलर या रैप बिना अनुमति बदलना
•प्रेशर हॉर्न / DJ साउंड
•बाइक का हैंडल ऊंचा करना
•कार की ऊंचाई या सस्पेंशन बदलना
•अलग डिजाइन के टायर या रियर लाइट
यानी “कूल लुक” देने वाला हर बदलाव जरूरी नहीं कि कानून के हिसाब से सही हो।
ARAI अप्रूवल क्यों जरूरी?
विदित है कि ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) वही संस्था है जो तय करती है कि कौन सा पार्ट सुरक्षित है। अगर आपकी गाड़ी में लगा पार्ट ARAI अप्रूव्ड नहीं है तो ट्रैफिक पुलिस सीधे चालान काट सकती है।
सरकार इतनी सख्ती क्यों कर रही है?
आपको बता दें कि यह सिर्फ चालान भरवाने का मामला नहीं है असली वजह सड़क सुरक्षा है।
•तेज साइलेंसर - ध्वनि प्रदूषण
•तेज लाइट - सामने वाले की आंखों पर असर
•सस्पेंशन/टायर बदलाव - एक्सीडेंट का खतरा
•हैंडल में बदलाव - कंट्रोल में कमी।
यानी एक छोटी “स्टाइलिंग” गलती, किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
सिर्फ मालिक नहीं, गैराज भी फंसेंगे
गौरतलब है कि अब नियम सिर्फ वाहन मालिक तक सीमित नहीं जो गैराज या डीलर बिना अप्रूवल पार्ट बेचते हैं या फिट करते हैं उन पर भी ₹25,000 तक जुर्माना लग सकता है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
ट्रैफिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह नियम सड़क सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि मॉडिफाइड गाड़ियां n केवल चालक के लिए, बल्कि सड़क पर चलने वाले दूसरे लोगों के लिए भी खतरा पैदा करती हैं। तेज आवाज वाले साइलेंसर से न केवल ध्वनि प्रदूषण होता है, बल्कि इससे दूसरे ड्राइवरों का ध्यान भी भटकता है। मॉडिफाइड हेडलाइट्स से सामने वाले ड्राइवर की आंखों में चकाचौंध हो जाती है, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
अगर आपने मॉडिफिकेशन करवाया है तो क्या करें?
गौरतलब है कि अगर आपने बिना अनुमति कोई बदलाव करवाया है, तो तुरंत उसे हटवा दें। कोई भी पार्ट लगवाने से पहले सुनिश्चित करें कि वह ARAI से प्रमाणित हो। अगर आप गाड़ी का रंग बदलना चाहते हैं, तो पहले RTO से अनुमति लेना जरूरी है। गैराज में जाने से पहले पूछ लें कि जो पार्ट्स वे लगा रहे हैं, वह ARAI अप्रूव्ड हैं या नहीं।
यानी सब मिलाकर गाड़ी कंपनी जैसी बनी है, वैसी ही सुरक्षित है। मनमर्जी का बदलाव से कानूनी जोखिम और सुरक्षा खतरा दोनों हो सकता है। अगर आप अपनी गाड़ी को “अलग” दिखाने के लिए नियम तोड़ रहे हैं तो अब यह शौक आपको सीधा चालान और कानूनी झंझट में डाल सकता है।