धर्मान्तरण और अनुसूचित जाति के दर्जे को लेकर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला!: ईसाई या मुस्लिम बनने पर खत्म होंगे SC राइट्स, नहीं लगा सकेंगे SC-ST एक्ट और...जानें कोर्ट का यह फैसला क्यों हैं ऐतिहासिक और क्या हैं इसके मायने?
धर्मान्तरण और अनुसूचित जाति के दर्जे को लेकर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला!

नई दिल्ली : देश की आरक्षण व्यवस्था और धर्मांतरण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और स्पष्ट फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कहा है कि अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म से जुड़े लोगों को ही मिलेगा। अगर कोई व्यक्ति ईसाई, मुस्लिम या किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करता है, तो उसका SC दर्जा तुरंत समाप्त हो जाएगा।

कोर्ट ने क्या कहा?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की बेंच (जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस मनमोहन) ने कहा कि SC दर्जा धर्म से जुड़ा संवैधानिक प्रावधान है। दूसरे धर्म अपनाने पर यह दर्जा कानूनी रूप से खत्म हो जाता है। ऐसा व्यक्ति SC/ST एक्ट और आरक्षण का लाभ नहीं ले सकता। कोर्ट ने साफ कहा कि दूसरा धर्म और SC का लाभ दोनों चीजें साथ नहीं चल सकतीं।

संविधान क्या कहता है?

गौरतलब है कि संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 के अनुसार केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म में ही SC श्रेणियां मान्य हैं यानी ईसाई या मुस्लिम बनने पर SC दर्जा खत्म हो जायेगा।

मामला क्या था?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह आंध्र प्रदेश के एक व्यक्ति (चिंथदा आनंद) का मामला है। वे जन्म से SC (माला समुदाय) थे, लेकिन बाद में ईसाई धर्म अपनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें जातिसूचक गालियां दी गईं। इसके बाद SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज कराया गया। लेकिन कोर्ट ने कहा कि जब व्यक्ति खुद ईसाई धर्म अपना चुका है तो वह SC/ST एक्ट का लाभ नहीं ले सकता।

SC/ST एक्ट पर भी साफ रुख

विदित है कि कोर्ट ने कहा जो व्यक्ति SC श्रेणी में नहीं आता, उसे इस एक्ट का संरक्षण नहीं मिलेगा। ऐसे मामलों में सामान्य IPC धाराओं में ही केस चलेगा।

क्या दोबारा मिल सकता है SC दर्जा?

गौरतलब है कि दुबारा SC का दर्जा मिल तो सकता है लेकिन प्रक्रिया आसान नहीं होगा। इसके लिए कोर्ट ने 3 सख्त शर्तें रखीं—

•साबित करना होगा कि जन्म SC में हुआ था

•वापस हिंदू/सिख/बौद्ध धर्म अपनाया हो

•मूल समाज ने उसे फिर से स्वीकार किया हो

सिर्फ “मैं वापस आ गया” कह देना काफी नहीं

पहले भी कोर्ट दे चुका है चेतावनी

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 1985 के केस (सूसाई बनाम भारत सरकार) में कहा था कि सिर्फ आरक्षण के लिए धर्म बदलना संविधान के साथ धोखा है

जानें क्यों अहम है ये फैसला?

गौरतलब है कि यह फैसला इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि इस फैसले से धर्म और आरक्षण के संबंध पर स्पष्ट सीमा तय कर दी गयी। यह फौसला भविष्य के मामलों के लिए बड़ा कानूनी आधार बनेगा। यह निर्णय धर्मांतरण और आरक्षण पर चल रही बहस को नई दिशा देगा।

यानी SC दर्जा धर्म से जुड़ा अधिकार है लेकिन धर्म बदला तो यह दर्जा खत्म हो जायेगा। इसे दोबारा पाने के लिए कड़ी शर्तें रखी गयी हैं।

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