17 जून को इतिहास रचेगा नोएडा एयरपोर्ट!: पहला कार्गो विमान भरेगा उड़ान, 3200 करोड़ की लागत से बनेगा मेगा कार्गो हब, वहीं नियमित उड़ान की तारीख...जानिए कैसे नोएडा एयरपोर्ट का कार्गो हब बदल देगा उत्तर भारत के निर्यात की तस्वीर?
17 जून को इतिहास रचेगा नोएडा एयरपोर्ट!

ग्रेटर नोएडा : उत्तर भारत के व्यापार और औद्योगिक विकास के लिए एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब सिर्फ यात्रियों की आवाजाही का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि कारोबार और निर्यात का बड़ा गेटवे बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। 17 जून को नोएडा एयरपोर्ट के रनवे से पहला कार्गो विमान उड़ान भरेगा। शुरुआती दिन एक घरेलू कार्गो फ्लाइट संचालित की जाएगी, जबकि 1 जुलाई से कार्गो सेवाएं नियमित रूप से शुरू करने की तैयारी है।

17 जून को इतिहास रचेगा नोएडा एयरपोर्ट

आपको बता दें कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से पहली बार मालवाहक विमान उड़ान भरेगा। चेन्नई आधारित अंतरराष्ट्रीय कार्गो एयरलाइन एफकान होल्डिंग लिमिटेड इस सेवा का संचालन करेगी। शुरुआती चरण में घरेलू कार्गो सेवाओं पर फोकस रहेगा। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय यात्री उड़ानों की शुरुआत के साथ विदेशी बाजारों तक कार्गो नेटवर्क को भी बढ़ाया जाएगा।

देश-विदेश के बाजारों से सीधे जुड़ेगा उत्तर भारत

कार्गो सेवा शुरू होने से उत्तर प्रदेश सहित पूरे उत्तर भारत के उद्योगों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में बनने वाले उत्पाद अब तेजी से देश और विदेश के बाजारों तक पहुंच सकेंगे। इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, कपड़ा, कृषि उत्पाद, फल, सब्जी और डेयरी उत्पाद जैसे सामानों के परिवहन में तेजी आएगी।

87 एकड़ में बनेगा विशाल मल्टी मॉडल कार्गो हब

गौरतलब है कि नोएडा एयरपोर्ट को एक बड़े लॉजिस्टिक्स सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके लिए करीब 87 एकड़ क्षेत्र में मल्टी मॉडल कार्गो हब तैयार किया जाएगा। पहले चरण में लगभग 30 एकड़ में घरेलू, अंतरराष्ट्रीय और एक्सप्रेस कोरियर टर्मिनल विकसित किए गए हैं। इस चरण पर करीब 800 करोड़ रुपये की लागत आई है। पूरी परियोजना विकसित होने के बाद इसकी अनुमानित लागत करीब 3200 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।

18 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ सकेगी क्षमता

कार्गो हब को शुरुआत में करीब 2.55 लाख मीट्रिक टन सालाना माल संभालने की क्षमता के साथ तैयार किया गया है। भविष्य में जरूरत के अनुसार इसकी क्षमता बढ़ाकर करीब 18 लाख मीट्रिक टन सालाना तक की जा सकेगी। इससे नोएडा एयरपोर्ट देश के बड़े कार्गो केंद्रों में शामिल हो सकता है।

हाईटेक मशीनों से होगी माल की जांच

कार्गो संचालन को तेज और सुरक्षित बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए ड्यूल व्यू एक्सरे मशीन, इलेक्ट्रिक फोर्क लिफ्ट, पैलेट स्टैकर और अन्य आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं। इससे सामान की जांच और आवाजाही कम समय में पूरी हो सकेगी।

57 एकड़ में बनेगा लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउस जोन

आपको बता दें कि कार्गो नेटवर्क को मजबूत करने के लिए 57 एकड़ क्षेत्र में इंटीग्रेटेड वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स जोन विकसित किया जा रहा है। कृषि और खाद्य उत्पादों के लिए कोल्ड चेन की व्यवस्था भी की गई है, जिससे किसानों और कारोबारियों के उत्पाद ताजा स्थिति में बड़े बाजारों तक पहुंच सकेंगे।

निवेश, रोजगार और कारोबार को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा एयरपोर्ट की कार्गो सेवा शुरू होने से प्रदेश में निवेश को बढ़ावा मिलेगा। उद्योगों को तेज सप्लाई चेन मिलेगी और नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

नोएडा एयरपोर्ट आने वाले समय में न केवल यात्रियों के लिए बल्कि व्यापार, निर्यात और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में भी उत्तर भारत का बड़ा केंद्र बन सकता है।

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