नोएडा हिंसा पर CM योगी का बड़ा एक्शन!: सरकार ने बनाई हाई लेवल कमेटी, टकराव सुलझाने को नोएडा पहुंची स्पेशल टीम, जानिए कैसे हरियाणा के एक फैसले से नोएडा में सड़कों पर उतरे लाखो कर्मचारी, क्या है उनकी प्रमुख माँगें_एक नजर
नोएडा हिंसा पर CM योगी का बड़ा एक्शन!

गौतम बुद्ध नगर/नोएडा : नोएडा-ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक इलाकों में भड़के श्रमिक आंदोलन और हिंसक झड़पों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। औद्योगिक असामंजस्य और बढ़ते तनाव को नियंत्रित करने के लिए उच्च स्तरीय समिति (High Level Committee) का गठन किया गया है। सरकार का साफ संदेश है कि अब संवाद होगा, समाधान होगा और उद्योगों में शांति बहाल की जाएगी।

हाईलेवल कमेटी में ये अधिकारी होंगे शामिल?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस हाई लेवल कमेटी की कमान औद्योगिक विकास आयुक्त, उत्तर प्रदेश को सौंपी गई है।
समिति में शामिल हैं:

  • अपर मुख्य सचिव (MSME)
  • प्रमुख सचिव (श्रम एवं सेवायोजन)
  • श्रम आयुक्त (सदस्य सचिव)
  • 5 श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि
  • 3 उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि

यानी पहली बार मजदूर और उद्योग; दोनों पक्षों को एक ही मंच पर लाकर समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।

जमीन पर उतरी टीम, शुरू हुआ एक्शन

गौरतलब है कि सरकार द्वारा गठित टीम नोएडा पहुंच चुकी है और घटनास्थल का जायजा लिया जा रहा है। श्रमिकों और उद्योगपतियों से सीधा संवाद हो रहा है। हालात का आकलन कर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। जल्द ही यह समिति अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की रणनीति तय होगी।

प्रशासन भी अलर्ट मोड में

आपको बता दें कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह, जिलाधिकारी मेधा रूपम मौके पर मौजूद रहे और पूरे हालात की निगरानी करते रहे। इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर स्थिति को नियंत्रण में लिया गया।

क्या हरियाणा के इस फैसले से नोएडा में सड़क पर उतरे कर्मचारी?

आपको बता दें कि इन प्रदर्शनों के पीछे मजदूरों की मुख्य मांग हरियाणा के बराबर वेतन है। दरअसल, हरियाणा सरकार ने इसी माह 10 अप्रैल को एक नोटिफिकेशन द्वारा फैक्ट्री कर्मियों के न्यूनतम वेतन में 35 फीसदी की बढ़ोतरी की है, जिसके बाद वहां अकुशल श्रमिकों को 15,220 रुपये, अर्ध-कुशल को 16,780 रुपये, कुशल को 18,500 रुपये और उच्च कुशल श्रमिकों को 19,425 रुपये मासिक वेतन मिल रहा है। जबकि उत्तर प्रदेश में अकुशल श्रमिकों को मात्र 11,313 रुपये, अर्ध-कुशल को लगभग 12,000 रुपये और कुशल को 13,940 रुपये वेतन दिया जा रहा है। वेतन का यह भारी अंतर नोएडा के मजदूरों में गहरा रोष पैदा कर रहा है। इसके अलावा मजदूरों की अन्य मांगों में हर महीने की 10 तारीख तक वेतन दिलाना, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान सुनिश्चित करना, साप्ताहिक अवकाश (रविवार) देना, सैलरी स्लिप अनिवार्य करना और वेतन में होने वाली मनमानी कटौती पर रोक लगाना शामिल है।

आखिर क्यों भड़का था मजदूरों का गुस्सा? क्या है उनकी माँग?

विदित है कि नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में काम कर रहे हजारों मजदूर कई मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतर आए उनकी प्रमुख माँगें निम्नलिखित हैं:

  • हरियाणा के बराबर वेतन की मांग
  • न्यूनतम मजदूरी में भारी अंतर
  • ओवरटाइम का सही भुगतान नहीं
  • सैलरी में देरी और कटौती
  • साप्ताहिक अवकाश का अभाव

मजदूरों का आरोप है कि बढ़ती महंगाई में मौजूदा वेतन से गुजारा मुश्किल हो गया है।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन कैसे बना हिंसक?

गौरतलब है कि शुरुआत में शांतिपूर्ण विरोध चल रहा था लेकिन यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन धीरे-धीरे उग्र होता चला गया। सड़कों पर चक्का जाम, पथराव और तोड़फोड़, वाहनों में आगजनी और पुलिस के साथ झड़प से स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।

सरकार का बड़ा संदेश: ‘संवाद से समाधान’

योगी आदित्यनाथ सरकार का मानना है कि उद्योगों में स्थिरता जरूरी है। श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही अहम है। इसी संतुलन को बनाने के लिए यह हाई लेवल कमेटी बनाई गई है, ताकि भविष्य में ऐसे टकराव न हों।

क्या बदलेगा आगे?

इस समिति की रिपोर्ट के बाद मजदूरी ढांचे में बदलाव संभव है। श्रम कानूनों का सख्त पालन होगा। उद्योगों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए जायेंगे। और श्रमिकों के लिए बेहतर सुविधाएं मिलेगी।

नोएडा में मजदूरों का यह प्रदर्शन केवल वेतन वृद्धि का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पूरे औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिकों की बढ़ती असुरक्षा और असमानता का संकेत है। हरियाणा में हुई वेतन बढ़ोतरी ने पड़ोसी राज्य के मजदूरों में आक्रोश पैदा कर दिया है। अब सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति पर सबकी नजरें हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह समिति मजदूरों की मांगों को पूरा कर पाएगी? फिलहाल नोएडा की सड़कों पर तनाव बना हुआ है और स्थिति पर पुलिस की कड़ी निगरानी है। फिलहाल, पूरे प्रदेश की नजर इस रिपोर्ट और सरकार के अगले कदम पर टिकी है।

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