ढाका : बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। दो दशक तक चली सत्ता की कहानी अचानक पलट गई और जनता ने एक झटके में पूरा राजनीतिक नक्शा बदल दिया। आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने जबरदस्त जीत दर्ज करते हुए बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। इसके साथ ही अब पार्टी प्रमुख तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। यह सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि 20 साल पुराने राजनीतिक युग का अंत और नए दौर की शुरुआत है।
जानें कैसे पलटी बाज़ी?
कुल सीटें: 299
बहुमत का आंकड़ा: 150
BNP को: 200+ सीटें (स्पष्ट बहुमत)
जमात गठबंधन: लगभग 70 सीटें
2008 से लगातार सत्ता में रही शेख हसीना की राजनीति का दबदबा खत्म हो गया। दिलचस्प बात यह रही कि जिन इलाकों को कभी आवामी लीग का किला कहा जाता था, वहां भी मतदाताओं ने रुख बदल दिया।
35 साल बाद पुरुष प्रधानमंत्री :
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 1991 के बाद से बांग्लादेश की राजनीति दो महिलाओं शेख हसीना और खालिदा जिया के इर्द-गिर्द घूमती रही। अब लगभग 35 साल बाद देश को पुरुष प्रधानमंत्री मिलने जा रहा है। तारिक रहमान की वापसी भी नाटकीय रही। 17 साल विदेश में रहने के बाद लौटे, चुनाव लड़ा और सीधे सत्ता के केंद्र में पहुंच गए।
जनता ने क्यों बदला मूड?
गौरतलब है कि विशेषज्ञ 3 बड़ी वजह बताते हैं:
वोट बैंक का शिफ्ट
अल्पसंख्यक और पारंपरिक आवामी लीग समर्थकों का बड़ा हिस्सा BNP के पक्ष में गया।
कट्टरपंथ से दूरी
जमात-ए-इस्लामी का अतीत और उसकी छवि लोगों को स्वीकार्य नहीं लगी।
युवा राजनीति की हार
छात्र आंदोलन से निकली नई पार्टी लोगों को भरोसा नहीं दिला सकी।
चुनाव के दौरान हिंसा भी
गौरतलब है कि मतदान पूरी तरह शांत नहीं रहा। कई जगह झड़पें, बम फेंकने और हमले की घटनाएं हुईं। एक राजनीतिक कार्यकर्ता की मौत भी हुई और कई लोग घायल हुए। मतदान प्रतिशत करीब 59% रहा जो कि पिछले चुनाव से काफी ज्यादा रहा।
पीएम मोदी ने दी तारिक रहमान को बधाई :
गौरतलब है कि भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने भी तारिक रहमान को बांग्लादेश के आम चुनाव में जीत पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह जीत बांग्लादेश की जनता को आपके नेतृत्व पर भरोसा दिखाती है। भारत हमेशा एक लोकतांत्रिक और आगे बढ़ते हुए बांग्लादेश के साथ खड़ा रहेगा। मैं दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने और मिलकर विकास के लिए काम करने को तैयार हूं।
भारत के लिए क्या मायने?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नई सरकार पर दिल्ली की खास नजर रहेगी। भारत ने आधिकारिक तौर पर जनादेश का सम्मान करते हुए नए नेतृत्व को बधाई दी है। विश्लेषकों के अनुसार भारत के सामने तीन अहम सवाल होंगे:
●सुरक्षा सहयोग जारी रहेगा या बदलेगा?
●चीन-पाकिस्तान के साथ ढाका का समीकरण कैसा रहेगा?
●सीमा और व्यापार नीति किस दिशा में जाएगी?
नए वादे, नई दिशा :
विदित है कि तारिक रहमान ने चुनाव अभियान में कई बड़े वादे किए:
●अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून
●महिलाओं की मुफ्त उच्च शिक्षा
●हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट
●छोटे उद्योगों को टैक्स राहत
●प्रशासनिक सुधार और भ्रष्टाचार नियंत्रण
आगे क्या बदलेगा?
आपको बता दें कि सिर्फ सरकार नहीं, संविधान में भी बड़े बदलाव की चर्चा है। प्रधानमंत्री की ताकत कम और संस्थाओं की ताकत बढ़ाने की तैयारी चल रही है।
बांग्लादेश का यह चुनाव एक साधारण लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं रहा। यह वंशवादी राजनीति बनाम बदलाव की राजनीति का फैसला था। अब सबकी नजर एक सवाल पर है। क्या नई सरकार स्थिरता और संतुलन लाएगी, या दक्षिण एशिया की राजनीति में नया तनाव शुरू होगा।