अर्थव्यवस्था : साल 2025 भारत की आर्थिक कहानी का सबसे चमकदार अध्याय साबित हुआ है। दुनिया की बड़ी-बड़ी अर्थव्यवस्थाएं लड़खड़ा रही थीं, वैश्विक बाजार अनिश्चितता से भरे हुए थे, पर भारत ने रिकॉर्ड तोड़ते हुए जापान को पीछे छोड़ दिया और चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया। दूसरी तिमाही में GDP ग्रोथ 8.2% तक पहुंच गयी जो 6 तिमाहियों में सबसे तेज़ रही।
और खास बात यह है कि यह तेज़ ग्रोथ उस समय मिली जब महंगाई ऐतिहासिक रूप से सबसे कम स्तर पर थी।
आर्थिक दुनिया इस समय इसे भारत का “गोल्डिलॉक्स पीरियड” कह रही है। जहां ग्रोथ हाई और महंगाई लो होती है। भारत ने इस साल 4 बड़े आर्थिक चमत्कार किये।
1. जापान को पीछे छोड़ भारत बना नंबर-4 इकोनॉमी
आपको बता दें कि भारत की कुल GDP अब 4.18 ट्रिलियन डॉलर (₹350 लाख करोड़) पर पहुँच चुकी है। जापान अब पीछे है और अगला टारगेट स्पष्ट है, जर्मनी।
आगे की संभावनाएँ :
गौरतलब है कि 2028 तक जर्मनी को पछाड़कर भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। 2030 तक GDP 7.3 ट्रिलियन डॉलर (₹655 लाख करोड़) पहुँच सकती है। RBI ने देश की मजबूत रफ्तार देखते हुए सालाना ग्रोथ अनुमान 6.8% से बढ़ाकर 7.3% कर दिया।
दुनिया की टॉप–10 अर्थव्यवस्थाएँ (2025 का अपडेटेड ग्लोबल रैंकिंग)
टॉप 10 ग्लोबल इकोनॉमी रैंकिंग; 2025
रैंक देश ~ GDP (ट्रिलियन डॉलर में) स्थिति
अमेरिका ~28.8 दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
चीन ~18.5 दूसरे नंबर पर
जर्मनी ~4.5 तीसरे स्थान पर
भारत 4.18 जापान को पछाड़ा, चौथी सबसे बड़ी इकोनॉमी
जापान ~4.15 भारत से पीछे फिसला
यूके ~3.3 छठा स्थान
फ्रांस ~3.2 सातवां स्थान
कनाडा ~2.4 आठवां स्थान
ब्राज़ील ~2.3 नौवां स्थान
इटली ~2.1 टॉप-10 का आखिरी देश
इस टॉप-10 सूची में भारत क्यों खास है?
●दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था भारत ही है
●अकेला देश जिसकी GDP लगातार बढ़ रही, महंगाई घट रही और रोजगार सुधर रहे
●अगले 2–3 साल में जर्मनी को पीछे छोड़ टॉप-3 में प्रवेश तय
●2030 तक भारत की GDP 7.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान
2. महंगाई 0.71%; ऐतिहासिक गिरावट :
गौरतलब है कि यह वो आंकड़ा है जो आम जनता की जेब को सबसे ज्यादा राहत देता है। जनवरी में जहां CPI 4.26% थी, वहीं नवंबर आते-आते यह गिरकर 0.71% रह गई। जो पिछले कई वर्षों में सबसे कम स्तर है।
क्यों गिरी महंगाई?
खाद्य वस्तुओं के दामों में गिरावट
सप्लाई चेन सुचारू
आयात लागत कम
सख्त मॉनिटरिंग
RBI ने राहत देते हुए ब्याज दर 5.25% कर दी। अब हाउस-कार लोन सस्ते होने तय हैं।
3. रोजगार में सुधार; महिलाओं की भागीदारी में रिकॉर्ड उछाल
PLFS के ताज़ा आंकड़ों ने दिखाया कि भारत में रोजगार तेजी से बढ़ा है।
बेरोजगारी दर
अक्टूबर: 5.2%
नवंबर: 4.7%
महिलाओं के लिए बड़ी खुशखबरी
शहरी महिलाएँ: 9.7% - 9.3%
ग्रामीण महिलाएँ: 4.0% - 3.4%
ग्रामीण इलाके में बेरोजगारी सिर्फ 3.9% रह गई। ऐसा सुधार पिछले कई वर्षों में नहीं देखा गया।
4. ट्रंप के भारी टैरिफ के बावजूद एक्सपोर्ट में जबरदस्त उछाल
गौरतलब है कि अमेरिका ने भारत पर 50% तक सुपर-टैरिफ लगा दिया था।
दुनिया समझ रही थी कि इससे भारतीय निर्यात टूट जाएगा—
लेकिन नतीजा उल्टा निकला।
नवंबर 2025 में मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट
पहले: 36.43 बिलियन डॉलर
अब: 38.13 बिलियन डॉलर
किन सेक्टर्स में सबसे बड़ी छलांग?
काजू: 64%
मरीन प्रोडक्ट्स: 62%
इंजीनियरिंग गुड्स: 17%
सर्विस एक्सपोर्ट 8.65% बढ़कर 270 बिलियन डॉलर पार हो गया। विदेशी मुद्रा भंडार भी बढ़कर 686.2 बिलियन डॉलर हो गया। जो भारत के लिए अब तक के सबसे मजबूत स्तरों में से एक है।
दुनिया भी मान गई; भारत ही भविष्य की सुपरइकोनॉमी:
एजेंसी नया ग्रोथ अनुमान
फिच 7.4%
ADB 7.2%
IMF 6.6%
मूडीज़. G20 में सबसे तेज ग्रोथ
OECD 6.7%
S&P 6.5%
हर अंतरराष्ट्रीय संस्था एक साथ कह रही है कि “दुनिया की सबसे तेज़ दौड़ती अर्थव्यवस्था भारत है।”
भारत का लक्ष्य: 2047 तक 'उच्च मध्यम-आय वाला देश'
सरकार के अनुसार महंगाई सीमा से नीचे चल रहा है,बेरोजगारी में गिरावट हुई है, निर्यात लगातार बढ़ रहा, बैंकिंग सेक्टर मजबूत, शहरी खपत तेज और अर्थव्यवस्था स्थिर और मजबूत है। यही कारण है कि “विकसित भारत 2047” अब पहले से ज्यादा संभव लग रहा है।
GDP क्या होता है? सरल भाषा में
GDP = एक तय समय में देश में बनी सभी चीजों और सेवाओं की कुल कीमत। इसमें भारत में काम कर रही विदेशी कंपनियाँ भी शामिल होती हैं।
GDP दो तरह की होती है
1. रियल GDP - स्थिर कीमतों पर
2. नॉमिनल GDP - मौजूदा कीमतों पर
GDP का फार्मूला
GDP = C + G + I + NX
C = जनता की खपत
G = सरकार का खर्च
I = निवेश
NX = निर्यात – आयात
2025 भारत का आर्थिक स्वर्ण वर्ष साबित हुआ। भारत ने इस दौरान जापान को पछाड़ा, महंगाई इतिहास के निचले स्तर पर, रोजगार मजबूत, एक्सपोर्ट बढ़ा रहा और ग्लोबल एजेंसियां भी भारत के विकास से प्रभावित रही हैं।