हांगकांग: हांगकांग दुनिया के सबसे घनी आबादी वाले शहरों में से एक है, जहाँ लोग जमीन की कमी के कारण 30 से 50 मंज़िल वाली ऊँची इमारतों में रहते हैं। हादसे वाली इमारतें भी ऐसे ही विशाल टॉवर थे, जो 25–35 साल पुराने बताए जाते हैं।
इन इमारतों में हजारों लोग रहते हैं और इनकी संरचना पुरानी होने के कारण नियमित नवीनीकरण जरूरी होता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि पुराने हाईराइज़ टॉवरों में फायर-सेफ्टी सिस्टम अक्सर समय के साथ कमजोर होने लगता है, और अगर नवीनीकरण सही तरीके से न किया जाए तो जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
नवीनीकरण कार्य और स्कैफोल्डिंग, आग की सबसे बड़ी वजह
हादसे की जड़ में जो कारण विशेषज्ञों ने बताया, वह था इमारत के बाहर लगा पूरा स्कैफोल्डिंग सिस्टम। नवीनीकरण के दौरान इमारत को बांस, लकड़ी और धातु से बने जालीदार फ्रेम से ढका गया था, जिस पर प्लास्टिक की नेटिंग चढ़ी हुई थी।
सामान्य परिस्थितियों में ये सामग्री इमारत को ढकने और कामगारों को सहारा देने के काम आती है, लेकिन आग लगने की स्थिति में यही स्कैफोल्डिंग एक तरह की “वर्टिकल फ्यूल लाइन” बन गई, जिसने आग को ऊपर की मंज़िलों और पास की इमारतों तक पहुँचने का सीधा रास्ता दे दिया। विशेषज्ञों के अनुसार इसी स्कैफोल्डिंग ने आग को मिनटों में कई टॉवरों तक फैला दिया।
आग का खतरनाक ‘चिमनी इफेक्ट’: कैसे मिनटों में 30+ मंज़िलें जल उठीं
विशेषज्ञों के मुताबिक इस हादसे में सबसे बड़ा रोल “चिमनी इफेक्ट” का है। हाईराइज़ इमारतों में अगर आग नीचे लगे तो वह नीचे से ऊपर की ओर असाधारण गति से फैलती है। जैसे चिमनी में हवा ऊपर उठती है, वैसे ही आग और धुआँ ऊपर की मंज़िलों की ओर दौड़ता है।
नवीनीकरण की वजह से इमारत प्लास्टिक शीटिंग और नैरो गैप्स से ढकी हुई थी, जिसने आग को तेज हवा की तरह ऊपर धकेल दिया। चिमनी इफेक्ट और ज्वलनशील सामग्री के मिश्रण ने आग को इतना खूंखार रूप दे दिया कि कुछ ही मिनटों में 30 से ज्यादा मंज़िलें लपटों से भर गईं।
पुरानी बिल्डिंग की खामियाँ, धुआँ सेंसर, फायर अलार्म और इमरजेंसी दरवाजे बंद
विशेषज्ञों ने कहा कि अगर इमारतों की फायर सेफ्टी सिस्टम पूरी तरह सक्रिय होते, तो इतनी बड़ी जनहानि नहीं होती। कई अपार्टमेंट्स में धुआँ सेंसर पुराने थे और सक्रिय नहीं थे। कई जगहों पर फायर अलार्म नहीं बजे।
इमरजेंसी निकासी के रास्तों में सामान, पुराना फर्नीचर और साइकिलें भरी थीं, जिसने लोगों के बाहर निकलने के रास्ते बंद कर दिए। कई मंज़िलों पर फायर डोर जाम मिले, जो आग और धुएँ को फैलने से रोकने के लिए बनाए जाते हैं। इन सब विफलताओं ने मिलकर आग को रोकने के बजाय उसे और घातक बना दिया।
मौतों का बड़ा कारण, धुआँ अंदर जाना, न कि सिर्फ आग
फायर विशेषज्ञों ने बताया कि ऐसी घटनाओं में 80% से ज्यादा मौतें सीधे आग से नहीं होतीं, बल्कि धुएँ से दम घुटने के कारण होती हैं। इस इमारत में भी यही हुआ। जब आग तेजी से ऊपर की ओर बढ़ी, तो धुआँ पूरे गलियारों और सीढ़ियों में घुस गया।
जिन फ्लैटों में सेंसर खराब थे, वहाँ लोग समय पर चेतावनी के बिना फँस गए। कई लोग बाहर निकलने की कोशिश करते हुए धुएँ में बेहोश हो गए। फायर विशेषज्ञ इस बात पर एकमत हैं कि “स्मोक इनहेलशन” यानी धुआँ अंदर जाना ही मौतों का सबसे बड़ा कारण था।
रेस्क्यू ऑपरेशन की कठिनाई, अस्थिर स्कैफोल्डिंग और गिरता मलबा
दमकल विभाग का काम बेहद कठिन था। बाहरी स्कैफोल्डिंग आग के कारण अस्थिर हो चुकी थी, इसलिए फायर ट्रक की सीढ़ियाँ इमारत के करीब नहीं लाई जा सकीं। अंदर जाने वाली सीढ़ियाँ धुएँ से भरी थीं, जिससे दमकलकर्मी धीरे-धीरे आगे बढ़ पा रहे थे।
हेलीकॉप्टर द्वारा रेस्क्यू भी जोखिमभरा था क्योंकि ऊपर से बांस और मलबा गिर रहा था। विशेषज्ञों का कहना है कि हाईराइज़ फायर में “Golden 20 Minutes” सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, और इस हादसे में वही 20 मिनट सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हुए।
विशेषज्ञों का सिस्टम पर आरोप, यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि ‘सिस्टम फेलियर’ है
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने कहा कि यह आग सिर्फ एक इमारत का हादसा नहीं, बल्कि पूरे फायर-सेफ्टी सिस्टम की विफलता का परिणाम है। नवीनीकरण के दौरान सुरक्षा सामग्री सस्ती और ज्वलनशील थी।
स्कैफोल्डिंग फायर-रेसिस्टेंट नहीं थी, जबकि दुनिया के कई देशों में यह अनिवार्य है। इमारतों में फायर ड्रिल नियमित रूप से नहीं की गई।
लोगों को आपातकालीन स्थिति में क्या करना चाहिए, इसकी ट्रेनिंग नहीं थी, जिसके कारण कई लोगों ने घबराहट में लिफ्ट की ओर भागने की कोशिश की, जो आग की स्थिति में सबसे खतरनाक कदम है।
हांगकांग की शहरी चुनौतियाँ अत्यधिक आबादी और ऊँची इमारतों का बोझ
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि हांगकांग में जनसंख्या घनत्व इतना अधिक है कि किसी भी आपदा में जान-माल का नुकसान बढ़ जाता है। इमारतों में बहुत ज्यादा लोग रहते हैं, जिससे निकासी का समय बढ़ जाता है।
संकरी सीढ़ियाँ, पुरानी लिफ्टें और सीमित खुले स्थान आग को और खतरनाक बना देते हैं। यह हादसा दिखाता है कि हाईराइज़ लाइफस्टाइल जितनी सुविधाजनक दिखती है, उतनी ही जोखिमों से भरी भी है और छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे में बदल सकती है।
विशेषज्ञों की अंतिम चेतावनी, यह भविष्य के लिए एक बड़ा सबक है
विशेषज्ञों का अंतिम निष्कर्ष है कि यह हादसा केवल आग या दुर्घटना की कहानी नहीं, बल्कि भविष्य के लिए चेतावनी है। दुनिया भर के हाई-राइज़ शहरों जैसे मुंबई, दुबई, सिंगापुर, टोक्यो को इस घटना से सबक लेना चाहिए।
नवीनीकरण के दौरान ज्वलनशील स्कैफोल्डिंग पर सख्त रोक लगनी चाहिए। फायर अलार्म, सेंसर, इमरजेंसी दवाज़े और निकासी मार्ग हमेशा साफ और कार्यशील होने चाहिए। यह हादसा साबित करता है कि यदि सुरक्षा नियम थोड़े भी ढीले पड़ जाएँ, तो आधुनिक शहरी जीवन भी मिनटों में त्रासदी में बदल सकता है।