अमेरिका में नौकरी का सपना देख रहे लाखों भारतीय युवाओं को बड़ा झटका!: अमेरिकी संसद में H-1B वीजा खत्म करने का बिल पेश, वहीं...जानें क्या है H-1B वीजा औऱ भारतीयों पर इसका असर?
अमेरिका में नौकरी का सपना देख रहे लाखों भारतीय युवाओं को बड़ा झटका!

वॉशिंगटन/नई दिल्ली : अमेरिका की राजनीति से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने लाखों भारतीय युवाओं की धड़कनें तेज कर दी हैं। अमेरिकी संसद में एक नया विधेयक पेश हुआ है, जिसका मकसद चर्चित H-1B वीजा प्रोग्राम को पूरी तरह बंद करना है। अगर यह कानून बन गया, तो 2027 तक विदेशी पेशेवरों के लिए अमेरिका में काम करने का सबसे बड़ा रास्ता लगभग खत्म हो सकता है और इसका सीधा असर सबसे ज्यादा भारत पर पड़ेगा।

क्या है पूरा मामला?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फ्लोरिडा से रिपब्लिकन सांसद ग्रेग स्ट्यूबे ने अमेरिकी संसद में “EXILE एक्ट” (Ending Exploitative Imported Labor Exemptions Act) पेश किया है। इस बिल में प्रस्ताव है कि इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट में संशोधन करके H-1B वीजा की संख्या धीरे-धीरे घटाई जाए और 2027 तक इसे शून्य कर दिया जाए। इसका मतलब है कि विदेशी स्किल्ड प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका में काम करने का सबसे बड़ा रास्ता बंद हो गया है।

सांसद का आरोप; “विदेशी कर्मचारी ले रहे अमेरिकी नौकरियां” :

बिल पेश करते हुए सांसद स्ट्यूबे ने कहा कि कंपनियां सस्ते विदेशी कर्मचारियों को भर्ती कर रही हैं। अमेरिकी युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही और वेतन स्तर पर दबाव बढ़ा है। उनका दावा है कि बड़ी टेक कंपनियों ने विदेशी कर्मचारियों को रखने के कारण हजारों अमेरिकी कर्मचारियों को हटाया गया है।

भारतीयों पर क्यों पड़ेगा सबसे बड़ा असर?

विदित है कि H-1B वीजा का सबसे बड़ा लाभार्थी देश भारत है। अनुमान के मुताबिक H-1B पाने वालों में 70% से ज्यादा भारतीय है। इस वीजा का दूसरा सबसे बड़ा इस्तेमाल चीन करता है जो कि 12% है। भारतीयों की आईटी, इंजीनियरिंग, फाइनेंस और हेल्थ सेक्टर में भारी संख्या है। हर साल लाखों छात्र इसी वीजा को लक्ष्य बनाकर पढ़ाई करते हैं। इसलिए यह बिल पास हुआ तो सबसे बड़ा झटका भारतीय आईटी और टेक प्रोफेशनल्स को लगेगा।

पहले से ही सख्ती बढ़ चुकी है :

विदित है कि अमेरिका पहले ही इस वीजा को लेकर कड़ा रुख अपना चुका है। सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच, इंटरव्यू डेट महीनों आगे, वीजा फीस भारी बढ़ोतरी के साथ H-4 वीजा पर भी अतिरिक्त निगरानी बरती जा रही है। यानी कानून बने या नहीं माहौल पहले ही कठिन हो चुका है।

H-1B वीजा क्या होता है?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह एक नॉन-इमिग्रेंट वर्क वीजा है, जिसके जरिए अमेरिकी कंपनियां विदेशी स्किल्ड कर्मचारियों को नौकरी देती हैं। इसका आईटी, इंजीनियरिंग, मेडिकल, फाइनेंस में उपयोग होता है। इसकी वैधता 3 साल (3 साल और बढ़ सकती) होती है। हर साल लगभग 65,000 नए वीजा जारी होते हैं। यही वीजा भारतीयों का “अमेरिकन ड्रीम पास” माना जाता है।

आगे क्या होगी प्रक्रिया :

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह सिर्फ प्रस्ताव है। अब प्रक्रिया होगी:

  1. हाउस कमेटी जांच करेगी

  2. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में वोटिंग

  3. सीनेट में बहस और वोट

  4. राष्ट्रपति की मंजूरी

चारों चरण पार होने के बाद ही कानून बनेगा।

युवाओं के लिए क्या मतलब?

अगर बिल पास हो गया तो:

●विदेश नौकरी का सबसे बड़ा रास्ता बंद हो जाएगा।

●भारतीय आईटी कंपनियों का मॉडल बदलेगा।

●स्टूडेंट्स का करियर प्लान बदल सकता है।

●कनाडा-यूरोप जैसे विकल्प बढ़ेंगे।

अभी यह सिर्फ एक प्रस्ताव है, लेकिन संकेत साफ हैं अमेरिका अपनी नौकरियों को स्थानीय लोगों के लिए सुरक्षित करना चाहता है। और अगर ऐसा हुआ तो अमेरिका में नौकरी का सपना पहले जैसा आसान नहीं रहेगा।

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