गाजियाबाद : कहते हैं कि देर से मिला न्याय भी जिंदगी में नई उम्मीद जगा देता है। कुछ ऐसा ही नजारा गाजियाबाद के गांधीनगर इलाके में देखने को मिला, जहां एक बुजुर्ग दंपति को करीब 22 साल लंबे इंतजार के बाद अपनी ही दुकान का कब्जा वापस मिला। दुकान की चाबी हाथ में आते ही दंपति भावुक हो गए और उन्होंने जिलाधिकारी रविंद्र कुमार को अपने लिए हनुमान जैसा सहारा बताया।
बुजुर्ग दम्पति की दुकान पर था कब्जा :
आपको बता दें कि बुजुर्ग दंपति का कहना था कि उनकी दुकान पर लंबे समय से कब्जा था और वह वर्षों से अपना अधिकार पाने के लिए प्रयास कर रहे थे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल पा रही थी। समय बीतने के साथ उनकी उम्मीद भी कमजोर पड़ने लगी थी।
शिकायत के बाद हरकत में आया प्रशासन
मामला जिलाधिकारी के सामने पहुंचने के बाद प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया। संबंधित दस्तावेजों की जांच कराई गई और पूरे मामले की पड़ताल की गई। जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद स्क्रीनिंग कमेटी के निर्णय के आधार पर दुकान को कब्जे से मुक्त कराने की कार्रवाई शुरू की गई।
DM खुद पहुंचे मौके पर, पुलिस की मौजूदगी में हुई कार्रवाई
गौरतलब है कि कार्रवाई के दौरान जिलाधिकारी रविंद्र कुमार प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस टीम के साथ गांधीनगर पहुंचे। सुरक्षा व्यवस्था के बीच दुकान को खाली कराया गया और पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से पूरी की गई। इसके बाद दुकान उसके वास्तविक मालिक बुजुर्ग दंपति को वापस सौंप दी गई।
नारियल फोड़कर दुकान की नई शुरुआत
दुकान मिलने के बाद मौके पर भावुक माहौल देखने को मिला। जिलाधिकारी ने नारियल फोड़कर दुकान की शुरुआत कराई और बुजुर्ग दंपति को उनका अधिकार वापस सौंपा। दंपति ने आरोप लगाया कि दुकान खाली कराने की बात कहने पर कब्जा करने वाले व्यक्ति की ओर से उन्हें धमकियां भी मिलती थीं।
‘DM हमारे लिए हनुमान बनकर आए’
22 साल बाद अपनी संपत्ति वापस मिलने पर बुजुर्ग दंपति की आंखों से खुशी के आंसू निकल पड़े। उन्होंने कहा कि जिस काम की उम्मीद उन्होंने लगभग छोड़ दी थी, वह प्रशासन की मदद से पूरा हो गया। उनके लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। दंपति ने जिलाधिकारी रविंद्र कुमार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिला प्रशासन का आभार जताया।
इलाके में बना चर्चा का विषय
दुकान वापस मिलने की खबर आसपास के क्षेत्र में तेजी से फैल गई। स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन की इस कार्रवाई की सराहना की। लोगों का कहना है कि वर्षों से लंबित मामलों में ऐसी कार्रवाई से लोगों का भरोसा मजबूत होता है और वास्तविक हकदारों को उनका अधिकार मिलने की उम्मीद बढ़ती है।
22 साल की लंबी लड़ाई के बाद बुजुर्ग दंपति को आखिरकार अपनी दुकान वापस मिल गई और उनके चेहरे पर संतोष और खुशी साफ दिखाई दी।