गाजियाबाद: एक ऑनलाइन गेम की भयावह लत ने तीन नाबालिग बहनों की जान ले ली। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक चौंकाने वाले मामले में 16, 14 और 12 साल की तीन बहनों ने मंगलवार देर रात अपने घर के 9वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। घटना तब और भी डरावनी हो गई जब जांच में पता चला कि लड़कियों की मौत किसी पारिवारिक या शैक्षणिक दबाव की वजह से नहीं, बल्कि एक कोरियाई टास्क-आधारित 'लव गेम' की लत की वजह से हुई थी।
सुसाइड नोट में डरावना खुलासा: "कोरिया हमारी जिंदगी है"
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पुलिस को घटनास्थल से मिले 8 पन्नों के सुसाइड नोट में लड़कियों ने लिखा था - "पापा, हम कोरिया को नहीं छोड़ सकते। कोरिया ही हमारी जिंदगी है और कोरिया ही हमारे लिए सब कुछ है।" इसके साथ ही उन्होंने "आई एम सॉरी, पापा" लिखकर अपने माता-पिता से माफी मांगी थी।
क्या है यह 'लव गेम' जिसने ली तीन जानें?
गौरतलब है कि पुलिस के मुताबिक, यह एक कोरियाई इंटरएक्टिव ऑनलाइन गेम है, जो किशोरों को फंसाने के लिए डिज़ाइन किया गया है:
1. वर्चुअल पार्टनर: खिलाड़ी एक आभासी साथी चुनते हैं जो उनसे कोरियाई भाषा में बात करता है।
2. 50 टास्क वाला गेम: शुरुआत में आसान टास्क (दोस्ती करना, फोटो शेयर करना), बाद में जटिल और व्यक्तिगत टास्क।
3. कोरियाई संस्कृति का जाल: गेम K-पॉप और K-ड्रामा की लोकप्रियता का फायदा उठाकर युवाओं को भावनात्मक रूप से जोड़ता है।
4. आइडेंटिटी क्राइसिस: धीरे-धीरे खिलाड़ी अपनी वास्तविक पहचान भूलकर खुद को कोरियाई समझने लगते हैं।
लॉकडाउन में लगी थी लत, स्कूल जाना भी छोड़ दिया :
पुलिस के अनुसार लड़कियों को यह लत कोविड लॉकडाउन के दौरान लगी थी। तीनों बहनें दो साल से स्कूल नहीं गई थीं और पढ़ाई पूरी तरह छोड़ चुकी थीं। वे हर काम एक साथ करती थीं - खाना, सोना, नहाना, मोबाइल चलाना। माता-पिता ने मोबाइल पर रोक लगाई थी, जिससे लड़कियां नाराज थीं।
पुलिस और परिवार का बयान :
आपको बता दें कि डीसीपी निमिष पाटिल ने कहा, "जांच में सामने आया है कि लड़कियां कोरियाई संस्कृति से गहरे प्रभावित थीं। उनकी शिक्षा अनियमित हो गई थी और वे पूरी तरह मोबाइल की लती थीं।" लड़कियों के पिता ने बताया, "वे हमसे कहती थीं कि कोरिया उनकी जिंदगी है। हमने मोबाइल रोका तो वे बहुत नाराज हुईं।"
विशेषज्ञ चेतावनी: "यह नया ब्लू व्हेल चैलेंज है"
साइबर मनोवैज्ञानिक इस गेम की तुलना ब्लू व्हेल चैलेंज से कर रहे हैं, जिसने 2016-18 में कई युवाओं की जान ली थी। ऐसे खेल भावनात्मक जुड़ाव वास्तविक दुनिया से कटने का कारण बनता है। टास्क पूरा न करने पर धमकियाँ मिलती हैं। अपनी पहचान का संकट पैदा होता है।
माता-पिता के लिए सलाह :
1. बच्चों की ऑनलाइन गतिविधि पर नजर रखें।
2. अजीब व्यवहार (अकेलापन, गोपनीयता, मूड स्विंग) को नजरअंदाज न करें।
3. स्क्रीन टाइम सीमित करें और वैकल्पिक गतिविधियों को बढ़ावा दें।
4. खुलकर बातचीत करें - डराएं नहीं, समझाएं।
यह घटना न सिर्फ एक परिवार के लिए त्रासदी है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक डरावनी चेतावनी है। डिजिटल दुनिया की आभासी बंदिशें कब वास्तविक जीवन की जंजीरें बन जाती हैं, पता ही नहीं चलता। माता-पिता की सजगता, स्कूलों की जिम्मेदारी और सरकार की कड़ी निगरानी ही ऐसी भयावह घटनाओं को रोक सकती है।