गाजियाबाद : उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में हाल ही में हुए सनसनीखेज हमले के बाद चर्चा में आया नाम 'सलीम वास्तिक' अब एक और बड़े खुलासे के केंद्र में है। जिस शख्स को लोग हमले के बाद ‘पीड़ित’ मान रहे थे, वही अब 13 साल के मासूम के अपहरण और हत्या का दोषी निकला है। दिल्ली पुलिस ने शनिवार को उसे पूरे 25 साल बाद गिरफ्तार कर लिया।
1995 का खौफनाक कांड; अपहरण, फिरौती और हत्या
आपकी जानकारी के लिये बता दें कि पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार 20 जनवरी 1995 को सलीम ने दिल्ली के एक कारोबारी के बेटे का अपहरण किया। बच्चे की उम्र महज 13 साल थी। परिवार से फिरौती मांगी गई। रकम न मिलने पर निर्दयता से हत्या कर दी गई। इस मामले में अदालत ने 1997 में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
जमानत मिली और फिर 25 साल तक गायब
गौरतलब है कि सलीम को साल 2000 में जमानत मिली। इसके बाद वह फरार हो गया। वह शामली, मेरठ, मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद में नाम और पहचान बदलकर छिपता रहा। पुलिस के लिए वह एक “लंबे समय से वांछित अपराधी” बना रहा।
हमले ने खोली फाइल; 14 चाकुओं के वार के बाद खुला सच
विदित है कि 27 फरवरी को गाजियाबाद में सलीम पर दिनदहाड़े हमला हुआ। नकाबपोश हमलावर बाइक से पहुंचे। 14 बार चाकू से वार किए और गला रेतने की कोशिश किए। हालत गंभीर हुआ उसके बाद सलीम के हॉस्पिटल में कई ऑपरेशन हुए। इस हमले के बाद मामला सुर्खियों में आया और यहीं से उसकी पुरानी फाइलें फिर खुल गईं।
हमलावरों का एनकाउंटर, फिर गिरफ्तारी
विदित है कि पुलिस ने हमले के आरोपियों; दो सगे भाइयों को एनकाउंटर में मार गिराया। जांच के दौरान जब सलीम की पृष्ठभूमि खंगाली गई, तो सामने आया कि वह कोई साधारण व्यक्ति नहीं, बल्कि सजायाफ्ता हत्यारा है।
डबल लाइफ; यूट्यूबर, डिबेटर और फरार अपराधी
गौरतलब है कि गाजियाबाद में वह “सलीम वास्तिक” नाम से रह रहा था। यूट्यूब चैनल चला रहा था। और टीवी डिबेट्स में हिस्सा लेता था। खुद को “एक्स-मुस्लिम” बताकर चर्चा में रहता था। लेकिन अंदर ही अंदर वह कानून से भागा हुआ अपराधी था।
कैसे छिपा रहा इतने साल?
जांच एजेंसियों के मुताबिक सलीम लगातार लोकेशन बदलता रहा। पहचान और नाम बदलता रहा और लोकल स्तर पर सामान्य जिंदगी जीता रहा यानी एक तरह से वह खुलेआम समाज के बीच छिपा हुआ था।
अब क्या होगा आगे?
गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस उसे ट्रांजिट में लेकर गई है। पुराने केस में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी। फरारी के 25 साल भी केस को और गंभीर बनाएंगे।
बड़ा सवाल; क्या हम पहचान पाते हैं असली चेहरा?
यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं बल्कि एक बड़ा सवाल भी है कि क्या हम जिन लोगों को देखते हैं, उनकी असली पहचान जानते हैं? एक तरफ हमले का “शिकार” दिखने वाला चेहरा दूसरी तरफ मासूम की हत्या का दोषी अतीत।
सच देर से सही, सामने आता जरूर है। 25 साल तक कानून से भागता रहा लेकिन आखिरकार गिरफ्तारी हुई। यह मामला बताता है कि समय चाहे जितना लगे, लेकिन अपराध का हिसाब एक दिन जरूर होता है।