गाजियाबाद : गाजियाबाद और पूर्वी दिल्ली के लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अब शहर को जल्द ही एक नया मेट्रो कॉरिडोर मिलने जा रहा है, जो न सिर्फ रोजमर्रा के सफर को आसान बनाएगा, बल्कि एयरपोर्ट तक पहुंच भी बेहद सुविधाजनक कर देगा। यह महत्वाकांक्षी परियोजना DMRC द्वारा तैयार की जा रही डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) के जरिए आगे बढ़ रही है।
क्या है पूरा प्रोजेक्ट?
आपकी जानकारी के लिये बता दें कि यह करीब 16 किलोमीटर लंबा नया मेट्रो कॉरिडोर होगा।
रूट: वैशाली से गोकुलपुरी
अनुमानित लागत: करीब ₹4500 करोड़
डीपीआर तैयार करने का काम जारी है। यह कॉरिडोर गाजियाबाद को सीधे दिल्ली मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
किन स्टेशनों को जोड़ सकता है यह रूट?
आपको बता दें कि प्रस्तावित रूट में कई अहम इलाके शामिल हो सकते हैं, जिसमें वैशाली, साहिबाबाद, मोहन नगर, पसोंडा, हिंडन एयरपोर्ट, गगन विहार और गोकुलपुरी शामिल हो सकतें हैं। इससे ट्रांस हिंडन और इंदिरापुरम-वसुंधरा क्षेत्र के लाखों लोगों को सीधा फायदा मिलेगा।
हिंडन एयरपोर्ट तक आसान पहुंच
गौरतलब है कि इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह लाइन सीधे हिण्डन एयरपोर्ट से होकर गुजरेगी। अभी एयरपोर्ट मेट्रो स्टेशनों से लगभग 5 किमी दूर है, लेकिन इस कॉरिडोर के बाद एयरपोर्ट तक सीधी मेट्रो कनेक्टिविटी हो जाएगी। इससे समय और ट्रैफिक दोनों की बचत होगी।
मेट्रो नेटवर्क से मजबूत कनेक्शन
विदित है कि यह नया कॉरिडोर ब्लू लाइन (वैशाली), पिंक लाइन (गोकुलपुरी) और भविष्य में नमो भारत (RRTS) से भी जुड़ेगा, जिससे यात्रियों को मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट की सुविधा मिलेगी।
मोहन नगर बन सकता है बड़ा इंटरचेंज
योजना के अनुसार मोहन नगर पर इंटरचेंज स्टेशन बन सकता है। यहां से रेड लाइन और अन्य रूट्स पर कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे यात्रियों को बिना लंबा चक्कर लगाए सीधे अपने गंतव्य तक पहुंचने का विकल्प मिलेगा।
फंडिंग और चुनौतियां भी सामने
आपको बता दें कि हालांकि परियोजना बड़ी है, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं है। पहले की परियोजनाएं फंड की कमी से अटकी रहीं। इसके लिये केंद्र और राज्य सरकार से मंजूरी जरूरी है। डीपीआर के बाद ही फाइनल फैसला होगा। लेकिन अधिकारियों का मानना है कि इस बार प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हैं।
कब तक शुरू होगा काम?
अभी यह परियोजना DPR स्टेज में है। रिपोर्ट तैयार होने के बाद फंडिंग मंजूरी और निर्माण प्रक्रिया शुरू होगी। अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार हुआ, तो आने वाले वर्षों में गाजियाबाद का मेट्रो नेटवर्क पूरी तरह बदल सकता है।
यह नया मेट्रो कॉरिडोर सिर्फ एक ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि गाजियाबाद के शहरी विकास की नई दिशा है। इससे न केवल ट्रैफिक का दबाव कम होगा, बल्कि एयरपोर्ट कनेक्टिविटी, रोजगार और रियल एस्टेट तीनों क्षेत्रों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। आने वाले समय में यह कॉरिडोर एनसीआर की लाइफलाइन बनने की क्षमता रखता है।