नई दिल्ली : देश में तेजी से बढ़ती बिजली की जरूरत और महंगे होते बिजली बिलों के बीच सोलर पैनल लोगों के लिए बड़ा विकल्प बनता जा रहा है। इसी बीच पीएम सूर्य घर योजना को लेकर सरकार ने एक बड़ा बदलाव किया है। नए नियम के बाद अब उपभोक्ताओं को सोलर पैनल चुनने में ज्यादा आजादी मिलेगी, लेकिन इसके लिए उन्हें सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी छोड़नी पड़ सकती है। न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी मिनिस्ट्री (MNRE) ने साफ किया है कि जो लोग पीएम सूर्य घर योजना के तहत मिलने वाली केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA) यानी सब्सिडी नहीं लेना चाहते हैं, वे अब ‘गिव इट अप’ विकल्प चुनकर नॉन-DCR सोलर पैनल भी लगवा सकेंगे।
क्या है सरकार का नया नियम?
आपको बता दें कि सरकार की नई व्यवस्था के तहत अगर कोई उपभोक्ता सब्सिडी का लाभ नहीं लेना चाहता है तो उसे सोलर पैनल चुनने में ज्यादा छूट मिलेगी। ऐसे लोग नॉन-DCR सोलर मॉड्यूल का इस्तेमाल कर सकेंगे। यह छूट 31 मार्च 2027 तक लागू रहेगी। सरकार का मानना है कि इससे देश में रूफटॉप सोलर लगाने की रफ्तार बढ़ेगी और ज्यादा से ज्यादा लोग सौर ऊर्जा से जुड़ पाएंगे। हालांकि जो लोग सब्सिडी लेना चाहते हैं, उन्हें योजना के तहत निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन करना होगा।
‘गिव इट अप’ ऑप्शन क्या है?
गौरतलब है कि पीएम सूर्य घर योजना में जो उपभोक्ता ‘गिव इट अप’ विकल्प चुनेंगे, उन्हें केंद्र सरकार की सब्सिडी नहीं मिलेगी। लेकिन इसके बदले उन्हें सोलर पैनल चुनने की ज्यादा स्वतंत्रता मिलेगी। वे अपनी पसंद और बजट के अनुसार नॉन-DCR पैनल लगवा सकेंगे। खास बात यह है कि ऐसे उपभोक्ता नेट मीटरिंग जैसी सुविधा का फायदा उठा सकेंगे और उन्हें इसके लिए किसी अलग पोर्टल पर आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। आवेदन पीएम सूर्य घर योजना के राष्ट्रीय पोर्टल से ही होगा।
₹78 हजार तक की सब्सिडी छोड़ने का फैसला आसान नहीं
पीएम सूर्य घर योजना के तहत 3 किलोवाट तक के रूफटॉप सोलर सिस्टम पर केंद्र सरकार की ओर से करीब ₹78,000 तक की सब्सिडी दी जाती है। एक सामान्य 3 किलोवाट सोलर सिस्टम लगाने में लगभग ₹1.8 लाख से ₹2.3 लाख तक खर्च आ सकता है। ऐसे में सब्सिडी लेने वाले लोगों का खर्च काफी कम हो जाता है। लेकिन जिन इलाकों में DCR मॉड्यूल महंगे हैं या आसानी से उपलब्ध नहीं हैं, वहां कुछ लोग नॉन-DCR पैनल चुनकर जल्दी इंस्टॉलेशन करा सकते हैं।
आम लोगों को क्या फायदा होगा?
विदित है कि नए नियम से उपभोक्ताओं के पास अब दो रास्ते होंगे—
पहला, सरकार की सब्सिडी लेकर तय नियमों के तहत सोलर सिस्टम लगवाएं।
दूसरा, सब्सिडी छोड़कर अपनी पसंद का सोलर पैनल चुनें।
इससे खासकर उन लोगों को राहत मिल सकती है, जिन्हें जल्दी सोलर सिस्टम लगवाना है या जो अलग तकनीक और कीमत वाले पैनल लेना चाहते हैं।
सरकार ने क्यों उठाया यह कदम?
देश में सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। पीएम सूर्य घर योजना के जरिए लाखों घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन बढ़ती मांग के बीच कुछ जगहों पर घरेलू सोलर मॉड्यूल की उपलब्धता और कीमत को लेकर चुनौतियां सामने आ रही थीं। इसी वजह से सरकार ने यह नया विकल्प दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ताओं को सब्सिडी छोड़ने से पहले पूरी गणना कर लेनी चाहिए, क्योंकि कई राज्यों में केंद्र के अलावा अतिरिक्त लाभ भी मिल सकता है।
कुल मिलाकर यह बदलाव लोगों को ज्यादा विकल्प देने और देश में रूफटॉप सोलर को तेजी से आगे बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।