नई दिल्ली: भारत की रक्षा व्यवस्था में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। अनुभवी सैन्य अधिकारी जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने देश के तीसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के रूप में जिम्मेदारी संभाल ली है। थल, जल और वायु सेना के बीच बेहतर तालमेल बनाने वाली इस सबसे अहम सैन्य कुर्सी पर अब एक ऐसे अधिकारी की तैनाती हुई है, जिसने चार दशक से ज्यादा समय तक देश की सीमाओं से लेकर आतंकवाद प्रभावित इलाकों तक अपनी सेवाएं दी हैं। पद संभालने के बाद उन्हें साउथ ब्लॉक में औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। उन्होंने साफ संदेश दिया कि आने वाले समय में भारतीय सेनाओं का फोकस जॉइंटनेस (तीनों सेनाओं का तालमेल), आत्मनिर्भरता और इनोवेशन पर रहेगा।
गढ़वाल राइफल्स से CDS तक का सफर, 40 साल की शानदार सैन्य यात्रा
आपको बता दें कि जनरल एनएस राजा सुब्रमणि का सैन्य करियर अनुशासन, नेतृत्व और मुश्किल परिस्थितियों में फैसले लेने की क्षमता के लिए जाना जाता है। उन्हें वर्ष 1985 में गढ़वाल राइफल्स में कमीशन मिला था। इसके बाद उन्होंने देश के अलग-अलग इलाकों और चुनौतीपूर्ण हालात में कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। चाहे आतंकवाद विरोधी अभियान हों या सीमा क्षेत्रों में रणनीतिक तैनाती, उन्होंने हर मोर्चे पर अपनी नेतृत्व क्षमता साबित की।
असम से जम्मू-कश्मीर तक दिखाया दम
गौरतलब है कि जनरल सुब्रमणि ने असम में चलाए गए ऑपरेशन राइनो के दौरान उग्रवाद विरोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने 16 गढ़वाल राइफल्स की कमान संभाली। इसके अलावा उन्होंने जम्मू-कश्मीर में 168 इन्फैंट्री ब्रिगेड और कठिन परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में 17 माउंटेन डिवीजन का नेतृत्व किया। पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय सेना की प्रमुख स्ट्राइक कोर की कमान संभालना भी उनके करियर की बड़ी उपलब्धियों में शामिल है।
आर्मी के बड़े पदों से होते हुए पहुंचे CDS की कुर्सी तक
CDS बनने से पहले जनरल सुब्रमणि भारतीय सेना में कई शीर्ष जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। वह थल सेना के उप प्रमुख रहे। इससे पहले मध्य कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के तौर पर भी उन्होंने अपनी सेवाएं दीं। उनके पास न सिर्फ युद्ध क्षेत्र का अनुभव है, बल्कि सैन्य योजना, खुफिया व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय रक्षा संबंधों की भी गहरी समझ है।
विदेश में भी निभाई अहम जिम्मेदारी
जनरल सुब्रमणि सिर्फ युद्ध रणनीति तक सीमित अधिकारी नहीं रहे हैं। उन्होंने कजाखस्तान में भारत के रक्षा अताशे के रूप में भी काम किया। इसके अलावा सैन्य खुफिया और रक्षा मंत्रालय से जुड़े कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए उन्होंने भारतीय सेना की रणनीतिक तैयारियों में योगदान दिया।
मजबूत शिक्षा और रणनीतिक सोच
एनएस राजा सुब्रमणि ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) और भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) से प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इसके अलावा उन्होंने विदेश और भारत के प्रतिष्ठित रक्षा संस्थानों से उच्च सैन्य शिक्षा हासिल की है। यही वजह है कि उन्हें आधुनिक युद्ध, नई तकनीक और भविष्य की रक्षा चुनौतियों को समझने वाला अधिकारी माना जाता है।
सम्मानों से भरा सैन्य करियर
आपको बता दें कि चार दशक की सेवा के दौरान उनकी उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें कई बड़े सैन्य सम्मान दिए गए हैं। इनमें शामिल हैं—
ये सम्मान उनके नेतृत्व, साहस और देश सेवा में योगदान को दिखाते हैं।
क्या होता है CDS और क्यों है इतना महत्वपूर्ण पद?
आपको बता दें कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ यानी CDS भारत की तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बनाने वाला सबसे बड़ा सैन्य पद है। इस पद की शुरुआत 2020 में की गई थी और जनरल बिपिन रावत देश के पहले CDS बने थे।
CDS का काम होता है—
कितनी होती है CDS की सैलरी?
CDS चार सितारा सैन्य अधिकारी का पद होता है। इस पद पर अधिकारी को करीब 2.5 लाख रुपये प्रति माह वेतन मिलता है। इसके अलावा सरकारी आवास, सुरक्षा, स्टाफ, यात्रा और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
नई चुनौतियां, नया नेतृत्व
आपको बता दें कि दुनिया में तेजी से बदलती सुरक्षा चुनौतियों, आधुनिक हथियारों और तकनीकी युद्ध के दौर में जनरल एनएस राजा सुब्रमणि के सामने बड़ी जिम्मेदारी होगी। अब उनकी प्राथमिकता भारतीय सेनाओं को और ज्यादा आधुनिक, आत्मनिर्भर और संयुक्त शक्ति के रूप में तैयार करना होगी।
चार दशक के अनुभव वाले इस सैन्य अधिकारी से उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में भारत की रक्षा व्यवस्था और मजबूत दिशा में आगे बढ़ेगी।