दिल्ली-NCR में ट्रांसपोर्टरों ने किया 3 दिन के चक्का जाम का ऐलान!: BS-4 ट्रकों पर प्रतिबंध से मचा हड़कंप, सब्जी-फल-दूध की सप्लाई पर खतरा, वहीं 1753 करोड़ रूपये...जानें क्यों भड़के ट्रांसपोर्टर्स और क्या हैं उनकी प्रमुख माँगे?
दिल्ली-NCR में ट्रांसपोर्टरों ने किया 3 दिन के चक्का जाम का ऐलान!

नई दिल्ली : दिल्ली-एनसीआर में अगले तीन दिन ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर बड़ा असर पड़ सकता है। All India Motor Transport Congress के नेतृत्व में 68 से ज्यादा ट्रांसपोर्ट यूनियनों और एसोसिएशनों ने 21 से 23 मई तक बड़े चक्का जाम का ऐलान कर दिया है। ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट और दिल्ली सरकार की नई नीतियों ने लाखों ट्रक ऑपरेटरों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा कर दिया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि अगर तीन दिन ट्रकों के पहिए थम गए, तो क्या दिल्ली-एनसीआर में सामान की सप्लाई प्रभावित होगी? क्या सब्जियों, फल, दूध और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं?

आखिर क्यों भड़के ट्रांसपोर्टर?

गौरतलब है कि ट्रांसपोर्ट यूनियनों का सबसे बड़ा विरोध “पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क” यानी ECC को लेकर है। संगठनों का कहना है कि दिल्ली आने वाले मालवाहक वाहनों पर भारी शुल्क बढ़ोतरी कर दी गई है। ट्रांसपोर्टरों के मुताबिक नई दरें, हल्के कमर्शियल वाहनों पर ECC करीब 1400 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये और भारी ट्रकों पर शुल्क 2600 रुपये से बढ़ाकर 4000 रुपये कर दिए गए हैं यानी कई मामलों में 40 से 55 प्रतिशत तक बढ़ोतरी। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि पहले ही डीजल, टोल और मेंटेनेंस का खर्च बढ़ चुका है, ऊपर से नया शुल्क उद्योग की कमर तोड़ देगा।

बीएस-4 ट्रकों पर प्रतिबंध से मचा हड़कंप

सबसे ज्यादा नाराजगी 1 नवंबर 2026 से लागू होने वाले उस प्रस्तावित नियम को लेकर है, जिसमें बीएस-4 और उससे नीचे के कमर्शियल वाहनों की दिल्ली एंट्री पर रोक लगाने की तैयारी है। ट्रांसपोर्ट यूनियनों का दावा है कि इससे दिल्ली-एनसीआर के 17 लाख से ज्यादा ट्रक ऑपरेटर और उनके परिवार प्रभावित होंगे। उनका कहना है कि बीएस-4 वाहन अभी भी उत्सर्जन मानकों का पालन करते हैं और कई मौकों पर सरकार खुद इन्हें संचालन की अनुमति देती रही है।

“दिल्ली को कॉरिडोर बनाने वालों पर लगना था टैक्स”

आपको बता दें कि ट्रांसपोर्ट संगठनों का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट का मूल उद्देश्य सिर्फ उन ट्रकों को नियंत्रित करना था, जो दिल्ली को केवल ट्रांजिट रूट की तरह इस्तेमाल करते हैं। लेकिन अब दिल्ली में सामान उतारने वाले ट्रक, जरूरी वस्तुएं लाने वाले वाहन और खाली एंट्री करने वाले कमर्शियल वाहन इन सभी पर ECC लगाया जा रहा है। यूनियनों का कहना है कि इससे जरूरी सप्लाई चेन भी प्रभावित होगी।

“1753 करोड़ वसूले, फिर भी हवा साफ नहीं हुई”

ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि 2015 से दिसंबर 2025 तक ECC के जरिए करीब 1753 करोड़ रुपये वसूले गए, लेकिन दिल्ली की हवा में वैसा सुधार नहीं दिखा, जैसा वादा किया गया था। संगठनों के मुताबिक, इस राशि का 55 प्रतिशत हिस्सा अभी तक खर्च ही नहीं हुआ। यही वजह है कि ट्रांसपोर्टर अब सवाल उठा रहे हैं कि जब हवा साफ नहीं हुई, तो फिर लगातार नया आर्थिक बोझ क्यों डाला जा रहा है?

दिल्ली-NCR में क्या पड़ सकता है असर?

अगर तीन दिन तक चक्का जाम पूरी तरह सफल रहा, तो इसका असर कई सेक्टरों पर दिख सकता है—

फल और सब्जियों की सप्लाई

मंडियों तक माल पहुंचने में देरी

निर्माण सामग्री की कमी

ई-कॉमर्स डिलीवरी प्रभावित

छोटे व्यापारियों पर असर

ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से महंगाई

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आंदोलन लंबा चला, तो दिल्ली-एनसीआर की सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है।

सरकार से क्या मांग कर रहे ट्रांसपोर्टर?

ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं -

  • ECC में की गई बढ़ोतरी तुरंत वापस ली जाए

  • केवल ट्रांजिट वाहनों पर शुल्क लागू हो

  • दिल्ली में सामान लेकर आने वाले ट्रकों को राहत मिले

  • बीएस-4 वाहनों पर प्रस्तावित प्रतिबंध हटाया जाए

फिलहाल प्रशासन और ट्रांसपोर्ट यूनियनों के बीच बातचीत की उम्मीद बनी हुई है। लेकिन अगर समाधान नहीं निकला, तो आने वाले दिनों में दिल्ली-एनसीआर की सड़कें ट्रकों के बिना सूनी नजर आ सकती हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार और ट्रांसपोर्ट संगठन आमने-सामने की इस लड़ाई को बातचीत से सुलझाते हैं या राजधानी को बड़े ट्रांसपोर्ट संकट का सामना करना पड़ेगा।

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