नई दिल्ली : देशभर के लाखों छात्रों का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया। Central Board of Secondary Education यानी CBSE ने 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया है। रिजल्ट आते ही कहीं खुशी का माहौल दिखा तो कहीं छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ गई। इस बार कुल 85.20% छात्र पास हुए हैं, लेकिन पिछले साल के मुकाबले रिजल्ट में करीब 3 प्रतिशत की गिरावट ने सभी को चौंका दिया है। इस साल 17 लाख 80 हजार से ज्यादा छात्रों ने परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। इनमें से 17,68,968 छात्र परीक्षा में शामिल हुए और 15 लाख से ज्यादा छात्र पास हुए। हालांकि करीब 1 लाख 63 हजार छात्रों की कंपार्टमेंट आने से कई परिवारों में तनाव का माहौल भी देखा गया।
लड़कियों ने फिर दिखाया दम
आपकी जानकारी के लिये बता दें कि CBSE 12वीं रिजल्ट में इस बार भी लड़कियों ने बाजी मार ली। लड़कियों का पास प्रतिशत 88.86% रहा, जबकि लड़कों का रिजल्ट 82.13% दर्ज किया गया। यानी लड़कियां लड़कों से लगभग 6.73% आगे रहीं। ट्रांसजेंडर छात्रों का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा और उनका रिजल्ट 100% दर्ज किया गया।
प्रयागराज सबसे पीछे, तिरुवनंतपुरम फिर नंबर-1
गौरतलब है कि देशभर के रीजनल रिजल्ट में इस बार भी बड़ा अंतर देखने को मिला। तिरुवनंतपुरम रीजन ने सबसे शानदार प्रदर्शन करते हुए 95% से ज्यादा रिजल्ट दिया, जबकि प्रयागराज रीजन सबसे नीचे रहा। प्रयागराज में सबसे ज्यादा छात्रों की कंपार्टमेंट आई। आंकड़ों के मुताबिक यहां करीब 16% से ज्यादा छात्रों को सप्लीमेंट्री का सामना करना पड़ेगा। इसके बाद दिल्ली ईस्ट, पंचकूला और बेंगलुरु जैसे रीजन भी चिंता की सूची में शामिल रहे।
90% से ज्यादा नंबर पाने वालों की भी लंबी कतार
विदित है कि रिजल्ट में भले गिरावट आई हो, लेकिन टॉप स्कोर करने वाले छात्रों की संख्या भी कम नहीं रही। करीब 94 हजार छात्रों ने 90% से ज्यादा अंक हासिल किए हैं, जबकि 17 हजार से ज्यादा छात्रों ने 95% से ऊपर नंबर लाकर शानदार प्रदर्शन किया है। हालांकि CBSE ने इस बार भी कोई टॉपर लिस्ट जारी नहीं की है। बोर्ड ने साफ कहा है कि छात्रों पर अनावश्यक दबाव से बचाने के लिए मेरिट लिस्ट और टॉपर सिस्टम को जारी नहीं रखा जाएगा।
कौन से स्कूल रहे सबसे आगे?
आपको बता दें कि इस बार Kendriya Vidyalaya Sangathan और Jawahar Navodaya Vidyalaya का प्रदर्शन सबसे शानदार रहा। केंद्रीय विद्यालयों का रिजल्ट लगभग 98.55% रहा। वहीं जवाहर नवोदय विद्यालयों का रिजल्ट 98.47% रहा। सरकारी स्कूलों का रिजल्ट 89% से ज्यादा रहा तो निजी स्कूलों का रिजल्ट लगभग 84% रहा। इन आंकड़ों ने एक बार फिर सरकारी शिक्षा मॉडल को मजबूत साबित किया है।
रिजल्ट कम क्यों आया?
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार रिजल्ट में गिरावट की सबसे बड़ी वजह सख्त डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली रही। CBSE ने इस बार ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) के जरिए कॉपियों की जांच कराई, जिसमें नंबर देने में ज्यादा पारदर्शिता और सख्ती अपनाई गई। इसी कारण कई छात्रों के नंबर उम्मीद से कम आए।
फेल हुए छात्रों के लिए क्या है रास्ता?
विदित है कि अगर किसी छात्र की कंपार्टमेंट आई है या वह रिजल्ट से संतुष्ट नहीं है, तो उसके पास अभी कई मौके मौजूद हैं।
कंपार्टमेंट परीक्षा
एक या दो विषयों में फेल छात्रों को जुलाई में होने वाली सप्लीमेंट्री परीक्षा के जरिए साल बचाने का मौका मिलेगा।
री-इवैल्यूएशन
अगर किसी छात्र को लगता है कि उसकी कॉपी सही तरीके से चेक नहीं हुई, तो वह री-चेकिंग और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकता है।
NIOS विकल्प
जो छात्र दोबारा CBSE परीक्षा नहीं देना चाहते, उनके लिए National Institute of Open Schooling यानी NIOS बड़ा विकल्प बनकर सामने आया है।
ऐसे चेक करें रिजल्ट
आपको बता दें कि छात्र अपना रिजल्ट इन प्लेटफॉर्म पर देख सकते हैं:
वेबसाइट स्लो होने पर छात्र SMS और डिजिलॉकर के जरिए भी मार्कशीट डाउनलोड कर सकते हैं।
रिजल्ट जारी होने के बाद अब देशभर में कॉलेज एडमिशन और करियर को लेकर हलचल तेज हो गई है। किसी के घर जश्न है तो कहीं तनाव का माहौल। लेकिन शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि एक रिजल्ट जिंदगी तय नहीं करता। जिन छात्रों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, उनके पास अभी भी आगे बढ़ने के कई रास्ते खुले हैं।