दिल्ली में बसों में तैनात होंगी हथियारबंद महिला कमांडो!: घर तक मिलेगी सुरक्षा, पिंक कार्ड' मेट्रो-ऑटो में भी होगा मान्य, वहीं ओला-उबर में अब...इन 5 बड़े बदलावों से अब दिल्ली बनेगा महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित शहर
दिल्ली में बसों में तैनात होंगी हथियारबंद महिला कमांडो!

नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली में महिलाओं के सफर को सुरक्षित बनाने के लिए बड़ा कदम उठाने की तैयारी है। अब सुरक्षा सिर्फ बस के अंदर या बस स्टॉप तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि महिलाओं को उनके घर तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए नया डोर-स्टेप सुरक्षा मॉडल तैयार किया जा रहा है। इस नई व्यवस्था के तहत डीटीसी बसों में हथियारबंद महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी, ताकि महिला यात्री बिना डर और असुरक्षा के सफर कर सकें।

बसों के अंदर रहेंगी महिला सुरक्षा कमांडो

आपको बता दें कि महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सार्वजनिक बसों में महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी बढ़ाई जाएगी। इनकी तैनाती का मकसद छेड़छाड़, अपराध या किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई करना होगा। नई व्यवस्था को बसों में पहले से मौजूद CCTV कैमरों, पैनिक बटन और सुरक्षा सिस्टम से जोड़ा जाएगा, ताकि खतरे की स्थिति में तुरंत मदद पहुंच सके।

बस से उतरने के बाद भी खत्म नहीं होगी सुरक्षा

गौरतलब है कि अक्सर महिलाओं के लिए सबसे बड़ी चिंता बस स्टॉप से घर तक पहुंचने की होती है। खासकर देर रात या सुनसान इलाकों में यह सफर असुरक्षित महसूस होता है। इसी समस्या को देखते हुए अब लास्ट-माइल सुरक्षा मॉडल पर काम किया जाएगा। इसके तहत कोशिश होगी कि महिला यात्री को बस से उतरने के बाद भी सुरक्षित साधन मिले और वह बिना परेशानी अपने घर तक पहुंच सके।

ऑटो, ई-रिक्शा और कैब भी सुरक्षा नेटवर्क से जुड़ेंगे

विदित है कि नई योजना में ऑटो, ई-रिक्शा और कैब सेवाओं को भी सुरक्षा सिस्टम से जोड़ने की तैयारी है। खासकर बाहरी दिल्ली और दूर-दराज के इलाकों में इलेक्ट्रिक वाहनों का नेटवर्क मजबूत किया जाएगा, ताकि महिलाओं को सुरक्षित और भरोसेमंद यात्रा विकल्प मिल सके।

सहेली पिंक कार्ड का बढ़ेगा दायरा

महिलाओं की सुविधा के लिए सहेली पिंक स्मार्ट कार्ड को और ज्यादा उपयोगी बनाने की योजना है। भविष्य में इसे सिर्फ बसों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि मेट्रो, ऑटो और अन्य परिवहन सेवाओं से जोड़ने पर काम होगा। इससे महिलाओं को अलग-अलग यात्रा माध्यमों में आसान और सुविधाजनक सफर मिल सकेगा।

महिलाओं के लिए अलग कारपूलिंग की तैयारी

महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वुमन-ओनली कारपूलिंग जैसी सुविधा शुरू करने पर भी विचार किया जा रहा है। इसके तहत निजी कैब कंपनियों के साथ मिलकर ऐसा सिस्टम बनाया जा सकता है, जिसमें महिला यात्रियों को ज्यादा सुरक्षित माहौल मिले। यदि वाहन चालक पुरुष भी हो तो कोशिश होगी कि महिला यात्री अकेले सफर न करे और उसके साथ दूसरी महिला यात्री भी मौजूद हो।

परिवहन व्यवस्था में बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी

आपको बता दें कि सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए बस संचालन से जुड़े सिस्टम में महिलाओं की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा। फिलहाल दिल्ली के परिवहन नेटवर्क में 1002 महिला कंडक्टर और 77 महिला ड्राइवर कार्यरत हैं। आने वाले समय में महिला ड्राइवरों और कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।

सरकार और प्रशासन का उद्देश्य है कि राजधानी में महिलाएं दिन हो या रात, बिना डर सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल कर सकें। अगर यह योजना पूरी तरह लागू होती है तो दिल्ली की बस यात्रा न सिर्फ हाईटेक बल्कि महिलाओं के लिए पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित हो सकती है।

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