नई दिल्ली: अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत के Gen Z (युवा पीढ़ी) को लेकर दिए गए बयान ने देशभर में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर उनके बयान की भाषा को लेकर अभिनेता सोनू सूद समेत कई लोगों ने आपत्ति जताई, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी सामने आए जो मानते हैं कि कंगना ने आज की युवा पीढ़ी में बढ़ती अभद्र भाषा, अनुशासनहीनता और संस्कारों के क्षरण जैसे मुद्दों को उठाने की कोशिश की है।
क्या कहा था कंगना ने?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि NEET परीक्षा से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान वायरल हुए कुछ वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कंगना रनौत ने प्रदर्शनकारियों की भाषा और व्यवहार की आलोचना की थी। उन्होंने कुछ युवाओं के लिए "गटर पीढ़ी" जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसके बाद उनका बयान विवादों में आ गया। कंगना का कहना था कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब किसी के धर्म, माता-पिता, नेताओं या व्यक्तिगत आस्था का अपमान करना नहीं हो सकता। उनके अनुसार समाज में रहने के लिए अनुशासन, मर्यादा और संस्कार भी उतने ही जरूरी हैं जितनी स्वतंत्रता।
संस्कार और जिम्मेदारी पर दिया जोर
बढ़ते विवाद के बीच कंगना ने वीडियो जारी कर अपने बयान का बचाव किया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य पूरी युवा पीढ़ी को निशाना बनाना नहीं था, बल्कि उन लोगों की आलोचना करना था जो विरोध के नाम पर अपमानजनक भाषा का प्रयोग कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी आती है और लोकतंत्र में असहमति जताने का अधिकार है, लेकिन किसी की धार्मिक भावनाओं या व्यक्तिगत सम्मान को ठेस पहुंचाना उचित नहीं माना जा सकता।
सोनू सूद ने क्या कहा?
गौरतलब है कि अभिनेता सोनू सूद ने कंगना की भाषा पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यदि "गटर पीढ़ी" जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है तो यह उचित नहीं है। उनके मुताबिक, युवा ही किसी भी कलाकार की सबसे बड़ी ताकत होते हैं और सार्वजनिक जीवन में रहने वालों को बोलने से पहले अपने शब्दों को तौल लेना चाहिए। सोनू ने यह भी कहा कि जनता का सम्मान करना हर सार्वजनिक व्यक्ति की जिम्मेदारी है और किसी भी विषय पर अपनी बात सम्मानजनक तरीके से रखनी चाहिए।
सोशल मीडिया पर दो हिस्सों में बंटी राय
विदित है कि इस पूरे विवाद के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की राय बंटी हुई नजर आई। एक वर्ग ने कंगना की भाषा पर सवाल उठाए, जबकि दूसरे वर्ग ने कहा कि उन्होंने जिस मुद्दे की ओर ध्यान दिलाया, उस पर समाज को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
कई लोगों का मानना है कि आज के दौर में सोशल मीडिया पर बढ़ती अभद्र भाषा, व्यक्तिगत हमले और मर्यादा की कमी चिंता का विषय है। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि इस तरह की समस्याओं पर चर्चा होनी चाहिए, लेकिन भाषा संयमित और सम्मानजनक रहनी चाहिए।
बहस का केंद्र बना 'संस्कार बनाम अभिव्यक्ति की आजादी'
फिलहाल यह विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं रह गया है। अब चर्चा इस बात पर भी हो रही है कि आधुनिक समाज में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक मर्यादा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। एक पक्ष का मानना है कि युवाओं में संस्कार और जिम्मेदारी पर खुलकर बात होनी चाहिए, जबकि दूसरा पक्ष कहता है कि आलोचना करते समय पूरी पीढ़ी के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
यही वजह है कि कंगना रनौत और सोनू सूद के बयानों के बाद यह मुद्दा केवल फिल्मी दुनिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज, राजनीति और सोशल मीडिया पर भी व्यापक बहस का विषय बन गया है।