पेपर लीक पर मोदी सरकार का बड़ा एक्शन!: 10 साल जेल और ₹10 करोड़ जुर्माना वाले संशोधन विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी, 47 NTA अधिकारी भी बर्खास्त, फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट सहित...जानें नए कानून की 5 बड़ी विशेषताएं
पेपर लीक पर मोदी सरकार का बड़ा एक्शन!

नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET में पेपर लीक के मामले ने अब सरकार की सख्ती को पूरी तरह जगा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने पेपर लीक पर ऐतिहासिक फैसला लेते हुए पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। नए कानून के तहत अब पेपर लीक करने वालों को 10 साल तक की जेल और ₹10 करोड़ तक का जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा ऐसे मामलों की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में होगी, जहां तीन महीने के भीतर फैसला सुनाया जाना अनिवार्य होगा।

47 NTA अधिकारी बर्खास्त, कानूनी कार्रवाई भी होगी

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि NEET पेपर लीक मामले में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर शिकंजा कसते हुए 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया है। इनमें से कई के खिलाफ आपराधिक मामले भी दर्ज किए जाएंगे। सूत्रों के अनुसार, यह कदम NTA में व्यापक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा है। आउटसोर्सिंग व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा और संस्था में तकनीकी सुधार लागू किए जाएंगे, ताकि परीक्षाओं को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सके।

10 साल जेल, ₹10 करोड़ जुर्माना: नए कानून की 5 बड़ी बातें

गौरतलब है कि पुराने कानून में सजा 3 से 5 साल तक और जुर्माना ₹10 लाख था वहीं नए कानून में सजा 10 साल तक और जुर्माना ₹10 करोड़ होगा। नए कानून के हिसाब से कार्यवाही भी सामान्य कोर्ट की जगह फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगी। जिसकी समय-सीमा 3 महीने निर्धारित किया गया है। इस तरह नए बिल में प्रावधान भी सख्त से सख्त किया गया है।

पेपर लीक अब होगा गैर-जमानती अपराध, माफिया पर शिकंजा

गौरतलब है कि संशोधन विधेयक के तहत पेपर लीक से जुड़े सभी अपराधों को गैर-जमानती बनाया गया है। संगठित पेपर लीक माफिया, परीक्षा में धांधली करने वालों और फर्जी वेबसाइट बनाकर छात्रों को ठगने वालों पर भी सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। सरकार का कहना है कि नया कानून परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम है।

सोमवार को संसद में पेश होगा विधेयक

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह इस संशोधन विधेयक को सोमवार को संसद में पेश करेंगे। सरकार का लक्ष्य इसे मानसून सत्र में ही पारित कराना है। प्रधानमंत्री मोदी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि "युवाओं के भविष्य से बढ़कर कुछ नहीं है और जो लोग छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करेंगे, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।"

फास्ट-ट्रैक कोर्ट में 3 महीने में होगा फैसला

विदित है कि नए कानून की सबसे अहम विशेषता यह है कि पेपर लीक से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में होगी। Court को 3 महीने के भीतर फैसला सुनाना अनिवार्य होगा। इसके लिए राउज एवेन्यू कोर्ट में विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित किए गए हैं। सभी संबंधित मामलों को इन्हीं कोर्ट में ट्रांसफर किया जाएगा।

छात्रों को सरकार का साफ संदेश

सरकार ने छात्रों को साफ संदेश दिया है कि : "हमारी प्राथमिकता छात्रों के भविष्य की रक्षा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है। परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए सुधारों का सिलसिला जारी रहेगा।"

प्रशासनिक सुधार: दो सचिव बदले, 4 जनरल मैनेजर नियुक्त

आपको बता दें कि सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर भी बड़े बदलाव किए हैं:

• उच्च शिक्षा विभाग में नरेश पाल गंगवार को नया सचिव नियुक्त किया गया
• विद्यालय शिक्षा विभाग में टी.के. अनिल कुमार को नया सचिव बनाया गया
• पूर्व उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी का तबादला पंचायती राज विभाग में किया गया
• NTA में 4 वरिष्ठ जनरल मैनेजर नियुक्त किए जाएंगे
• UPSC के प्रतिभा सेतु पोर्टल के जरिए 16 यंग प्रोफेशनल्स की नियुक्ति होगी

छात्रों से मिले, मांगों पर सकारात्मक विचार का भरोसा

पेपर लीक को लेकर राजधानी में लंबे समय से प्रदर्शन जारी थे। इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने छात्र प्रतिनिधियों से मुलाकात की। सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार का भरोसा दिया। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिन की भूख हड़ताल के बाद अपना अनशन खत्म किया।

विशेषज्ञ लोगों का मानना है कि नया कानून पेपर लीक के खिलाफ अब तक का सबसे कठोर कदम है। लेकिन इसकी सफलता जमीनी स्तर पर लागू करने और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर निर्भर करेगी। सरकार का दावा है कि फास्ट-ट्रैक कोर्ट, गैर-जमानती प्रावधान और कठोर सजा से भविष्य में पेपर लीक की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगेगी। अब सबकी नजर संसद में इस विधेयक के पारित होने और CBI जांच की दिशा पर टिकी है।

अन्य खबरे