नए लेबर कोड में सैलरी, पे-स्लिप और वेतन विवादों पर बड़ा फैसला!: 7 तारीख तक कर्मचारियों को सैलेरी देनी अनिवार्य, नौकरी छोड़ते ही 2 दिन में पूरा हिसाब, वहीं वेतन में देरी पर...देखें नए लेबर कोड में होने वाले बड़े बदलाव_एक नजर
नए लेबर कोड में सैलरी, पे-स्लिप और वेतन विवादों पर बड़ा फैसला!

नई दिल्ली: देश में नए लेबर कोड को लेकर लंबे समय से चर्चा जारी है। इस कोड के लागू होने के बाद नौकरीपेशा कर्मचारियों के वेतन भुगतान, नौकरी छोड़ने पर फुल एंड फाइनल सेटलमेंट और वेतन विवादों के निपटारे से जुड़े कई नियम बदल जाएंगे। सरकार का उद्देश्य कर्मचारियों के अधिकारों को मजबूत करना और वेतन से जुड़े विवादों को कम करना है।

महीने की 7 तारीख तक देना होगा वेतन

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नए नियमों के तहत कंपनियों और संस्थानों के लिए यह सुनिश्चित करना होगा कि कर्मचारियों को हर महीने की समाप्ति के बाद सात दिनों के भीतर वेतन का भुगतान कर दिया जाए। यानी सामान्य परिस्थितियों में कर्मचारियों को महीने की 7 तारीख तक सैलरी मिल जानी चाहिए। वहीं, दैनिक मजदूरी करने वाले कर्मचारियों को उनकी शिफ्ट समाप्त होते ही भुगतान करना होगा। साप्ताहिक आधार पर काम करने वालों को उनकी छुट्टी से पहले और पखवाड़े (15 दिन) के आधार पर काम करने वालों को दो कार्य दिवस के भीतर वेतन देना होगा।

नौकरी छोड़ते ही 2 दिन में मिलेगा पूरा हिसाब

गौरतलब है कि नए लेबर कोड का सबसे बड़ा बदलाव फुल एंड फाइनल सेटलमेंट को लेकर है। यदि कोई कर्मचारी इस्तीफा देता है, उसे नौकरी से निकाला जाता है या उसकी सेवा समाप्त होती है, तो कंपनी को दो कार्य दिवस के भीतर उसका पूरा हिसाब-किताब करना होगा। इससे कर्मचारियों को महीनों तक अपने बकाया वेतन या अन्य भुगतान के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

अब सभी कर्मचारियों पर लागू होंगे नियम

विदित है कि पहले वेतन भुगतान से जुड़े कई नियम केवल निश्चित वेतन सीमा तक के कर्मचारियों पर लागू होते थे। लेकिन नए लेबर कोड के तहत यह व्यवस्था लगभग सभी कर्मचारियों पर लागू होगी। इसमें वरिष्ठ अधिकारी और अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारी भी शामिल होंगे।

बिना अनुमति वेतन काटा तो होगी कार्रवाई

यदि कोई नियोक्ता बिना वैध कारण के वेतन काटता है या समय पर भुगतान नहीं करता, तो कर्मचारी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। इसके लिए नए कोड में 'इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर' की व्यवस्था की गई है, जो दोनों पक्षों के बीच विवाद सुलझाने और बकाया भुगतान सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा। यदि मामला वहां भी नहीं सुलझता है, तो कर्मचारी औद्योगिक न्यायाधिकरण (इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल) का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

अब 3 साल तक कर सकेंगे बकाया वेतन का दावा

नए नियमों के तहत कर्मचारियों को एक और बड़ी राहत मिलने वाली है। अब वे तीन साल तक अपने बकाया वेतन का दावा कर सकेंगे। पहले इसके लिए समय-सीमा काफी कम थी, जिससे कई कर्मचारियों को अपना अधिकार नहीं मिल पाता था।

पे-स्लिप देना भी होगा अनिवार्य

नए लेबर कोड के अनुसार हर कर्मचारी को वेतन के साथ फिजिकल या इलेक्ट्रॉनिक पे-स्लिप देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा वेतन से कटौती की सीमा भी तय की गई है, ताकि नियोक्ता मनमाने तरीके से कर्मचारियों के वेतन में कटौती न कर सकें।

तीन महीने में होगा विवाद का निपटारा

सरकार ने वेतन से जुड़े मामलों के त्वरित समाधान पर भी जोर दिया है। नए नियमों के अनुसार ऐसे मामलों के निपटारे के लिए तीन महीने की समय-सीमा तय की गई है। यदि आदेश के बावजूद नियोक्ता भुगतान नहीं करता, तो संबंधित राशि की वसूली प्रशासन के माध्यम से भी की जा सकेगी।

कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है नया लेबर कोड?

विशेषज्ञों का मानना है कि नए लेबर कोड का उद्देश्य कर्मचारियों को समय पर वेतन, जल्दी फुल एंड फाइनल सेटलमेंट, पारदर्शी वेतन व्यवस्था और बेहतर कानूनी सुरक्षा देना है। यदि यह पूरी तरह लागू होता है तो नौकरीपेशा लोगों को वेतन और सेवा से जुड़े मामलों में पहले की तुलना में अधिक अधिकार और सुरक्षा मिल सकती है।

अन्य खबरे