लोक अदालत में चालान छूट की उम्मीद करने वालों के लिए बड़ा झटका!: अब 50% रकम जमा किए बिना नहीं जा सकेंगे कोर्ट, वहीं अब 45 दिन...सरकार ने ट्रैफिक नियमों में किये ये प्रमुख बदलाव?
लोक अदालत में चालान छूट की उम्मीद करने वालों के लिए बड़ा झटका!

नई दिल्ली: ट्रैफिक नियम तोड़ने के बाद चालान को लोक अदालत में कम कराने की उम्मीद रखने वाले वाहन चालकों के लिए अब नियम बदल गए हैं। सरकार ने ट्रैफिक चालान से जुड़ी प्रक्रिया को और सख्त कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत अब चालान को चुनौती देकर कोर्ट से राहत मांगने से पहले वाहन चालक को चालान राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा जमा करना होगा।

अब इंतजार करना पड़ेगा भारी

आपको बता दें कि पहले कई वाहन चालक चालान कटने के बाद भुगतान नहीं करते थे और इंतजार करते थे कि मामला लोक अदालत में जाए, जहां कम राशि देकर चालान खत्म कराया जा सके। लेकिन अब यह तरीका काम नहीं करेगा। नई व्यवस्था में ट्रैफिक पुलिस पेंडिंग चालानों को खुद कोर्ट नहीं भेजेगी।

45 दिन में लेना होगा फैसला

गौरतलब है कि केंद्रीय मोटर यान नियमावली 1989 के नियम 167 में बदलाव के बाद वाहन चालकों के लिए समय सीमा तय कर दी गई है। चालान कटने के 45 दिन के अंदर वाहन मालिक को या तो जुर्माना जमा करना होगा या फिर NextGen mParivahan पोर्टल पर दस्तावेजों के साथ चालान को चुनौती देनी होगी। अगर तय समय में कोई कार्रवाई नहीं की जाती है तो माना जाएगा कि वाहन चालक को चालान स्वीकार है।

कोर्ट जाने से पहले आधा चालान जमा करना जरूरी

अगर कोई व्यक्ति ऑनलाइन चालान को गलत बताकर शिकायत करता है तो ट्रैफिक पुलिस को 30 दिन के अंदर उसका निस्तारण करना होगा। यदि शिकायत खारिज हो जाती है और वाहन चालक कोर्ट जाना चाहता है तो पहले चालान की 50 प्रतिशत राशि जमा करनी होगी। इसके बाद ही न्यायालय से राहत मांगने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

लोक अदालत में छूट की उम्मीद रखने वालों पर असर

आपको बता दें कि पहले पुलिस कई लंबित चालानों को अदालत भेज देती थी और लोक अदालतों में लोग कम राशि देकर मामले निपटा लेते थे। नई व्यवस्था के बाद इस प्रक्रिया को डिजिटल और समयबद्ध बनाया गया है, जिससे लंबे समय तक चालान लंबित रखने की प्रवृत्ति कम होगी।

लाखों वाहन चालकों पर पड़ेगा असर

देशभर में हर महीने लाखों ट्रैफिक चालान जारी होते हैं। अकेले नोएडा जैसे शहरों में ही बड़ी संख्या में ई-चालान काटे जाते हैं। ऐसे में नई व्यवस्था लागू होने के बाद वाहन चालकों को चालान मिलने पर समय रहते कार्रवाई करनी होगी। 

नई प्रणाली के बाद अब चालान को नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है। वाहन चालकों को तय समय में भुगतान या कानूनी चुनौती का विकल्प चुनना होगा, वरना आगे राहत पाना पहले जैसा आसान नहीं रहेगा।

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