नई दिल्ली : दिव्यांगों का मजाक उड़ाने और अदालत के निर्देशों का पालन नहीं करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्टैंड-अप कॉमेडियन समय रैना समेत पांच कॉमेडियनों पर तीन-तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने सभी को दो सप्ताह के भीतर जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब किसी की गरिमा को ठेस पहुंचाने की छूट नहीं है।
कोर्ट ने कहा- हमें गुमराह किया गया
आपको बता दें कि मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि पहले सुधार का अवसर दिया गया था, लेकिन उसके बावजूद आदेशों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। कोर्ट के अनुसार, समय रैना ने अपने शो में किसी दिव्यांग व्यक्ति को शामिल नहीं किया और अदालत को दिए गए आश्वासन पूरे नहीं किए। अदालत ने इसे गंभीर मानते हुए कहा कि न्यायालय को गुमराह करना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला समय रैना के शो में स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) और दिव्यांग व्यक्तियों पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़ा है। इस मामले में क्योर एसएमए इंडिया फाउंडेशन ने याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि ऐसे कंटेंट से दिव्यांगों की गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंची है। याचिका में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इस तरह की सामग्री के लिए स्पष्ट नियम बनाने की भी मांग की गई है।
पहले क्या दिए थे कोर्ट ने निर्देश?
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और अन्य कॉमेडियनों को हर महीने दो विशेष शो आयोजित कर दिव्यांग बच्चों के इलाज के लिए फंड जुटाने का निर्देश दिया था। साथ ही कहा गया था कि इन कार्यक्रमों में दिव्यांग व्यक्तियों को भी शामिल किया जाए। अदालत का मानना था कि इससे समाज के प्रति सकारात्मक संदेश जाएगा।
वकीलों की दलीलों पर भी हुई बहस
गौरतलब है कि सुनवाई के दौरान समय रैना की ओर से कहा गया कि उनके शो के जरिए लाखों रुपये का फंड जुटाया गया है और दिव्यांग लोगों को भी आमंत्रित किया गया था। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उनका उद्देश्य आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि दिव्यांगों की गरिमा की रक्षा करना है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुनाया।
कोर्ट ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर दी अहम टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कलाकारों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों की सामाजिक जिम्मेदारी अधिक होती है। यदि किसी की अभिव्यक्ति से समाज के किसी वर्ग की गरिमा को ठेस पहुंचती है, तो उसके परिणाम भी भुगतने होंगे। अदालत ने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता असीमित नहीं है और इसके साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है।
सरकार से मांगी जा सकती हैं नई गाइडलाइन
सुनवाई के दौरान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाले कंटेंट को लेकर भी चर्चा हुई। अदालत ने कहा कि सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, यूट्यूब और अन्य डिजिटल माध्यमों पर दिव्यांगों सहित किसी भी वर्ग का अपमान करने वाले कंटेंट के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और जवाबदेही तय करने पर विचार कर सकती है।
दिव्यांगों के अधिकारों पर कानून क्या कहता है?
विदित है कि भारत में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 और संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान और गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार देता है। ऐसे में किसी भी व्यक्ति या वर्ग का सार्वजनिक रूप से अपमान करना या उनका उपहास उड़ाना कानूनी जांच और न्यायिक कार्रवाई के दायरे में आ सकता है।
अब आगे क्या होगा?
सभी संबंधित कॉमेडियनों को निर्धारित समय के भीतर जुर्माना जमा करना होगा और अदालत के आदेशों का पालन करना होगा। वहीं ऑनलाइन कंटेंट को लेकर भविष्य में नए नियम बनते हैं या नहीं, इस पर भी सभी की नजर बनी हुई है