नई दिल्ली: देश की करेंसी व्यवस्था में जल्द ही एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को ₹10 और ₹20 के पॉलीमर (प्लास्टिक) नोटों के फील्ड ट्रायल की मंजूरी दे दी है। यदि यह परीक्षण सफल रहता है, तो आने वाले समय में भारतीय बाजार में कागज के साथ-साथ प्लास्टिक के नोट भी चलन में दिखाई देंगे। हालांकि सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल मौजूदा कागजी नोट बंद नहीं किए जाएंगे और दोनों तरह की करेंसी साथ-साथ चलती रहेगी।
करीब 14 साल बाद फिर शुरू हुई योजना
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में पॉलीमर नोट लाने का विचार पहली बार वर्ष 2012 में सामने आया था। उस समय तकनीकी कारणों से यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब एक बार फिर सरकार और RBI ने इस परियोजना को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। इसके तहत शुरुआती चरण में ₹10 और ₹20 के कुल 200 करोड़ पॉलीमर नोट ट्रायल के लिए तैयार किए जाएंगे।
क्या होते हैं पॉलीमर नोट?
पॉलीमर नोट सामान्य कागज से नहीं, बल्कि विशेष प्रकार की मजबूत प्लास्टिक फिल्म (Polymer Substrate) पर तैयार किए जाते हैं। ये देखने और इस्तेमाल में सामान्य नोटों जैसे ही होते हैं, लेकिन टिकाऊपन के मामले में उनसे काफी आगे माने जाते हैं। इन नोटों पर पानी, धूल, नमी और रोजमर्रा के इस्तेमाल का असर बहुत कम पड़ता है। यही कारण है कि इनकी उम्र कागजी नोटों की तुलना में काफी अधिक होती है।
RBI इन्हें क्यों लाना चाहता है?
गौरतलब है कि RBI का कहना है कि पॉलीमर नोट लाने का उद्देश्य केवल नकली नोट रोकना नहीं है, बल्कि नोटों की गुणवत्ता बढ़ाना और उन्हें लंबे समय तक उपयोग योग्य बनाना भी है।
पॉलीमर नोटों के प्रमुख फायदे—
लंबे समय तक खराब नहीं होते।
पानी और नमी से सुरक्षित रहते हैं।
आसानी से फटते नहीं हैं।
एडवांस सुरक्षा फीचर्स जोड़ना आसान होता है।
बार-बार नोट छापने की जरूरत कम पड़ती है।
लंबे समय में छपाई और परिवहन पर खर्च घट सकता है।
क्या पुराने ₹10 और ₹20 के नोट बंद हो जाएंगे?
विदित है कि सरकार और RBI ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल पुराने कागजी नोट बंद नहीं किए जाएंगे। नई व्यवस्था में प्लास्टिक और कागजी दोनों प्रकार के नोट एक साथ चलेंगे। यदि ट्रायल सफल रहता है तो आगे धीरे-धीरे अन्य मूल्यवर्ग के नोटों पर भी विचार किया जा सकता है।
कब शुरू होगा ट्रायल?
फिलहाल ट्रायल की सटीक तारीख घोषित नहीं की गई है। हालांकि RBI की नोट प्रिंटिंग इकाई ने पॉलीमर सब्सट्रेट शीट की आपूर्ति के लिए वैश्विक स्तर पर टेंडर जारी किया है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और सामग्री उपलब्ध होने के बाद नोटों की छपाई शुरू होगी। इसके बाद इन्हें चुनिंदा क्षेत्रों में परीक्षण के लिए जारी किया जा सकता है।
दुनिया के कई देशों में पहले से चल रहे हैं प्लास्टिक नोट
ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला देश माना जाता है जिसने पॉलीमर नोटों को बड़े स्तर पर अपनाया। इसके बाद कनाडा, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, वियतनाम, थाईलैंड समेत 60 से अधिक देशों ने विभिन्न मूल्यवर्ग में प्लास्टिक नोट जारी किए हैं। इन देशों के अनुभव के आधार पर पॉलीमर नोटों को अधिक टिकाऊ और सुरक्षित माना जाता है।
पर्यावरण के लिए भी बेहतर माने जाते हैं
विशेषज्ञों के अनुसार पॉलीमर नोटों की उम्र अधिक होने के कारण इन्हें बार-बार छापने की जरूरत कम पड़ती है। इस्तेमाल के बाद इन्हें रीसाइकिल भी किया जा सकता है, जिससे पर्यावरण पर दबाव अपेक्षाकृत कम पड़ता है।
भारत में लगातार बढ़ रही है नकदी की मांग
RBI के आंकड़ों के अनुसार देश में चलन में मौजूद कुल करेंसी का मूल्य लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में लंबे समय तक चलने वाले नोट अपनाने से भविष्य में छपाई और रखरखाव की लागत कम करने में मदद मिल सकती है।
अब क्या होगा आगे?
फिलहाल सबसे पहले ₹10 और ₹20 के पॉलीमर नोटों का ट्रायल किया जाएगा। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो RBI भविष्य में अन्य मूल्यवर्ग के नोटों को भी पॉलीमर तकनीक में जारी करने पर विचार कर सकता है। हालांकि अभी सरकार ने किसी अन्य नोट के संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
आने वाले समय में यह ट्रायल भारत की करेंसी व्यवस्था में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। अब सबकी नजर RBI के अगले कदम और ट्रायल की शुरुआत पर टिकी है।