नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हुए सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) से जुड़े प्रदर्शन को लेकर जांच एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। मामले में विदेशी फंडिंग, संदिग्ध वित्तीय लेन-देन, सोशल मीडिया नेटवर्क और डिजिटल प्रचार अभियान सहित कई पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। शुरुआती जांच में कुछ कंपनियों और सोशल मीडिया से जुड़े नेटवर्क की भूमिका भी एजेंसियों के रडार पर बताई जा रही है।
चार बड़े शहरों में छापेमारी
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जांच के दौरान एजेंसियों ने पिछले कुछ दिनों में दिल्ली, गुरुग्राम, मुंबई और बेंगलुरु स्थित कई दफ्तरों और ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन, डिजिटल मार्केटिंग से जुड़े दस्तावेज, इंफ्लुएंसर्स के साथ हुए समझौते और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की गई। कई डिजिटल डिवाइस भी अपने कब्जे में लेकर उनकी फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी गई है।
विदेशी फंडिंग और पैसों के स्रोत की पड़ताल
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि प्रदर्शन और उससे जुड़े ऑनलाइन अभियानों के लिए धन कहां से आया और किन माध्यमों से खर्च किया गया। कुछ संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की जानकारी मिलने के बाद जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया है। यदि पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो संबंधित लोगों और संस्थाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
सोशल मीडिया नेटवर्क भी जांच के घेरे में
गौरतलब है कि जांच में यह भी देखा जा रहा है कि सोशल मीडिया पर प्रदर्शन से जुड़े कंटेंट किस तरह फैलाए गए। एजेंसियों ने बड़ी संख्या में संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान की है। इनमें कुछ अकाउंट विदेशों से संचालित होने और कई भारत से सक्रिय होने की बात सामने आई है। इन अकाउंट्स के डिजिटल रिकॉर्ड और गतिविधियों का विश्लेषण किया जा रहा है।
इंफ्लुएंसर्स और यूट्यूब चैनलों की भी जांच
जांच एजेंसियां कुछ सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स और यूट्यूब चैनलों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि कहीं किसी प्रकार के भुगतान या प्रचार अभियान के जरिए प्रदर्शन से जुड़ी सामग्री को बढ़ावा तो नहीं दिया गया। फिलहाल इस संबंध में जांच जारी है और एजेंसियां डिजिटल साक्ष्य एकत्र कर रही हैं।
जंतर-मंतर से जुड़ी साजिश का भी खुलासा
विदित है कि इसी बीच पश्चिम बंगाल एसटीएफ की जांच में गिरफ्तार जैश-ए-मोहम्मद के एक संदिग्ध आतंकी से जुड़ी जानकारी भी सामने आई है। जांच के अनुसार, उसने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस की वर्दी पहनकर तोड़फोड़ और अव्यवस्था फैलाने की कथित साजिश रची थी। सुरक्षा एजेंसियां इस मामले के हर पहलू की अलग से जांच कर रही हैं।
जांच जारी, सबूत मिलने पर होगी आगे की कार्रवाई
फिलहाल जांच एजेंसियां वित्तीय रिकॉर्ड, डिजिटल डेटा और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने और पर्याप्त सबूत मिलने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पूरे मामले पर विभिन्न एजेंसियां समन्वय के साथ काम कर रही हैं।