दिल्ली में आधार कार्ड की तरह ही बनेगा हर जमीन-मकान का 'प्रॉपर्टी कार्ड'!: हर प्रॉपर्टी को मिलेगी अब यूनिक डिजिटल ID; जमीन के फर्जीवाड़े, प्रॉपर्टी विवादों से लेकर लोन तक...आम लोगों को मिलेंगे ये 8 बड़े फायदे
दिल्ली में आधार कार्ड की तरह ही बनेगा हर जमीन-मकान का 'प्रॉपर्टी कार्ड'!

नई दिल्ली: दिल्ली में जमीन और मकानों से जुड़े रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राजधानी की हर प्रॉपर्टी को अब एक अलग और सुरक्षित डिजिटल पहचान देने की तैयारी है। इसके लिए दिल्ली सरकार जल्द 'दिल्ली लैंड रिकॉर्ड बिल-2026' लाने जा रही है। इस कानून के लागू होने के बाद राजधानी की हर जमीन, मकान, फ्लैट, दुकान और अन्य संपत्तियों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया जाएगा और प्रत्येक संपत्ति के लिए एक यूनिक 'प्रॉपर्टी आधार कार्ड' जारी किया जाएगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य वर्षों से चली आ रही जमीन के रिकॉर्ड संबंधी अव्यवस्था को खत्म करना, संपत्तियों की सही पहचान सुनिश्चित करना और भविष्य में होने वाले विवादों को कम करना है।

क्या है सरकार की नई योजना?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केंद्र सरकार की 'स्वामित्व योजना' के तहत दिल्ली के 30 ग्रामीण गांवों में ड्रोन तकनीक और सर्वे ऑफ इंडिया की मदद से सफल सर्वेक्षण किया जा चुका है। इन गांवों में तैयार किए गए स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए अब पूरी दिल्ली में इसी मॉडल को लागू करने की तैयारी की जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि राजधानी की कोई भी संपत्ति इस डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली से बाहर न रहे।

हर प्रॉपर्टी का होगा वैज्ञानिक सर्वे

प्रस्तावित कानून लागू होने के बाद आधुनिक तकनीक की सहायता से प्रत्येक संपत्ति का विस्तृत सर्वेक्षण किया जाएगा। इसमें केवल मकान ही नहीं, बल्कि फ्लैट, दुकान, व्यावसायिक भवन, प्लॉट और बहुमंजिला इमारतों के प्रत्येक फ्लोर का भी अलग रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसके बाद हर संपत्ति को एक विशिष्ट डिजिटल पहचान संख्या प्रदान की जाएगी, जिसे आम भाषा में 'प्रॉपर्टी आधार कार्ड' कहा जा रहा है।

क्या बोले मुख्यमंत्री?

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि जैसे आधार कार्ड प्रत्येक नागरिक की पहचान को प्रमाणिक बनाता है, उसी प्रकार अब दिल्ली की प्रत्येक संपत्ति को भी सुरक्षित और विश्वसनीय डिजिटल पहचान दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे राजधानी में भूमि रिकॉर्ड पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और तकनीकी रूप से सुरक्षित हो जाएंगे।

जल्द आ सकता है नया कानून

मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, दिल्ली लैंड रिकॉर्ड बिल-2026 को जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के लिए रखा जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर सरकार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर भी इस विधेयक को पारित करा सकती है।

आम लोगों को क्या-क्या फायदे मिलेंगे?

सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद लोगों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे।

  • जमीन और मकान के असली मालिक की पहचान करना आसान होगा।

  • प्रॉपर्टी खरीदने और बेचने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।

  • फर्जी दस्तावेज और धोखाधड़ी के मामलों में कमी आने की संभावना बढ़ेगी।

  • बैंक से होम लोन या अन्य ऋण लेने में आसानी होगी।

  • उत्तराधिकार (विरासत) से जुड़े मामलों का निपटारा सरल होगा।

  • भवन नक्शा पास कराने और सरकारी अनुमति लेने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

  • अदालतों में लंबित कई भूमि विवादों के समाधान में मदद मिल सकती है।

  • सरकारी रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में समानता आने से भविष्य के विवाद कम होंगे।

कैसे तैयार होगा डिजिटल रिकॉर्ड?

विदित है कि इस पूरी प्रक्रिया में आधुनिक सर्वेक्षण तकनीकों, ड्रोन मैपिंग और डिजिटल रिकॉर्ड सिस्टम का उपयोग किया जाएगा। सर्वेक्षण पूरा होने के बाद सभी जानकारी ऑनलाइन डिजिटल डेटाबेस में सुरक्षित रखी जाएगी। इससे भविष्य में किसी भी संपत्ति की जानकारी कुछ ही मिनटों में उपलब्ध हो सकेगी और रिकॉर्ड खोजने के लिए अलग-अलग सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की आवश्यकता काफी हद तक कम हो जाएगी।

फर्जीवाड़े पर भी लग सकती है रोक?

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्रॉपर्टी रिकॉर्ड लागू होने के बाद एक ही जमीन को कई लोगों को बेचने, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और मालिकाना हक को लेकर होने वाले विवादों पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा। साथ ही प्रशासन के लिए भी संपत्तियों का रिकॉर्ड अपडेट रखना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान होगा।

यदि यह कानून लागू होता है तो राजधानी में संपत्तियों के रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था पूरी तरह बदल सकती है। डिजिटल पहचान मिलने के बाद प्रत्येक संपत्ति का प्रमाणित रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा, जिससे नागरिकों के साथ-साथ सरकारी एजेंसियों, बैंकों और न्यायिक संस्थाओं को भी काफी सुविधा मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था आने वाले वर्षों में दिल्ली की भूमि और संपत्ति प्रबंधन प्रणाली को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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