देश के 83 शहरों को जाम से मुक्त करने की बड़ी तैयारी!: 2 लाख करोड़ रूपये से देश के 45 शहरों में बनेगा रिंग रोड, यूपी के अलीगढ़ समेत ये 3 शहर योजना में शामिल, वहीं दिल्ली...जानें सरकार का पूरा मेगा प्लान
देश के 83 शहरों को जाम से मुक्त करने की बड़ी तैयारी!

लखनऊ/प्रयागराज शहरों में बढ़ते ट्रैफिक और आए दिन लगने वाले जाम से परेशान वाहन चालकों के लिए बड़ी खबर है। केंद्र सरकार ने देश के पांच लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों को जाम से राहत दिलाने के लिए बड़े स्तर पर सड़क परियोजनाओं की तैयारी की है। इसके तहत कहीं रिंग रोड, कहीं बाईपास तो कहीं मौजूदा हाईवे को चौड़ा किया जाएगा। इस योजना में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज, वाराणसी और अलीगढ़ भी शामिल हैं। इन तीनों शहरों में ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर करने के लिए करीब 12,500 करोड़ रुपये की परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद इन परियोजनाओं के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।

देश के 83 शहरों को जाम से मुक्त करने की तैयारी

गौरतलब है कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने पांच लाख से अधिक आबादी वाले देश के 83 शहरों को ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए चिह्नित किया है। इन शहरों में जरूरत के हिसाब से रिंग रोड, बाईपास या हाईवे चौड़ीकरण जैसे काम कराए जाएंगे। मंत्रालय ने इन परियोजनाओं के लिए बड़े स्तर पर योजना तैयार की है। करीब 45 शहरों के लिए लगभग दो लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं तैयार होने की जानकारी है। इनमें कुछ शहरों में हाईवे से जुड़े काम पूरे हो चुके हैं, जबकि कई अन्य शहरों में रिंग रोड या बाईपास की परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है या उनकी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

प्रयागराज में दूसरे चरण की तैयारी, करीब ₹6,000 करोड़ खर्च

प्रयागराज के लिए प्रस्तावित परियोजना इस योजना का बड़ा हिस्सा है। शहर में रिंग रोड के पहले चरण का काम पहले ही शुरू हो चुका है। अब इसके दूसरे चरण को आगे बढ़ाने की तैयारी है। इस चरण में करीब 6,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। परियोजना पूरी होने के बाद शहर के बाहरी हिस्सों से गुजरने वाला यातायात शहर के अंदर आने के बजाय रिंग रोड के रास्ते अपने गंतव्य तक पहुंच सकेगा। इससे खासकर भारी वाहनों और लंबी दूरी के यातायात का दबाव शहर की मुख्य सड़कों पर कम होने की उम्मीद है।

वाराणसी में ₹5,000 करोड़ की रिंग रोड योजना

विदित है कि धार्मिक और पर्यटन नगरी वाराणसी में भी ट्रैफिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। शहर में देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में वाहन पहुंचते हैं। स्थानीय यातायात के साथ बाहरी वाहनों की आवाजाही भी कई प्रमुख मार्गों पर दबाव बढ़ाती है। इसी को देखते हुए वाराणसी के लिए करीब 5,000 करोड़ रुपये की रिंग रोड परियोजना का प्रस्ताव तैयार किया गया है। रिंग रोड का उद्देश्य शहर के अंदर से गुजरने वाले बाहरी यातायात को वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराना है। परियोजना आगे बढ़ने पर वाराणसी के प्रमुख मार्गों पर जाम की समस्या कम होने की उम्मीद है।

अलीगढ़ में ₹1,450 करोड़ की सड़क परियोजना

अलीगढ़ को भी इस योजना में शामिल किया गया है। यहां करीब 1,450 करोड़ रुपये की लागत से अलीगढ़-मुरादाबाद मार्ग और अलीगढ़ रिंग रोड से जुड़ी परियोजनाओं की योजना है। इसका मकसद शहर में आने-जाने वाले वाहनों को बेहतर वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराना और प्रमुख सड़कों पर बढ़ते यातायात दबाव को कम करना है।

मंजूरी के बाद शुरू होगी टेंडर प्रक्रिया

फिलहाल इन परियोजनाओं के लिए आगे की प्रक्रिया केंद्र की मंजूरी पर निर्भर है। चालू वित्त वर्ष में कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद संबंधित परियोजनाओं के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इसके बाद निर्माण एजेंसी का चयन और जमीन समेत अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने पर काम को जमीन पर उतारने की दिशा में कदम बढ़ेंगे।

सिर्फ यूपी नहीं, दिल्ली जैसे कई बड़े शहरों में भी बड़े प्रोजेक्ट

जाम से राहत की इस योजना का दायरा केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। देश के कई अन्य बड़े शहरों के लिए भी रिंग रोड, बाईपास और सड़क चौड़ीकरण की परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इनमें देहरादून रिंग रोड-ईस्टर्न बाईपास के लिए करीब 1,715 करोड़ रुपये की परियोजना और चंडीगढ़ में प्रमुख जंक्शनों से जुड़ी सड़क परियोजनाएं भी शामिल हैं। दिल्ली के लिए भी कई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिन पर 16,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है।

जाम से राहत के साथ बदल सकती है शहरों की ट्रैफिक तस्वीर

रिंग रोड और बाईपास बनने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि लंबी दूरी के वाहनों को शहर के भीतरी हिस्सों से गुजरने की जरूरत कम पड़ती है। खासकर ट्रक और दूसरे भारी वाहन अगर शहर के बाहर से निकल सकें तो मुख्य बाजारों और शहर की प्रमुख सड़कों पर वाहनों का दबाव कम किया जा सकता है। प्रयागराज, वाराणसी और अलीगढ़ जैसे तेजी से बढ़ते शहरों में आने वाले वर्षों में वाहनों की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए इन परियोजनाओं को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इन योजनाओं का वास्तविक फायदा निर्माण पूरा होने और सड़क नेटवर्क के प्रभावी संचालन के बाद ही पूरी तरह सामने आएगा। अभी सबसे अहम पड़ाव केंद्र सरकार से मंजूरी और उसके बाद शुरू होने वाली टेंडर प्रक्रिया है।

यानी आने वाले समय में यूपी के प्रयागराज, वाराणसी और अलीगढ़ की ट्रैफिक तस्वीर बदलने की तैयारी है। करीब 12,500 करोड़ रुपये की इन परियोजनाओं के जमीन पर उतरने के बाद शहरों के भीतर वाहनों का दबाव घटाने और जाम से राहत दिलाने की उम्मीद है।

अन्य खबरे