देहरादून : पहाड़ों का राज्य अब सिर्फ पर्यटन और तीर्थ नहीं, बल्कि ग्रीन पावर हब के रूप में भी तेजी से उभर रहा है। उत्तराखंड ने सौर ऊर्जा उत्पादन में 1 गीगावाट का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक राज्य की कुल स्थापित सौर क्षमता 1027.87 मेगावाट से अधिक हो चुकी है। यानी अब हिमालय की धूप बिजली बनकर घर-घर पहुंच रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे “नई पहचान” बताते हुए कहा कि राज्य ने हरित ऊर्जा को जनआंदोलन बना दिया है और आने वाले वर्षों में उत्तराखंड देश के अग्रणी सौर राज्यों में शामिल होगा।
कैसे हासिल हुई यह बड़ी उपलब्धि?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह सफलता किसी एक परियोजना से नहीं, बल्कि कई योजनाओं के संयुक्त असर से मिली है। अलग-अलग मॉडल अपनाकर गांव से शहर तक सौर ऊर्जा पहुंचाई गई।
प्रमुख परियोजनाओं का योगदान :
●ग्राउंड माउंटेड सोलर प्लांट – 397 मेगावाट
●रूफटॉप सोलर (PM सूर्यघर योजना) – 241 मेगावाट
●मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना – 137 मेगावाट
●कॉमर्शियल नेट मीटरिंग – 110 मेगावाट
●कैप्टिव सोलर पावर प्लांट – 51 मेगावाट
●कनाल टॉप/कनाल बैंक प्रोजेक्ट – 37 मेगावाट
●सरकारी भवनों पर सोलर संयंत्र – 26 मेगावाट
सरकार का दावा है कि अभी भी 100 मेगावाट से अधिक नई परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।
सिर्फ बिजली नहीं; रोजगार भी :
गौरतलब है कि सौर ऊर्जा ने पहाड़ों में एक नई अर्थव्यवस्था खड़ी कर दी है। हजारों युवाओं को इंस्टॉलेशन, मेंटेनेंस और सप्लाई चेन में काम मिला। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार बढ़ा। और किसानों के लिए सोलर पंप और छोटे प्लांट आय का साधन बने साथ ही बिजली बिल में कमी से घरेलू खर्च घटा है। यानी यह परियोजना केवल पर्यावरण नहीं, जेब पर भी असर डाल रही है।
पर्यावरण को मिला बड़ा फायदा :
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पर्यावरण को इससे निम्नलिखित फायदा हुआ है।
●कार्बन उत्सर्जन में कमी
●डीजल जनरेटर पर निर्भरता कम
●दूरस्थ गांवों में पहली बार भरोसेमंद बिजली
●ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि पर्वतीय राज्यों में सौर ऊर्जा भविष्य की सबसे सुरक्षित ऊर्जा है।
UREDA की रही अहम भूमिका :
विदित है कि उत्तराखंड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (UREDA) ने तकनीकी मार्गदर्शन, जागरूकता और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में मुख्य भूमिका निभाई। खासतौर पर दुर्गम इलाकों तक सोलर समाधान पहुंचाना बड़ी चुनौती थी, जिसे एजेंसी ने संभव बनाया।
आगे क्या?
गौरतलब है कि सरकार का लक्ष्य अब सिर्फ 1 गीगावाट पर रुकना नहीं है। सरकार की योजना हर गांव में सोलर समाधान, सरकारी भवनों को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाना, निजी निवेश आकर्षित करना सहित पहाड़ों को ग्रीन एनर्जी मॉडल स्टेट बनाना भी है।
उत्तराखंड ने साबित कर दिया है कि सीमित संसाधनों वाला पहाड़ी राज्य भी ऊर्जा क्षेत्र में क्रांति ला सकता है। यह उपलब्धि सिर्फ बिजली उत्पादन नहीं, बल्कि विकास के नए मॉडल की शुरुआत मानी जा रही है। जहां पर्यावरण भी बचेगा और रोजगार भी बढ़ेगा।