पार्किंग, PRT और रोपवे से बदलने जा रही उत्तराखंड की यातायात व्यवस्था!: देहरादून में 31.5 किमी का कॉरिडोर, ऋषिकेश में रोपवे तो वहीं हरिद्वार में...जानें आम जनता को क्या मिलेंगी सुविधाएँ_एक नजर
पार्किंग, PRT और रोपवे से बदलने जा रही उत्तराखंड की यातायात व्यवस्था!

देहरादून : उत्तराखंड के शहरों में बढ़ते जाम, तीर्थ सीजन की भीड़ और पर्यटन के दबाव से परेशान लोगों के लिए राहत की बड़ी खबर है। राज्य सरकार ने ट्रैफिक व्यवस्था को पूरी तरह बदलने का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। अब सड़कें ही नहीं, आसमान और अलग ट्रैक भी ट्रैफिक संभालेंगे। इलेक्ट्रिक बस कॉरिडोर, पर्सनल रैपिड ट्रांजिट (PRT), रोपवे और मेगा पार्किंग सिस्टम एक साथ लागू करने की तैयारी है। सरकार का दावा है कि योजना पूरी होते ही देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश में यातायात का नक्शा बदल जाएगा।

देहरादून में 31.52 KM का इलेक्ट्रिक मेगा कॉरिडोर :

आपको बता दें कि राजधानी देहरादून में सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। यहाँ ई-BRTS (Electric Bus Rapid Transit System) चालू किया जाएगा।

रूट: ISBT से रायपुर
लंबाई: 31.52 किमी
कुल स्टेशन: 35

यह बसें सामान्य ट्रैफिक में नहीं चलेंगी, बल्कि अलग कॉरिडोर में तेज़ी से चलेंगी। ठीक मेट्रो जैसी सुविधा, लेकिन सड़क पर। अधिकारियों ने ISBT से मसूरी डायवर्जन तक 17 स्टेशनों का निरीक्षण भी कर लिया है।

सबसे पहले पार्किंग; जाम की जड़ पर वार :

गौरतलब है कि उत्तराखंड में जाम की सबसे बड़ी वजह अव्यवस्थित पार्किंग को माना गया है। इसलिए शुरुआत पार्किंग से की जा रही है। इसके लिये 11 नई पार्किंग साइट्स तैयार की गई है। जिसमें 1082 वाहन खड़े करने की क्षमता होगी। 195 प्रस्तावों में से प्राथमिक प्रोजेक्ट चुने गए। सभी विकास प्राधिकरणों को युद्धस्तर पर काम का आदेश दिया गया है। सरकार का साफ मानना है कि जब तक गाड़ियां सड़क पर खड़ी रहेंगी, ट्रैफिक नहीं सुधरेगा।

ऋषिकेश में रोपवे; सड़क नहीं, अब हवा में यात्रा :

विदित है कि तीर्थ यात्रियों के लिए सबसे बड़ी राहत ऋषिकेश में मिलेगी। यहाँ त्रिवेणी घाट से नीलकंठ मंदिर रोपवे शुरू किया जाएगा। फॉरेस्ट क्लियरेंस प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है। इससे पहाड़ी जाम कम होगा। यात्रा समय कई गुना घटेगा जिससे सरकार निजी निवेश आकर्षित करने के लिए कंसेशन पीरियड बढ़ाने पर भी विचार कर रही है।

हरिद्वार में PRT; छोटी मेट्रो जैसी सुविधा :

विदित है कि हरिद्वार में तीर्थ सीजन के जाम से निपटने के लिए अलग तकनीक लाई जा रही है। इस सिस्टम को PRT (Personal Rapid Transit) सिस्टम कहा जायेगा। इसकी कुल लंबाई 20.73 किमी होगी। इसमें 4 कॉरिडोर और 21 स्टेशन होंगे।

रूट :

  1. सीतापुर से भारत माता मंदिर

  2. सिटी अस्पताल से दक्ष मंदिर

  3. लालतारा चौक से भूपतवाला

  4. गणेशपुरम से DAV स्कूल

यह छोटे ऑटोमेटेड कैप्सूल जैसे वाहन होंगे। इससे कम भीड़ और तेज सफर होंगे।

देहरादून में भी चलेगा PRT :

राजधानी में तीन नए PRT कॉरिडोर प्रस्तावित है।

●क्लेमेंटटाउन से बल्लूपुर चौक
●पंडितवाड़ी से रेलवे स्टेशन
●गांधी पार्क से ISBT

इसे Transit Oriented Development मॉडल से जोड़ा जाएगा यानी ट्रांसपोर्ट के हिसाब से शहर का विस्तार होगा।

पार्किंग पॉलिसी से जोड़ा गया पूरा प्लान :

गौरतलब है कि सभी परियोजनाओं को उत्तराखंड कार पार्किंग पॉलिसी-2022 के अनुसार डिजाइन किया जाएगा, ताकि भविष्य में सिस्टम फेल न हो।

सरकार का लक्ष्य :

विदित है कि सरकार चाहती है कि राज्य का ट्रांसपोर्ट सिस्टम आधुनिक, सुरक्षित, पर्यावरण अनुकूल व तीर्थ और पर्यटन के लिए सुविधाजनक बने।

यदि ये प्रोजेक्ट समय पर पूरे हुए तो विशेषज्ञों के मुताबिक देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश में जाम की समस्या इतिहास बन सकती है। उत्तराखंड अब सिर्फ धार्मिक और पर्यटन राज्य ही नहीं रहेगा बल्कि स्मार्ट ट्रांसपोर्ट मॉडल वाला पहाड़ी राज्य बनने की तैयारी कर चुका है।

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