मेसी का सपना टूटा, स्पेन ने रचा इतिहास!: फाइनल में अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर 16 साल बाद जीता वर्ल्डकप, वहीं मात्र 20 साल के खिलाड़ी ने मेसी को...जानें FIFA में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए किस खिलाड़ी को गोल्डन बूट से किया गया सम्मानित
मेसी का सपना टूटा, स्पेन ने रचा इतिहास!

न्यू जर्सी: फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर स्पेन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। रोमांच से भरपूर फाइनल मुकाबला निर्धारित 90 मिनट तक गोलरहित रहा, लेकिन एक्स्ट्रा टाइम में आए एक गोल ने पूरी बाजी पलट दी। स्पेन के लिए मैच का एकमात्र और निर्णायक गोल फेरान टोरेस ने 106वें मिनट में दागा, जिसके साथ ही टीम ने 16 साल बाद विश्व खिताब अपने नाम कर लिया।

90 मिनट तक चली कांटे की टक्कर

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मुकाबले की शुरुआत से ही स्पेन ने गेंद पर बेहतर नियंत्रण बनाए रखा और लगातार अर्जेंटीना के गोल पर दबाव बनाया। दूसरी ओर अर्जेंटीना ने मजबूत रक्षापंक्ति और अपने गोलकीपर के दम पर मुकाबले को बराबरी पर बनाए रखा। निर्धारित समय तक दोनों टीमों में कोई भी गोल नहीं हो सका और मैच एक्स्ट्रा टाइम में पहुंच गया।

मार्टिनेज ने लंबे समय तक बचाई अर्जेंटीना की उम्मीद

गौरतलब है कि अर्जेंटीना के गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज ने पूरे मैच में कई शानदार बचाव किए। स्पेन के कई खतरनाक हमलों को उन्होंने नाकाम कर दिया। कई मौकों पर ऐसा लगा कि स्पेन गोल कर देगा, लेकिन मार्टिनेज लगातार दीवार बनकर खड़े रहे। हालांकि लगातार दबाव के आगे आखिरकार अर्जेंटीना की रक्षा टूट गई।

एंजो फर्नांडीज का रेड कार्ड बना बड़ा मोड़

विदित है कि मुकाबले का सबसे अहम मोड़ तब आया जब अर्जेंटीना के एंजो फर्नांडीज को दूसरा येलो कार्ड मिलने के बाद रेड कार्ड दिखाया गया। इसके बाद अर्जेंटीना 10 खिलाड़ियों के साथ खेलने को मजबूर हो गया। एक खिलाड़ी कम होने का फायदा स्पेन ने पूरी तरह उठाया और गेंद पर अपना नियंत्रण और मजबूत कर लिया।

फेरान टोरेस ने लिखी जीत की कहानी

एक खिलाड़ी की बढ़त मिलने के बाद स्पेन ने लगातार हमले तेज कर दिए। 106वें मिनट में बाएं फ्लैंक से आए शानदार मूव के बाद गेंद फेरान टोरेस तक पहुंची। उन्होंने बिना देर किए दमदार शॉट लगाया और गेंद सीधे गोलपोस्ट के भीतर पहुंच गई। यही गोल अंत में मैच का फैसला साबित हुआ।

20 वर्षीय खिलाड़ी ने 39 साल के मेसी का तोड़ा सपना

आपको बता दें कि इस मैच में एक तरफ 39 साल के मेसी थे तो वहीं दूसरी तरफ मात्र 20 साल के लामिन यमाल थे। यामिल ने लगातार अर्जेन्टीना के डिफेन्स पर हमला करके मेसी का लगातार 2 वर्ल्डकप जीतने का सपना पूरा नहीं करने दिया।

युवा खिलाड़ियों ने दिखाया दम

पूरे मुकाबले में स्पेन के युवा खिलाड़ियों ने शानदार खेल दिखाया। टीम ने मिडफील्ड से लेकर अटैक तक बेहतरीन तालमेल का प्रदर्शन किया। दूसरी ओर अर्जेंटीना के अनुभवी खिलाड़ियों को स्पेन की मजबूत रणनीति के सामने खुलकर खेलने का मौका नहीं मिला।

गेंद पर स्पेन का रहा पूरा नियंत्रण

स्पेन ने अपनी पारंपरिक शैली के अनुसार पूरे मैच में गेंद पर अच्छा नियंत्रण बनाए रखा। टीम ने लगातार छोटे-छोटे पास और तेज मूवमेंट के जरिए अर्जेंटीना की रक्षापंक्ति पर दबाव बनाए रखा। वहीं अर्जेंटीना को जवाबी हमलों के बहुत कम अवसर मिले।

ट्रॉफी जीतते ही जश्न में डूबा स्पेन

अंतिम सीटी बजते ही स्पेन के खिलाड़ी मैदान पर खुशी से झूम उठे। खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ ने एक-दूसरे को गले लगाकर ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाया। दूसरी ओर अर्जेंटीना के खिलाड़ियों के चेहरे पर हार की निराशा साफ दिखाई दी। मैच समाप्त होने के बाद कुछ देर के लिए दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच हल्की नोकझोंक भी देखने को मिली, जिसे जल्द ही शांत करा दिया गया।

स्पेन का शानदार अभियान

स्पेन ने पूरे टूर्नामेंट में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन किया। शुरुआती मुकाबले के बाद टीम ने एक के बाद एक मजबूत प्रतिद्वंद्वियों को हराते हुए फाइनल तक का सफर तय किया। फाइनल में भी टीम ने धैर्य, अनुशासन और आक्रामक खेल का शानदार मिश्रण पेश करते हुए विश्व खिताब अपने नाम कर लिया।

गोल्डन बूट समेत इन खिलाड़ियों ने भी बटोरी सुर्खियां

गौरतलब है कि टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को व्यक्तिगत पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया। फ्रांस के किलियन एम्बाप्पे ने पूरे टूर्नामेंट में सबसे अधिक 10 गोल दागकर गोल्डन बूट अपने नाम किया। वहीं लियोनेल मेसी ने 8 गोल और 4 असिस्ट के साथ शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल स्कोररों की सूची में दूसरा स्थान हासिल किया। पूरे टूर्नामेंट में इन दोनों खिलाड़ियों का प्रदर्शन फुटबॉल प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।

इतिहास में दर्ज हुई यादगार जीत

विशेषज्ञों का मानना है कि यह जीत स्पेनिश फुटबॉल के लिए लंबे समय तक याद रखी जाएगी। पूरे टूर्नामेंट में टीम ने जिस संतुलित खेल और सामूहिक प्रदर्शन का परिचय दिया, उसी का परिणाम फाइनल में ऐतिहासिक जीत के रूप में सामने आया।

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