उत्तराखंड में 1 सितंबर से खेल महाकुंभ का आगाज!: गांव से लेकर राज्य स्तर तक होगा खिलाड़ियों का चयन, 60 दिन तक चलेगी प्रतियोगिता, वहीं महिलाओं को...पूरा शेड्यूल_एक नज़र
उत्तराखंड में 1 सितंबर से खेल महाकुंभ का आगाज!

देहरादून: उत्तराखंड में खेल प्रतिभाओं को बड़ा मंच देने की तैयारी तेज हो गई है। प्रदेश में खेल महाकुंभ-2026 मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी का आयोजन 1 सितंबर से शुरू होने जा रहा है। करीब दो महीने तक चलने वाले इस आयोजन में गांव और न्याय पंचायत स्तर से खिलाड़ियों को चुनकर उन्हें विधानसभा, संसदीय क्षेत्र और फिर राज्य स्तर तक पहुंचने का मौका मिलेगा। युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग ने खेल महाकुंभ की विस्तृत कार्ययोजना जारी कर दी है। प्रतियोगिताओं का आयोजन 1 सितंबर से 30 अक्टूबर 2026 तक किया जाएगा। सरकार का जोर खास तौर पर ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को सामने लाने पर है।

गांव से शुरू होगी खिलाड़ियों की असली परीक्षा

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि खेल महाकुंभ की शुरुआत न्याय पंचायत स्तर की प्रतियोगिताओं से होगी। यहां 1 से 10 सितंबर तक स्थानीय जनप्रतिनिधि खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इस स्तर पर अंडर-14 और अंडर-19 बालक एवं बालिका वर्ग में कबड्डी, एथलेटिक्स, खो-खो और मुर्गा झपट जैसी प्रतियोगिताएं होंगी। इन मुकाबलों में अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को आगे की प्रतियोगिताओं के लिए चुना जाएगा। यानी किसी छोटे गांव में खेल रहा प्रतिभाशाली खिलाड़ी भी अपने प्रदर्शन के दम पर अगले स्तर तक पहुंच सकता है।

फिर विधानसभा और संसदीय क्षेत्र में मुकाबला

गौरतलब है कि न्याय पंचायत स्तर के बाद 11 से 20 सितंबर तक विधानसभा क्षेत्र स्तर पर विधायक चैंपियनशिप ट्रॉफी प्रतियोगिताएं होंगी। यहां कुछ खेल सीधे आयोजित होंगे, जबकि कई प्रतियोगिताओं में न्याय पंचायत से चुने गए खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। इसके बाद 21 से 30 सितंबर तक संसदीय क्षेत्र स्तर पर सांसद चैंपियनशिप ट्रॉफी प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इस स्तर पर मलखंभ, रस्साकसी, गोली यानी कंचा, फुटबॉल और बैडमिंटन जैसे खेल शामिल किए गए हैं। विधानसभा स्तर से चयनित खिलाड़ियों को भी यहां आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।

राज्य स्तर पर 18 से ज्यादा खेलों में दम दिखाएंगे खिलाड़ी

विदित है कि खेल महाकुंभ का सबसे बड़ा मंच राज्य स्तर होगा। मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी के तहत 10 सितंबर से 30 अक्टूबर तक अलग-अलग खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। राज्य स्तर पर जूडो, बॉक्सिंग, टेबल टेनिस, ताइक्वांडो, कराटे, बास्केटबॉल, हॉकी, हैंडबॉल, योगासन और तैराकी के मुकाबले होंगे। इसके अलावा तीरंदाजी, फेंसिंग, कुश्ती, पेंचक सिलाट, पावरलिफ्टिंग, वेटलिफ्टिंग, बेसबॉल और लॉन टेनिस को भी शामिल किया गया है। कुछ प्रतियोगिताओं में खिलाड़ी सीधे राज्य स्तर पर हिस्सा लेंगे, जबकि कई खेलों के लिए पहले के स्तरों से चयन जरूरी होगा।

महिलाओं और दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए भी मौका

इस बार खेल महाकुंभ का दायरा सिर्फ बालक-बालिका आयु वर्ग तक सीमित नहीं रखा गया है। महिला ओपन वर्ग के साथ दिव्यांगजन महिला और पुरुष ओपन वर्ग के लिए भी विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इससे अलग-अलग आयु और वर्ग के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा।

सरकार का लक्ष्य गांवों की प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि खेल महाकुंभ का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना और ग्रामीण तथा दूरस्थ क्षेत्रों के खिलाड़ियों को बेहतर मंच उपलब्ध कराना है। सरकार की कोशिश है कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे चलकर राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने का अवसर मिले। युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल की निदेशक दीप्ति सिंह ने आयोजन की विस्तृत कार्ययोजना जारी की है और संबंधित विभागों से प्रतियोगिताओं के सफल आयोजन में सहयोग की अपेक्षा की है।

60 दिनों तक चलेगा खेलों का रोमांच

करीब 60 दिनों तक चलने वाला खेल महाकुंभ सिर्फ प्रतियोगिताओं का आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड के खिलाड़ियों के लिए प्रतिभा तलाशने का एक बड़ा अभियान भी बन सकता है। गांव की चौपाल और न्याय पंचायत से शुरू होने वाला यह सफर खिलाड़ियों को विधानसभा, संसदीय क्षेत्र और राज्य स्तर तक ले जाएगा।

अगर किसी खिलाड़ी में प्रतिभा और मेहनत है, तो इस बार उसे आगे बढ़ने के लिए मंच उसके अपने क्षेत्र से ही मिल सकता है। यही खेल महाकुंभ-2026 की सबसे बड़ी खासियत मानी जा रही है।

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