45 के हुए 'कैप्टन कूल' M.S. धोनी!: कभी रेलवे में करते थे TTE की नौकरी, फुटबॉलर बनने का था सपना, वहीं मात्र 24 साल में...जानें कैसा रहा टिकट कलेक्टर से लेकर भारत के सबसे सफल कप्तान बनने तक का यादगार सफर_एक नजर
45 के हुए 'कैप्टन कूल' M.S. धोनी!

खेल: भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानों में गिने जाने वाले महेंद्र सिंह धोनी आज अपना 45वां जन्मदिन मना रहे हैं। 7 जुलाई 1981 को झारखंड के रांची में जन्मे धोनी ने अपनी मेहनत, धैर्य और शानदार नेतृत्व के दम पर भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। एक साधारण परिवार से निकलकर रेलवे में टिकट कलेक्टर (TTE) की नौकरी करने वाले धोनी आज दुनिया के सबसे सफल क्रिकेट कप्तानों में शामिल हैं। उनका सफर लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है।

फुटबॉल के गोलकीपर से बने विकेटकीपर

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बहुत कम लोग जानते हैं कि स्कूल के दिनों में धोनी क्रिकेटर नहीं बल्कि फुटबॉल खिलाड़ी बनना चाहते थे। वह स्कूल टीम में गोलकीपर थे। उनके खेल से प्रभावित होकर कोच ने उन्हें क्रिकेट में विकेटकीपिंग करने की सलाह दी। यही फैसला उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ और यहीं से क्रिकेट का सफर शुरू हुआ।

रेलवे में TTE की नौकरी भी की

गौरतलब है कि घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद धोनी को शुरुआती दिनों में आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने भारतीय रेलवे में ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर (TTE) के रूप में नौकरी की। नौकरी के साथ-साथ उन्होंने क्रिकेट खेलना जारी रखा और कभी अपने सपने को नहीं छोड़ा।

2004 में भारत के लिए किया डेब्यू

साल 2004 में 23 साल में धोनी ने बांग्लादेश के खिलाफ भारत के लिए वनडे क्रिकेट में पदार्पण किया। पहला मैच खास नहीं रहा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 2005 में मात्र 24 साल में पाकिस्तान के खिलाफ 148 रन और श्रीलंका के खिलाफ नाबाद 183 रन की विस्फोटक पारी खेलकर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इसके बाद धोनी भारतीय टीम के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में शामिल हो गए।

2007 में बने 'कैप्टन कूल'

विदित है कि साल 2007 भारतीय क्रिकेट के इतिहास का सबसे यादगार साल रहा। युवा टीम की कप्तानी धोनी को सौंपी गई। किसी को उम्मीद नहीं थी कि अनुभवहीन टीम विश्व विजेता बनेगी, लेकिन धोनी ने अपनी शांत सोच और बेहतरीन रणनीति से भारत को पहला टी-20 विश्व कप जिताया। इसके बाद उन्हें दुनिया ने 'कैप्टन कूल' के नाम से पहचानना शुरू कर दिया।

2011 का विजयी छक्का आज भी यादगार

धोनी के करियर का सबसे यादगार पल 2 अप्रैल 2011 को आया, जब उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ विश्व कप फाइनल में नाबाद 91 रन बनाए और विजयी छक्का लगाकर भारत को 28 साल बाद वनडे विश्व कप का चैंपियन बनाया। यह छक्का आज भी भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे यादगार पलों में गिना जाता है।

ICC की तीनों बड़ी ट्रॉफियां जीतने वाले इकलौते कप्तान

धोनी की कप्तानी में भारत ने 2007 टी-20 विश्व कप, 2011 वनडे विश्व कप और 2013 चैंपियंस ट्रॉफी जीती। वह आज भी दुनिया के इकलौते कप्तान हैं जिन्होंने ICC की तीनों बड़ी ट्रॉफियां अपने नाम की हैं। उनकी कप्तानी में भारत पहली बार टेस्ट रैंकिंग में नंबर-1 भी बना।

रिकॉर्ड से भरा रहा अंतरराष्ट्रीय करियर

आपको बता दें कि महेंद्र सिंह धोनी ने भारत के लिए 90 टेस्ट, 350 वनडे और 98 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। उनके नाम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 17 हजार से अधिक रन दर्ज हैं। विकेटकीपर के रूप में उन्होंने 800 से ज्यादा खिलाड़ियों को आउट किया। दबाव में शांत रहकर मैच खत्म करने की उनकी क्षमता उन्हें दुनिया के महान फिनिशरों में शामिल करती है।

IPL में भी कायम रखा दबदबा

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में चेन्नई सुपर किंग्स की कप्तानी करते हुए धोनी ने टीम को पांच बार चैंपियन बनाया। चेन्नई के प्रशंसक उन्हें प्यार से 'थाला' कहते हैं। आज भी जब धोनी मैदान पर उतरते हैं तो स्टेडियम में सबसे ज्यादा शोर उन्हीं के लिए सुनाई देता है।

देश के सर्वोच्च खेल सम्मानों से सम्मानित

भारतीय क्रिकेट में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और देश के सर्वोच्च खेल सम्मान मेजर ध्यानचंद खेल रत्न (पूर्व में राजीव गांधी खेल रत्न) से सम्मानित किया जा चुका है।

2020 में लिया संन्यास, लेकिन लोकप्रियता बरकरार

15 अगस्त 2020 को महेंद्र सिंह धोनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी थी। हालांकि उन्होंने मैदान छोड़ा, लेकिन करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में उनकी लोकप्रियता आज भी पहले जैसी ही कायम है।

महेंद्र सिंह धोनी की कहानी यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो एक साधारण परिवार का युवक भी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के दम पर दुनिया के सबसे सफल खिलाड़ियों में अपनी जगह बना सकता है।

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