नई दिल्ली: भारत सरकार ने देश के करोड़ों मोबाइल और इंटरनेट यूजर्स की प्राइवेसी और साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने टेलीकॉम कंपनियों के लिए नए नियम जारी किए हैं। अब कंपनियों को भारतीय ग्राहकों का कॉल रिकॉर्ड, इंटरनेट इस्तेमाल, सिस्टम लॉग और अन्य संवेदनशील डेटा देश के भीतर ही स्टोर करना होगा। किसी भी स्थिति में यह डेटा विदेश नहीं भेजा जा सकेगा। सरकार का कहना है कि इस फैसले से न केवल नागरिकों की निजी जानकारी अधिक सुरक्षित होगी, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही टेलीकॉम सेक्टर में दशकों से चली आ रही जटिल लाइसेंस व्यवस्था को भी आसान बना दिया गया है।
डेटा अब भारत में ही रहेगा सुरक्षित
आपको बता दें कि नए नियमों के अनुसार सभी टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं को भारतीय उपभोक्ताओं का पूरा डेटा भारत में स्थित डेटा सेंटरों में ही सुरक्षित रखना होगा। इसमें कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), इंटरनेट उपयोग से जुड़े लॉग, नेटवर्क रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी जानकारी शामिल होगी। सरकार का मानना है कि डेटा लोकलाइजेशन से साइबर हमलों, डेटा चोरी और सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच पहले की तुलना में अधिक तेज और प्रभावी तरीके से की जा सकेगी।
लाइसेंस राज खत्म, अब ऑनलाइन मिलेगा ऑथराइजेशन
गौरतलब है कि सरकार ने टेलीकॉम सेक्टर में वर्षों से चली आ रही जटिल लाइसेंस प्रक्रिया को समाप्त कर नया ऑथराइजेशन सिस्टम लागू किया है। इसके लिए टेलीकॉम ई-सर्विसेज पोर्टल भी शुरू किया गया है। अब कंपनियों को मोबाइल, इंटरनेट या अन्य दूरसंचार सेवाएं शुरू करने के लिए लंबी कागजी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। पूरा आवेदन और मंजूरी का काम ऑनलाइन होगा। इससे नई कंपनियों के लिए बाजार में प्रवेश आसान होगा और सेवाएं शुरू होने में लगने वाला समय भी काफी कम हो जाएगा।
पुरानी कंपनियों को भी मिलेगी राहत
विदित है कि सरकार ने पहले से लाइसेंस लेकर काम कर रही टेलीकॉम कंपनियों को भी नए सिस्टम में शामिल होने का विकल्प दिया है। इससे उन्हें अलग-अलग लाइसेंस और कागजी प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी और पूरा सिस्टम अधिक पारदर्शी बनेगा।
क्या ग्राहकों को मिलेंगे सस्ते प्लान?
नए नियमों के तहत कंपनियां अब एक ही डिजिटल पोर्टल के जरिए नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं के लिए आवेदन कर सकेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कंपनियों की प्रशासनिक लागत कम होगी। प्रतिस्पर्धा बढ़ने पर ग्राहकों को भविष्य में बेहतर नेटवर्क, तेज इंटरनेट और अपेक्षाकृत किफायती प्लान मिलने की संभावना भी बढ़ सकती है।
सैटेलाइट इंटरनेट कंपनियों के लिए भी सख्त नियम
सरकार ने भविष्य में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं देने वाली कंपनियों के लिए भी स्पष्ट नियम तय किए हैं। यदि कोई कंपनी भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा देगी, तो उसका मुख्य गेटवे स्टेशन भारत में ही स्थापित करना होगा। इससे भारतीय नागरिकों का डेटा देश के भीतर सुरक्षित रहेगा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जोखिम कम होंगे।
प्राइवेसी और साइबर सुरक्षा होगी मजबूत
आज के डिजिटल दौर में डेटा सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता बन चुकी है। नए नियमों के बाद भारतीय यूजर्स का व्यक्तिगत डेटा विदेशों में स्टोर नहीं किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे लोगों की प्राइवेसी मजबूत होगी और साइबर सुरक्षा से जुड़े जोखिम भी कम होंगे।
संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा पर विशेष नजर
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर, उत्तर-पूर्व और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में नेटवर्क स्थापित करने के लिए कंपनियों को अतिरिक्त सुरक्षा मंजूरी लेनी होगी। इसके अलावा संदिग्ध गतिविधियों, साइबर अपराध, फर्जी कॉल और देश विरोधी संदेशों पर नजर रखने के लिए भी कंपनियों को जरूरी तकनीकी व्यवस्था विकसित करनी होगी।
डेटा सेंटर उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा भारत में स्टोर होने से देश में नए डेटा सेंटर स्थापित होंगे। इससे बड़े पैमाने पर निवेश बढ़ सकता है, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से अधिक मजबूत होगा। हालांकि शुरुआती दौर में कंपनियों को अपने सर्वर और डेटा स्टोरेज सिस्टम में बदलाव के लिए अतिरिक्त निवेश करना पड़ सकता है, लेकिन लंबे समय में इससे देश का डिजिटल इकोसिस्टम अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनेगा।
करोड़ों यूजर्स को मिलेगा सीधा फायदा
सरकार के इस फैसले से करोड़ों मोबाइल और इंटरनेट उपभोक्ताओं को यह भरोसा मिलेगा कि उनकी निजी जानकारी देश के भीतर ही सुरक्षित रहेगी। साथ ही ऑनलाइन मंजूरी व्यवस्था, डिजिटल प्रक्रियाओं और नए नियमों से टेलीकॉम सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ेगी, नई तकनीक तेजी से पहुंचेगी और भविष्य में ग्राहकों को बेहतर सेवाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है।