यूपी में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव!: अब पासपोर्ट की तरह सख्ती और पारदर्शिता के साथ बनेगा लाइसेंस; निजी सेंटरों पर ड्राइविंग टेस्ट, पुलिस वेरिफिकेशन...देखें लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया में होने वाले 4 बड़े बदलाव
यूपी में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव!

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया अब पहले से ज्यादा सख्त और पारदर्शी होने जा रही है। सड़क हादसों को कम करने के लिए योगी सरकार डीएल सिस्टम में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। नई व्यवस्था में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया को पासपोर्ट सिस्टम की तरह मजबूत बनाने पर काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई सड़क सुरक्षा बैठक के बाद परिवहन विभाग ने इस दिशा में तैयारी शुरू कर दी है। सरकार का उद्देश्य है कि बिना सही ट्रेनिंग और जानकारी वाले लोगों को आसानी से ड्राइविंग लाइसेंस न मिल सके।

पासपोर्ट जैसी व्यवस्था लागू करने की तैयारी

आपको बता दें कि अभी पासपोर्ट बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और पुलिस सत्यापन जैसी प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसी तरह ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया को भी ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने पर विचार किया जा रहा है। फिलहाल ड्राइविंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन होता है। आवेदक को बायोमेट्रिक सत्यापन और स्थायी लाइसेंस से पहले ड्राइविंग टेस्ट की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। टेस्ट पास करने के बाद ही लाइसेंस जारी किया जाता है।

अनट्रेंड ड्राइवरों को रोकना मुख्य उद्देश्य

गौरतलब है कि सरकार का मानना है कि सड़क हादसों की एक बड़ी वजह वाहन चालकों की गलती और ट्रैफिक नियमों की जानकारी की कमी भी है। नई व्यवस्था के जरिए यह सुनिश्चित करने की कोशिश होगी कि सड़क पर वही लोग वाहन चलाएं जिन्हें नियमों की सही जानकारी हो और जो वाहन चलाने में सक्षम हों।

ड्राइविंग टेस्ट सिस्टम में भी बड़ा बदलाव

ड्राइविंग टेस्ट की व्यवस्था में भी बदलाव किया जा रहा है। आने वाले समय में आवेदकों को परिवहन कार्यालय के बजाय अधिकृत निजी सेंटरों पर ड्राइविंग टेस्ट देना पड़ सकता है। इन सेंटरों पर तकनीकी तरीके से जांच होगी कि व्यक्ति वास्तव में वाहन चलाने योग्य है या नहीं। इससे टेस्ट प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने की तैयारी है।

पुलिस वेरिफिकेशन जैसे विकल्पों पर भी विचार

परिवहन विभाग यह भी देख रहा है कि मोटर व्हीकल नियमों के तहत पासपोर्ट जैसी व्यवस्था को किस तरह लागू किया जा सकता है। अगर नियमों में संभावना मिली तो भविष्य में कुछ अतिरिक्त सत्यापन प्रक्रियाएं भी जोड़ी जा सकती हैं, जिससे फर्जी या गलत तरीके से बनने वाले लाइसेंस पर रोक लगाई जा सके।

सड़क सुरक्षा सुधारने की बड़ी पहल

सरकार का लक्ष्य है कि सड़क पर प्रशिक्षित और जिम्मेदार चालक ही वाहन चलाएं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ड्राइविंग लाइसेंस केवल औपचारिक दस्तावेज नहीं बल्कि चालक की योग्यता का मजबूत प्रमाण बनेगा। 

माना जा रहा है कि इस बदलाव से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी और ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

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