अब बिना इंटरनेट मोबाइल पर चलेगा LIVE TV: D2M टेक्नोलॉजी से बदलेगी देश की तस्वीर, अब 9 करोड़ घरों में...जानें क्या है D2M तकनीक और कैसे करेगी काम
अब बिना इंटरनेट मोबाइल पर चलेगा LIVE TV

नई दिल्ली/तकनीकी : कल्पना कीजिए कि आपके मोबाइल में इंटरनेट नहीं है, मोबाइल डेटा खत्म हो चुका है या किसी इलाके में नेटवर्क कमजोर है, फिर भी आप अपने फोन पर लाइव टीवी देख सकें और ऑडियो सुन सकें। भारत में Direct-to-Mobile यानी D2M तकनीक इसी दिशा में एक नया विकल्प तैयार कर रही है। सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती इसके कमर्शियल रोलआउट की दिशा में आगे बढ़ रहा है और रिपोर्टों के मुताबिक अगले चरण में इसके लिए Request for Proposal (RFP) जारी किया जा सकता है। हालांकि, इसकी निश्चित लॉन्च तारीख अभी तय नहीं है।

क्या है D2M तकनीक?

आपको बता दें कि D2M यानी Direct-to-Mobile Broadcast ऐसी तकनीक है, जिसमें टीवी और अन्य मल्टीमीडिया कंटेंट को सीधे मोबाइल डिवाइस तक ब्रॉडकास्ट सिग्नल के जरिए पहुंचाया जाता है। इसके लिए सामान्य मोबाइल इंटरनेट या सेल्युलर डेटा कनेक्शन पर निर्भरता नहीं होती। आसान भाषा में समझें तो जैसे FM रेडियो में मोबाइल नेटवर्क के बजाय रेडियो सिग्नल के जरिए आवाज फोन तक पहुंचती है, उसी तरह D2M में ब्रॉडकास्ट नेटवर्क के जरिए वीडियो और ऑडियो कंटेंट मोबाइल तक पहुंचाया जा सकता है। इसका इस्तेमाल लाइव टीवी, न्यूज, खेल, ऑडियो और भविष्य में आपातकालीन अलर्ट जैसी सेवाओं के लिए किया जा सकता है।

इंटरनेट बंद होने पर भी कैसे चलेगा?

गौरतलब है कि D2M में कंटेंट मोबाइल टावर के सामान्य डेटा नेटवर्क से नहीं, बल्कि ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम से भेजा जाएगा। इसलिए यूजर को टीवी देखने के लिए मोबाइल डेटा खर्च करने की जरूरत नहीं होगी। इसका बड़ा फायदा उन इलाकों में हो सकता है जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर है। किसी प्राकृतिक आपदा या नेटवर्क बाधित होने की स्थिति में भी ब्रॉडकास्ट आधारित सूचना पहुंचाने की संभावना D2M को उपयोगी बना सकती है।

लेकिन हर मोबाइल में नहीं चलेगा D2M

यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मौजूदा हर स्मार्टफोन D2M सपोर्ट नहीं करता। इसके लिए मोबाइल में जरूरी हार्डवेयर और रिसीवर तकनीक का होना आवश्यक हो सकता है। इसमें एंटीना, रिसीवर, फिल्टर और बेसबैंड प्रोसेसिंग जैसी तकनीकी जरूरतें शामिल हो सकती हैं। इसलिए केवल मोबाइल में कोई ऐप डाउनलोड करने या सॉफ्टवेयर अपडेट करने से हर फोन D2M सक्षम नहीं हो जाएगा। भविष्य में D2M सपोर्ट वाले मोबाइल डिवाइस बाजार में आने पर इसका इस्तेमाल ज्यादा व्यापक हो सकता है।

देशभर में बड़े नेटवर्क की जरूरत

विदित है कि D2M को बड़े स्तर पर लागू करना सिर्फ मोबाइल फोन में तकनीक जोड़ने से संभव नहीं होगा। इसके लिए ब्रॉडकास्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रांसमीटर और पर्याप्त टेरेस्ट्रियल नेटवर्क तैयार करना होगा। प्रसार भारती, IIT कानपुर और तकनीकी साझेदारों की ओर से D2M से जुड़े परीक्षण पहले किए जा चुके हैं। दिल्ली और बेंगलुरु समेत कई स्थानों पर इसके प्रदर्शन और ट्रायल की जानकारी सामने आई है।

9 करोड़ घरों तक पहुंच बनाने की संभावना

भारत में बड़ी संख्या में घरों में अभी टीवी की सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मोबाइल फोन की व्यापक पहुंच को देखते हुए D2M भविष्य में टीवी और मल्टीमीडिया कंटेंट को उन लोगों तक पहुंचाने का एक अतिरिक्त माध्यम बन सकता है, जहां पारंपरिक टीवी या तेज इंटरनेट की पहुंच सीमित है। हालांकि, कमर्शियल रोलआउट, मोबाइल डिवाइस की उपलब्धता, ब्रॉडकास्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और बिजनेस मॉडल जैसी कई चुनौतियों का समाधान अभी बाकी है।

यानी आने वाले समय में मोबाइल सिर्फ इंटरनेट के सहारे कंटेंट देखने का माध्यम नहीं रहेगा। अगर D2M का बड़े स्तर पर रोलआउट सफल होता है, तो डेटा पैक खत्म होने या इंटरनेट कमजोर होने के बावजूद मोबाइल पर लाइव टीवी देखने का विकल्प एक नई तकनीकी व्यवस्था के रूप में सामने आ सकता है।

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