Ola-Uber-Rapido को बड़ा झटका!: सरकार ने ‘एडवांस टिप’ को लेकर जारी किया सख्त आदेश, अब राइड बुक करते समय नहीं कर सकेंगे मनमानी, सरकार ने इन नियमों में किया बड़ा बदलाव?
Ola-Uber-Rapido को बड़ा झटका!

लाइफस्टाइल : कैब बुक करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खबर है। अब राइड शुरू होने से पहले टिप के नाम पर अतिरिक्त रकम देने का दबाव बनाने वाली व्यवस्था पर सरकार ने सख्ती दिखाई है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय और केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने कैब एग्रीगेटर्स को राइड शुरू होने से पहले ‘एडवांस टिप’ मांगने की व्यवस्था बंद करने का निर्देश दिया है।

Ola, Uber और Rapido पर पड़ेगा इसका असर

आपको बता दें कि सरकार के इस कदम से Ola, Uber और Rapido जैसी कैब बुकिंग सेवाओं पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। उपभोक्ताओं की शिकायतों में यह मुद्दा सामने आया था कि कुछ मामलों में राइड बुक करते समय ही टिप का विकल्प सामने आता था और यात्री को अतिरिक्त भुगतान करने के लिए प्रेरित किया जाता था।

राइड से पहले टिप देना जरूरी नहीं

गौरतलब है कि नई व्यवस्था का सबसे बड़ा असर यात्रियों पर पड़ने वाले इसी दबाव को लेकर है। टिप को ग्राहक की इच्छा पर निर्भर माना गया है। यानी यात्री अपनी राइड और ड्राइवर की सेवा का अनुभव लेने के बाद तय कर सकता है कि उसे टिप देनी है या नहीं। सरकार की ओर से इस तरह के पहले से भुगतान के दबाव को उपभोक्ता हितों के लिहाज से गंभीरता से लिया गया है। CCPA डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऐसे तरीकों की जांच कर रहा है, जिन्हें उपभोक्ता को किसी विकल्प की ओर अनुचित तरीके से धकेलने वाला माना जा सकता है।

‘डार्क पैटर्न’ पर सरकार की नजर

इस पूरे मामले में ‘डार्क पैटर्न’ शब्द भी चर्चा में है। आसान भाषा में समझें तो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऐसा डिजाइन या तरीका, जिससे ग्राहक को उसकी सामान्य इच्छा के विपरीत कोई विकल्प चुनने के लिए प्रभावित किया जाए, डार्क पैटर्न के दायरे में आ सकता है। उपभोक्ता मामलों का विभाग पहले भी डिजिटल सेवाओं और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर अनुचित कारोबारी तरीकों के खिलाफ कार्रवाई करता रहा है। CCPA को उपभोक्ताओं की शिकायतें National Consumer Helpline के जरिए भी मिलती हैं।

Rapido पर पहले ही हुई कार्रवाई

विदित है कि CCPA ने एडवांस टिपिंग के मामले में Rapido पर ₹10 लाख का जुर्माना लगाया है और Ola तथा Uber से जुड़े मामलों की भी जांच की बात सामने आई है। ऐसे में कैब कंपनियों के लिए अब बुकिंग प्रक्रिया में टिप के विकल्प को लेकर ज्यादा सावधानी बरतना जरूरी होगा। सरकार की चिंता सिर्फ टिप तक सीमित नहीं है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ग्राहक को अतिरिक्त भुगतान के लिए प्रेरित करने वाले तरीकों की जांच व्यापक उपभोक्ता संरक्षण के नजरिए से की जा रही है।

यात्रियों के लिए क्या बदलेगा?

अब यात्रियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि टिप देना अनिवार्य शुल्क नहीं है। ग्राहक अपनी राइड पूरी होने के बाद सेवा के अनुभव के आधार पर खुद फैसला कर सकता है कि टिप देनी है या नहीं। अगर किसी ग्राहक को लगता है कि कैब बुकिंग के दौरान उससे किसी अतिरिक्त भुगतान के लिए अनुचित दबाव बनाया जा रहा है, तो वह इसकी शिकायत उपभोक्ता हेल्पलाइन पर कर सकता है। National Consumer Helpline पर शिकायत के लिए 1915 नंबर उपलब्ध है।

इस कदम से कैब बुकिंग के दौरान ग्राहकों को मिलने वाले विकल्पों और भुगतान प्रक्रिया पर निगरानी और बढ़ने की उम्मीद है। सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करते समय ग्राहक को स्पष्ट जानकारी मिले और किसी अतिरिक्त भुगतान के लिए अनुचित तरीके से प्रभावित न किया जाए।

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