नई दिल्ली: हाईवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए टोल प्लाजा का अनुभव आने वाले समय में पूरी तरह बदल सकता है। सरकार Multi-Lane Free Flow (MLFF) आधारित बैरियर-फ्री टोलिंग व्यवस्था को बढ़ावा दे रही है। इस सिस्टम में वाहन को टोल प्लाजा पर लगे बैरियर के सामने रुकने या किसी खास लेन में जाकर भुगतान करने की जरूरत नहीं होगी। वाहन चलते हुए टोलिंग पॉइंट से गुजर सकेगा और शुल्क इलेक्ट्रॉनिक तरीके से वसूला जाएगा।
आखिर कैसे काम करेगा बैरियर-फ्री टोल?
आपको बता दें कि नई व्यवस्था में FASTag और Automatic Number Plate Recognition (ANPR) तकनीक का इस्तेमाल होगा। सड़क के ऊपर लगाए गए सिस्टम में RFID आधारित FASTag रीडर और हाई-परफॉर्मेंस कैमरे वाहन की पहचान करेंगे। कैमरा नंबर प्लेट पढ़ेगा और FASTag से जुड़ी जानकारी के आधार पर संबंधित वाहन से टोल शुल्क की वसूली की जाएगी। यानी वाहन को टोल बूथ पर रोकने की जरूरत नहीं होगी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि टोल प्लाजा पर वाहनों की कतार और रुकने का समय कम किया जा सकेगा। NHAI के मुताबिक, गुजरात के चोर्यासी टोल प्लाजा पर 1 मई 2026 को देश की पहली MLFF व्यवस्था शुरू की गई थी। पहले ही दिन करीब 41,500 वाहन इस बैरियर-फ्री सिस्टम से गुजरे।
FASTag में बैलेंस नहीं हुआ तो क्या होगा?
गौरतलब है कि बैरियर हटने का मतलब यह नहीं है कि FASTag में पैसे रखना जरूरी नहीं रहेगा। वाहन चालक को अपने FASTag खाते में पर्याप्त बैलेंस रखना होगा। अगर FASTag में पर्याप्त राशि नहीं है, वह अमान्य है या काम नहीं कर रहा है, तो वाहन की यात्रा रिकॉर्ड होने के बाद ई-नोटिस जारी किया जा सकता है। 2026 के नियमों के तहत अगर नोटिस मिलने के 72 घंटे के भीतर भुगतान कर दिया जाता है तो केवल मूल टोल राशि देनी होगी। इसके बाद भुगतान न करने पर सामान्य शुल्क का दोगुना शुल्क लागू हो सकता है।
गाड़ी चलती रहेगी, सिस्टम खुद पहचान लेगा
MLFF व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव यही है कि वाहन की पहचान और टोल भुगतान का काम तकनीक के जरिए होगा। वाहन के FASTag और नंबर प्लेट की जानकारी रिकॉर्ड होने के बाद सिस्टम संबंधित वाहन से जुड़े डेटा के आधार पर शुल्क की प्रक्रिया पूरी करेगा। NHAI के मुताबिक, इस व्यवस्था से टोल संचालन में मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और टोल प्लाजा पर भीड़, देरी और ईंधन की बर्बादी घटाने में मदद मिल सकती है।
देश में शुरू हो चुका है MLFF का प्रयोग
विदित है कि भारत में इस दिशा में पहला बड़ा कदम गुजरात के NH-48 स्थित चोर्यासी टोल प्लाजा पर उठाया गया। इसके बाद हरियाणा के घरौंडा टोल प्लाजा सहित अन्य स्थानों पर भी MLFF व्यवस्था लागू करने की दिशा में काम किया गया है। NHAI ने 2025 में ही लगभग 25 राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क प्लाजा पर MLFF लागू करने की योजना बताई थी।
टोल का भविष्य अब बैरियर से डिजिटल सिस्टम की ओर
दरअसल, FASTag ने टोल भुगतान को पहले ही काफी हद तक डिजिटल बना दिया है। अब MLFF उसका अगला चरण माना जा रहा है, जिसमें टोल बूथ और बैरियर की भूमिका और कम होगी। हालांकि, पूरे देश के सभी टोल प्लाजा पर यह व्यवस्था एक साथ लागू नहीं होगी। अलग-अलग स्थानों पर तकनीकी और परिचालन तैयारियों के आधार पर इसका विस्तार किया जा रहा है। ऐसे में वाहन चालकों के लिए फिलहाल सबसे जरूरी है कि FASTag सक्रिय रखें और उसमें पर्याप्त बैलेंस बनाए रखें।
आने वाले समय में हाईवे पर तस्वीर कुछ ऐसी हो सकती है कि गाड़ी की रफ्तार बरकरार रहेगी, बैरियर नहीं उठेगा, कैश की जरूरत नहीं होगी और टोल का भुगतान सिस्टम खुद रिकॉर्ड कर लेगा।