WhatsApp के बाद Telegram और Signal की बढ़ी मुश्किलें!: यूजरनेम फीचर पर IT मंत्रालय ने नोटिस भेज पूछे ये 4 अहम सवाल, वहीं व्हाट्सएप्प ने...जानें सरकार ने क्यों उठाया यह कदम और क्या है सरकार की सबसे बड़ी चिंता?
WhatsApp के बाद Telegram और Signal की बढ़ी मुश्किलें!

नई दिल्ली : यूजरनेम फीचर को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और गहरा गया है। WhatsApp के बाद अब केंद्र सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram और Signal को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने दोनों कंपनियों से पूछा है कि उनके प्लेटफॉर्म पर मौजूद यूजरनेम फीचर का दुरुपयोग रोकने के लिए कौन-कौन से सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं और आखिर इस फीचर को जारी रखने की आवश्यकता क्या है।

सरकार ने क्यों उठाया यह कदम?

आपको बता दें कि सरकार का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति की पहचान केवल यूजरनेम से छिपाई जा सके, तो साइबर अपराधियों के लिए फर्जी पहचान बनाकर लोगों को धोखा देना आसान हो सकता है। इससे ऑनलाइन ठगी, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी प्रोफाइल और पहचान छिपाकर अपराध करने जैसी घटनाएं बढ़ने की आशंका है। इन्हीं चिंताओं को देखते हुए आईटी मंत्रालय ने पहले WhatsApp की मूल कंपनी Meta को नोटिस भेजा था और अब Telegram तथा Signal से भी विस्तृत जवाब मांगा है।

Telegram और Signal से क्या पूछा गया?

सूत्रों के अनुसार मंत्रालय ने दोनों प्लेटफॉर्म से कई अहम सवाल पूछे हैं। इनमें प्रमुख रूप से यह जानना चाहा गया है कि—

  • यूजरनेम फीचर की वास्तविक आवश्यकता क्या है?
  • फर्जी अकाउंट और नकली पहचान को रोकने के लिए कौन-सी सुरक्षा व्यवस्था मौजूद है?
  • यदि कोई अपराधी यूजरनेम का गलत इस्तेमाल करता है तो उसकी पहचान कैसे की जाएगी?
  • कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जांच में कंपनियां किस प्रकार सहयोग करेंगी?

सरकार इन जवाबों के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार करेगी।

WhatsApp को भी मिल चुका है नोटिस

आपको बता दें कि कुछ दिन पहले सरकार ने WhatsApp के नए यूजरनेम फीचर को लेकर भी Meta को नोटिस जारी किया था। सरकार ने पूछा था कि यह फीचर भारतीय आईटी कानूनों और संबंधित नियमों का पालन किस प्रकार करेगा। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया कि जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसियों को संदिग्ध यूजर की पहचान कैसे उपलब्ध कराई जाएगी।

WhatsApp ने क्या दी सफाई?

Vidit WhatsApp ने अपने आधिकारिक ब्लॉग और FAQ के माध्यम से कहा है कि यूजरनेम फीचर पूरी तरह वैकल्पिक होगा। इसका उद्देश्य यूजर्स की प्राइवेसी बढ़ाना है ताकि नए लोगों से बातचीत करते समय हर बार मोबाइल नंबर साझा न करना पड़े। कंपनी का कहना है कि यूजरनेम फीचर के बावजूद अकाउंट सुरक्षा, एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, रिपोर्ट, ब्लॉक और अन्य सुरक्षा सुविधाएं पहले की तरह काम करती रहेंगी।

सरकार की सबसे बड़ी चिंता क्या है?

विदित है कि सरकार का मानना है कि यदि अपराधी किसी बैंक, सरकारी संस्था या किसी व्यक्ति से मिलता-जुलता यूजरनेम बनाकर लोगों से संपर्क करेंगे, तो साइबर ठगी के मामले बढ़ सकते हैं। इसलिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि ऐसे फीचर्स के साथ मजबूत पहचान सत्यापन और सुरक्षा तंत्र भी मौजूद हो।

क्या बदल सकते हैं नियम?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इन प्लेटफॉर्म के जवाबों से संतुष्ट नहीं होती है, तो भविष्य में यूजरनेम फीचर को लेकर नए दिशा-निर्देश या अतिरिक्त सुरक्षा मानक लागू किए जा सकते हैं। फिलहाल सरकार सभी प्रमुख मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के यूजरनेम सिस्टम की समीक्षा कर रही है।

डिजिटल सुरक्षा और ऑनलाइन धोखाधड़ी पर बढ़ती चिंता के बीच केंद्र सरकार का यह कदम इस बात का संकेत माना जा रहा है कि आने वाले समय में मैसेजिंग ऐप्स पर सुरक्षा और पहचान सत्यापन से जुड़े नियम और अधिक सख्त हो सकते हैं।

अन्य खबरे