अब 1 घंटा 40 मिनट में जेवर से लखनऊ, तो दिल्ली से वाराणसी 3 घंटा 50 मिनट!: दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन का फाइनल ब्लूप्रिंट तैयार, किसानों को इतने गुना मुआवजा वही...जानें ट्रेन फाइनल रूट और किराया?
अब 1 घंटा 40 मिनट में जेवर से लखनऊ, तो दिल्ली से वाराणसी 3 घंटा 50 मिनट!

नई दिल्ली: दिल्ली से वाराणसी तक का लंबा सफर आने वाले वर्षों में इतिहास बन सकता है। केंद्र सरकार ने दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल (DVHSR) कॉरिडोर का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत अब दिल्ली से वाराणसी तक करीब 865 किलोमीटर की दूरी महज 3 घंटा 50 मिनट में तथा जेवर एयरपोर्ट से लखनऊ की दूरी मात्र 100 मिनट में पूरी की जा सकेगी। यह हाई स्पीड बुलेट ट्रेन सिर्फ दो शहरों को नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के आर्थिक और औद्योगिक विकास को भी नई रफ्तार देने वाली परियोजना मानी जा रही है।

क्या है दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन परियोजना?

आपको बता दें कि दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर भारत की सबसे बड़ी प्रस्तावित बुलेट ट्रेन परियोजनाओं में से एक है। इसका उद्देश्य राजधानी दिल्ली को उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से हाई स्पीड रेल नेटवर्क के जरिए जोड़ना है, ताकि यात्रा का समय कई गुना कम हो सके और व्यापार, पर्यटन तथा निवेश को नई गति मिले। इस कॉरिडोर पर ट्रेन लगभग 320 किलोमीटर प्रति घंटे की ऑपरेशनल स्पीड से दौड़ेगी, जबकि इसकी डिजाइन स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।

क्या होगा फाइनल रूट?

गौरतलब है कि प्रस्तावित बुलेट ट्रेन दिल्ली से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख शहरों से गुजरेगी। इसमें विशेष रूप से नोएडा का जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट और लखनऊ को भी जोड़ा गया है।

प्रमुख शहरों में शामिल हैं—

  • दिल्ली
  • जेवर एयरपोर्ट (नोएडा)
  • मथुरा
  • आगरा
  • फिरोजाबाद
  • इटावा
  • कन्नौज
  • लखनऊ
  • रायबरेली
  • प्रयागराज
  • न्यू भदोही
  • वाराणसी

इस रूट के जुड़ने से पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच तेज और आधुनिक परिवहन नेटवर्क विकसित होगा।

10-12 घंटे का सफर घटकर लगभग 4 घंटे में

गौरतलब है कि वर्तमान में दिल्ली से वाराणसी ट्रेन या सड़क मार्ग से पहुंचने में लगभग 10 से 12 घंटे लगते हैं। लेकिन बुलेट ट्रेन शुरू होने के बाद यही दूरी लगभग 3 घंटे 50 मिनट में पूरी हो सकेगी। इससे व्यापारिक यात्राओं, पर्यटन, मेडिकल इमरजेंसी और सरकारी कार्यों के लिए आवागमन बेहद आसान हो जाएगा।

जेवर एयरपोर्ट और लखनऊ को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा

इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मिलने की उम्मीद है। विदेश से आने वाले यात्री एयरपोर्ट से उतरकर कुछ ही समय में लखनऊ या वाराणसी पहुंच सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे—

  • पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
  • विदेशी निवेश आकर्षित होगा।
  • आईटी, उद्योग और स्टार्टअप सेक्टर को नई गति मिलेगी।
  • पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच आर्थिक कॉरिडोर मजबूत होगा।

जमीन अधिग्रहण होगी सबसे बड़ी चुनौती

गौरतलब है कि परियोजना के लिए उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बड़ी मात्रा में भूमि अधिग्रहित करनी होगी। सरकार ने इसके लिए पारदर्शी मुआवजा नीति तैयार करने की बात कही है।

प्रस्ताव के अनुसार—

  • ग्रामीण क्षेत्रों में सर्किल रेट का चार गुना तक मुआवजा दिया जा सकता है।
  • शहरी क्षेत्रों में दो गुना तक मुआवजा मिलने का प्रावधान है।
  • कई मामलों में प्रभावित परिवारों को पुनर्वास सहायता और रोजगार संबंधी लाभ भी दिए जा सकते हैं।

किराया कितना हो सकता है?

हालांकि सरकार ने अभी आधिकारिक किराया घोषित नहीं किया है, लेकिन विभिन्न अनुमानों के अनुसार दिल्ली से वाराणसी तक बुलेट ट्रेन का किराया लगभग 3,000 से 4,500 रुपये के बीच हो सकता है। यह किराया कई फ्लाइट टिकटों से कम या बराबर माना जा रहा है, जबकि यात्रा का समय भी बेहद कम होगा।

जापानी तकनीक से चलेगी बुलेट ट्रेन

इस परियोजना में जापान की प्रसिद्ध शिनकानसेन (Shinkansen) हाई स्पीड रेल तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसे दुनिया की सबसे सुरक्षित रेल प्रणालियों में गिना जाता है।

इसमें कई आधुनिक तकनीकें शामिल होंगी—

  • ऑटोमैटिक ट्रेन कंट्रोल (ATC)
  • भूकंप डिटेक्शन सिस्टम
  • गिट्टी रहित (Ballastless) स्लैब ट्रैक
  • अत्याधुनिक सिग्नलिंग और सुरक्षा व्यवस्था

इन तकनीकों की मदद से तेज रफ्तार के बावजूद यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

यूपी के विकास को मिलेगी नई रफ्तार

दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन परियोजना को उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा गेमचेंजर माना जा रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी से औद्योगिक निवेश, पर्यटन, रोजगार, लॉजिस्टिक्स और रियल एस्टेट सेक्टर में तेज विकास की उम्मीद है। साथ ही जेवर एयरपोर्ट, लखनऊ और वाराणसी जैसे बड़े केंद्र एक हाई स्पीड नेटवर्क से जुड़कर प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को नई ऊंचाई दे सकते हैं।

अगर परियोजना तय समय पर पूरी होती है, तो आने वाले वर्षों में दिल्ली से वाराणसी का सफर देश के सबसे तेज, सुरक्षित और आधुनिक रेल सफरों में शामिल होगा।

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