ई-रिक्शा के बाद क्या अब ई-कार और इलेक्ट्रिक स्कूटर भी हो सकते हैं हैक!: सरकार ई-वाहनों की सुरक्षा को लेकर बनाएगी नए नियम, अगर आप के पास भी ई-वाहन है तो एक्सपर्ट्स से जानिए कि किन बातों का रखे ध्यान_एक नजर
ई-रिक्शा के बाद क्या अब ई-कार और इलेक्ट्रिक स्कूटर भी हो सकते हैं हैक!

नई दिल्ली: हाल ही में कुछ ई-रिक्शा की बैटरियों को मोबाइल ऐप के जरिए दूर से बंद किए जाने की घटनाओं ने इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उपयोगकर्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या इसी तरह इलेक्ट्रिक कार या इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर भी किसी दूसरे के फोन से बंद किए जा सकते हैं? इस सवाल पर साइबर सुरक्षा और तकनीकी विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है।

क्या ई-कार और ई-स्कूटर भी हो सकते हैं हैक?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विशेषज्ञों के अनुसार, तकनीकी रूप से किसी भी डिजिटल सिस्टम को निशाना बनाया जा सकता है, लेकिन बड़ी और प्रतिष्ठित कंपनियों की इलेक्ट्रिक कारों और टू-व्हीलर में ऐसा होना बेहद मुश्किल है। इन वाहनों में मजबूत एन्क्रिप्शन, पासवर्ड, ओटीपी, फिंगरप्रिंट और कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था होती है। इसलिए कोई भी बाहरी व्यक्ति सामान्य मोबाइल ऐप के जरिए उन्हें नियंत्रित नहीं कर सकता। इसके विपरीत, कुछ सस्ते या बिना पर्याप्त सुरक्षा वाले बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम में सुरक्षा कमजोर होने पर दुरुपयोग की संभावना बढ़ जाती है।

AI और कनेक्टेड टेक्नोलॉजी कितनी सुरक्षित?

गौरतलब है कि आजकल कई नई कारों और इलेक्ट्रिक वाहनों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटरनेट आधारित स्मार्ट फीचर्स दिए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ये सिस्टम सामान्य उपयोग के लिए सुरक्षित हैं, लेकिन यदि सॉफ्टवेयर में कोई तकनीकी खामी या सुरक्षा दोष रह जाए तो साइबर हमले की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।

वाहन मालिक किन बातों का रखें ध्यान?

विशेषज्ञों ने इलेक्ट्रिक वाहन उपयोगकर्ताओं को कुछ जरूरी सावधानियां अपनाने की सलाह दी है—

  • जरूरत न हो तो मोबाइल का ब्लूटूथ और हॉटस्पॉट बंद रखें।
  • बैटरी या वाहन का डिफॉल्ट पासवर्ड तुरंत बदल दें।
  • केवल आधिकारिक ऐप का ही इस्तेमाल करें।
  • सर्विसिंग हमेशा अधिकृत सर्विस सेंटर पर कराएं।
  • वाहन के सॉफ्टवेयर और ऐप को समय-समय पर अपडेट करते रहें।

अगर वाहन हैक होने का संदेह हो तो क्या करें?

यदि वाहन अचानक असामान्य व्यवहार करने लगे या हैक होने का शक हो तो सबसे पहले वाहन को सुरक्षित स्थान पर रोकें। जरूरत पड़ने पर मैनुअल तरीके से वाहन बंद करें या बैटरी का कट-ऑफ स्विच इस्तेमाल करें। मोबाइल का ब्लूटूथ और इंटरनेट बंद करें तथा दोबारा वाहन स्टार्ट करने की बजाय कंपनी की हेल्पलाइन या अधिकृत सर्विस सेंटर से संपर्क करें।

सरकार भी बना रही नए सुरक्षा नियम

विदित है कि सरकार अब इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर की साइबर सुरक्षा को लेकर नए नियम तैयार कर रही है। प्रस्तावित नियमों के तहत आयातित इलेक्ट्रिक वाहनों और उनकी बैटरियों में मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य की जा सकती है। साथ ही ऐसे मोबाइल ऐप्स पर भी कार्रवाई की तैयारी है, जिनका इस्तेमाल बैटरी सिस्टम से छेड़छाड़ के लिए किया जा सकता है।

क्या आम लोगों को घबराने की जरूरत है?

विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घबराने की आवश्यकता नहीं है। अधिकतर प्रतिष्ठित कंपनियों के इलेक्ट्रिक वाहन सुरक्षित हैं और उनमें मजबूत सुरक्षा तकनीक मौजूद है। हालांकि, वाहन मालिकों को सतर्क रहना चाहिए और सुरक्षा से जुड़े सभी जरूरी नियमों का पालन करना चाहिए, ताकि किसी भी संभावित साइबर खतरे से बचा जा सके।

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