जमीन विवाद व रजिस्ट्री को लेकर हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला!: जल्दी फैसले के लिये अब सभी जिलों में लगेगी लोक अदालतें, घर बैठे होगी डिजिटल रजिस्ट्री, वहीं तहसीलों पर...जानें होने वाले बदलाव और इसके फायदे_एक नजर
जमीन विवाद व रजिस्ट्री को लेकर हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला!

हरियाणा : हरियाणा में जमीन और रजिस्ट्री से जुड़े विवादों में सालों तक चक्कर काटने वाले लोगों के लिए अब बड़ी राहत की तैयारी हो गई है। राज्य सरकार ने फैसला लिया है कि अब जमीन संबंधी मामलों का निपटारा तेज़ी से और समयबद्ध तरीके से किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश के सभी जिलों में राजस्व लोक अदालतें लगेंगी, जहां उपायुक्त, SDM और तहसीलदार आपसी सहमति से विवाद सुलझाने की कोशिश करेंगे। Nayab Singh Saini ने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की पांच वर्षीय कार्ययोजना की समीक्षा बैठक में यह बड़ा फैसला लिया। सरकार का दावा है कि इससे लोगों को अदालतों और तहसीलों के लंबे चक्कर से राहत मिलेगी और वर्षों से लंबित जमीन विवादों का तेजी से समाधान होगा।

अब डिजिटल होगा जमीन विवादों का पूरा सिस्टम

आपको बता दें कि राजस्व विभाग अब पूरी व्यवस्था को डिजिटल बनाने जा रहा है। इसके तहत डिजिटल कोर्ट केस मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया जाएगा। यानी अब जमीन विवादों की फाइलें सिर्फ अलमारियों में धूल नहीं खाएंगी, बल्कि ऑनलाइन ट्रैक की जा सकेंगी। सरकार का लक्ष्य है कि हर केस की स्थिति डिजिटल रिकॉर्ड में उपलब्ध रहे और लोगों को पारदर्शी तरीके से जानकारी मिल सके।

पटवारियों को मिलेंगे लैपटॉप और हाईस्पीड इंटरनेट

गौरतलब है कि सरकार ने नव-नियुक्त पटवारियों को लैपटॉप और टैबलेट देने का भी फैसला लिया है। साथ ही तहसील स्तर तक हाईस्पीड इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी ताकि सभी राजस्व सेवाएं डिजिटल माध्यम से दी जा सकें। इतना ही नहीं, पटवारियों को नई तकनीक और आधुनिक राजस्व प्रणाली की ट्रेनिंग देने के लिए राज्य स्तरीय प्रशिक्षण केंद्र भी खोला जाएगा। सरकार का मानना है कि डिजिटल पटवारी व्यवस्था से भ्रष्टाचार और देरी दोनों में कमी आएगी।

अब घर बैठे होगी रजिस्ट्री, विदेश में रहने वालों को राहत

विदित है कि हरियाणा सरकार फेसलेस रजिस्ट्रेशन सिस्टम को भी तेजी से लागू कर रही है। इसका सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को मिलेगा जो दूसरे राज्यों या विदेश में रहते हैं और जमीन की रजिस्ट्री के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो पाते। अब बिना तहसील पहुंचे भी कई प्रक्रियाएं पूरी की जा सकेंगी। सरकार के मुताबिक प्रदेश में अब तक 4 लाख से ज्यादा पेपरलेस रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं और फिलहाल किसी भी तहसील में 15 दिन से ज्यादा पुराना आवेदन लंबित नहीं है।

ई-स्टांप से खत्म होगा फर्जीवाड़ा

आपको बता दें कि प्रदेश में अब सभी प्रकार के स्टांप की बिक्री ई-स्टांप के जरिए होगी। इससे फर्जी स्टांप और धोखाधड़ी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। सरकार शहरी संपत्ति रिकॉर्ड को प्रॉपर्टी आईडी से जोड़ने की तैयारी भी कर रही है ताकि जमीन और संपत्ति से जुड़ी जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो सके।

सरकारी जमीन का भी बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड

राज्य सरकार अब सरकारी जमीनों का पूरा डेटा ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट करेगी। कृषि विभाग के साथ मिलकर भूमि अभिलेखों का 100 प्रतिशत डिजिटलीकरण और जियो-टैगिंग किया जा रहा है। हर जमीन के टुकड़े को यूनिक नंबर दिया जाएगा, जिससे फर्जी कब्जे और रिकॉर्ड में गड़बड़ी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

अब आग बुझाएंगे रोबोट! AI कंट्रोल सेंटर की तैयारी

आपको बता दें कि बैठक में सिर्फ जमीन विवाद ही नहीं, बल्कि अग्निशमन व्यवस्था को लेकर भी बड़े फैसले हुए। अग्निशमन विभाग ने बताया कि अब सभी जिलों में AI आधारित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाए जाएंगे। आग बुझाने के लिए रोबोट इस्तेमाल करने की संभावनाओं पर भी काम शुरू हो गया है। सरकार का कहना है कि इससे अग्निशमन कर्मचारियों का जोखिम कम होगा और बड़े हादसों में तेजी से कार्रवाई की जा सकेगी।

‘आपदा मित्र योजना’ पूरे हरियाणा में लागू होगी

फिलहाल 8 जिलों में चल रही “आपदा मित्र योजना” को अब सभी 23 जिलों तक बढ़ाया जाएगा। इसके तहत आपदा के समय स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित लोगों की मदद ली जाएगी। सरकार इसे भविष्य की आपदा प्रबंधन रणनीति का अहम हिस्सा मान रही है।

सरकार के ये फैसले साफ संकेत दे रहे हैं कि हरियाणा अब जमीन रिकॉर्ड, रजिस्ट्री और विवाद निपटारे की पूरी व्यवस्था को हाईटेक और डिजिटल बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अगर योजनाएं जमीन पर सही तरीके से लागू होती हैं, तो आने वाले समय में लोगों को तहसीलों के चक्कर, फाइलों की देरी और विवादों के लंबे इंतजार से बड़ी राहत मिल सकती है।

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